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श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए सिद्धू मूसेवाला, दिया माफीनामा- जो सजा मिलेगी स्वीकार करूंगा
Thu, 05 Mar 2020 04:26 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर(पंजाब)
अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 05 Mar 2020 04:26 PM IST
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सिद्धू मूसेवाला
- फोटो : फाइल फोटो
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सिख पंथ की महान शख्सियत माई भागो के बारे में विवादित गीत गाने वाले गायक सिद्धू मूसेवाला वीरवार सुबह अपने पिता बलकौर सिंह के साथ श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। वहां उन्होंने श्री अकाल तख्त के सचिवालय में जत्थेदार हरप्रीत सिंह के सामने पेश होकर माई भागो के बारे में गाए विवादित गीत के बारे में लिखित माफी मांगी।
लगभग एक घंटा तक जत्थेदार से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धू मूसेवाला ने कहा कि उनको ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नहीं बुलाया था। वह खुद श्री अकाल तख्त में हाजिर हुए हैं। उनसे कोई तो गलती हुई है, जिस कारण वह श्री अकाल तख्त में पेश हुए है। जब उनको यह पूछा गया कि क्या जत्थेदार ने उन्हें कोई धार्मिक सजा सुनाई है।
जिस पर मूसेवाला ने कहा कि अभी उन्होंने लिखित माफी मांगी है, जो भी सजा मिलेगी वह स्वीकार करेंगे। याद रहे कि इस गीत के बाद पैदा हुए विवाद के बाद सिद्धू मूसेवाला जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से भेंट करना चाहते थे।
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लगभग एक घंटा तक जत्थेदार से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धू मूसेवाला ने कहा कि उनको ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नहीं बुलाया था। वह खुद श्री अकाल तख्त में हाजिर हुए हैं। उनसे कोई तो गलती हुई है, जिस कारण वह श्री अकाल तख्त में पेश हुए है। जब उनको यह पूछा गया कि क्या जत्थेदार ने उन्हें कोई धार्मिक सजा सुनाई है।
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जिस पर मूसेवाला ने कहा कि अभी उन्होंने लिखित माफी मांगी है, जो भी सजा मिलेगी वह स्वीकार करेंगे। याद रहे कि इस गीत के बाद पैदा हुए विवाद के बाद सिद्धू मूसेवाला जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से भेंट करना चाहते थे।
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सोशल मीडिया में लाइव होकर माफी मांगी थी
इस गीत पर विवाद शुरू होते ही मूसेवाला ने सोशल मीडिया में लाइव होकर माफी मांगी थी और श्री अकाल तख्त साहिब को एक माफीनामा भी भेजा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मैं एक विनम्र सेवक शुभदीप सिंह सिद्धू (सिद्धू मूसेवाला) विनम्रता सहित प्रार्थना करता हूं कि बीते दिनों मैंने एक गीत गाया था जिसमें सिख पंथ की महान शख्सियत माई भागो का उल्लेख था।
उन्हें जानकारी नहीं थी कि इससे सिख पंथ की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। मैं गुरु का विनम्र सेवक हूं और श्री अकाल तख्त साहिब में अथाह विश्वास रखता हूं। अनजाने में हुई इस गलती की मैं सिर झुका कर माफी मांगता हूं और विश्वास दिलाता हूं कि भविष्य में ऐसी कोई गलती दोबारा नहीं होगी। इस गलती के लिए उन्हें जो भी सजा सुनाई जाएगी, मैं एक विनम्र सिख की भांति उसे हंस कर स्वीकार करूंगा।
मैं नवंबर के अंत में श्री अकाल तख्त साहिब में परिवार सहित पेश होउंगा। इस माफीनामे के बाद सिद्धू मूसेवाला अपने परिजनों के साथ श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने आए भी थे, लेकिन उस दिन जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के अमृतसर में न होने के कारण मूसेवाला की उनसे भेंट नहीं हो सकी थी।
उन्हें जानकारी नहीं थी कि इससे सिख पंथ की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। मैं गुरु का विनम्र सेवक हूं और श्री अकाल तख्त साहिब में अथाह विश्वास रखता हूं। अनजाने में हुई इस गलती की मैं सिर झुका कर माफी मांगता हूं और विश्वास दिलाता हूं कि भविष्य में ऐसी कोई गलती दोबारा नहीं होगी। इस गलती के लिए उन्हें जो भी सजा सुनाई जाएगी, मैं एक विनम्र सिख की भांति उसे हंस कर स्वीकार करूंगा।
मैं नवंबर के अंत में श्री अकाल तख्त साहिब में परिवार सहित पेश होउंगा। इस माफीनामे के बाद सिद्धू मूसेवाला अपने परिजनों के साथ श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने आए भी थे, लेकिन उस दिन जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के अमृतसर में न होने के कारण मूसेवाला की उनसे भेंट नहीं हो सकी थी।