सिख दंगे: टाइटलर की पेशकश पर SGPC अध्यक्ष का करारा जवाब
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सिख दंगा मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के अकाल तख्त पर माफी मांगने की पेशकश पर गर्माई पंजाब की सियासत। दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर की ओर से 1984 के दंगों में हाथ होने के आरोपों के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच माफी मांगने की जो पेशकश की गई है, उससे पंजाब की राजनीति में दंगे का मुद्दा एक बार फिर गरम होता नजर आ रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा है कि टाइटलर गैर सिख हैं। मर्यादा के अनुसार उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब में नहीं बुलाया जा सकता है। यदि वह अपने तौर पर माफी मांगने के इच्छुक हैं तो एसजीपीसी की ओर से उन्हें कोई रोक नहीं है।
हालांकि जत्थेदार मक्कड़ ने स्पष्ट किया है कि टाइटलर के खिलाफ अदालत में जो केस लड़ रहे हैं, उसे जारी रखा जाएगा। उससे एसजीपीसी पीछे नहीं हटेगी, क्योंकि वह हत्याओं के मुख्य आरोपी हैं। उनके साथ सिख संगत कोई सहानुभूति नहीं कर सकती।
टाइटलर की ओर से सिख दंगों में अपने हाथ होने से इंकार करने की बात कहे जाने पर जत्थेदार मक्कड़ ने कहा कि मामला अदालत में है। अदालत फैसला करेगी कि वह दोषी हैं या नहीं।
टाइटलर के खिलाफ हैं अदालती सबूत : फूलका
आम आदमी पार्टी के नेता एचएस फूलका ने कहा है कि उनके पास कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ अदालती सबूत हैं। जोकि पब्लिक डोमेन में नहीं हैं। वे सारे सबूत वह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को सौंपेंगे।
फूलका ने बताया कि शुक्रवार को नई दिल्ली में ज्ञानी जी से होने वाली उनकी मीटिंग स्थगित हो गई। अब यह मीटिंग रविवार को अमृतसर में होगी। उन्होंने कहा कि टाइटलर ने कहा है कि वह श्री अकालतख्त साहिब के समक्ष पेश होना चाहते हैं। वह अपनी बेगुनाही के सबूत देना चाहते हैं।
फूलका ने कहा कि वह इसकेजवाब में टाइटलर के गुनहगार होने केसबूत देंगे। सिख दंगों केबाद सबसे पहले छह नवंबर-1984 को अखबारों में टाइटलर का नाम आया था। नवंबर अंत में मानवाधिकार ग्रुप की किताब हू वाज गिल्टी आई थी, उसमें भी सिख दंगों में टाइटलर की भूमिका के बारे में वर्णन है।
इसके अलावा वह शुरू से सिख दंगा पीड़ितों केकेस लड़ रहे हैं। बहुत से ऐसे सबूत हैं जोकि अदालती कार्रवाई का हिस्सा हैं। वे सारे सबूत भी सिख दंगों में टाइटलर की भूमिका की ओर इशारा करते हैं। यह सारे सबूत ज्ञानी गुरबचन सिंह को सौंपे जाएंगे।