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देखिए सिद्धू की सियासी चाल, न बीजेपी को बख्शा, न छोड़े केजरीवाल

Fri, 09 Sep 2016 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 09 Sep 2016 09:18 AM IST
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Sidhu's political moves, not BJP spared no Kejriwal
चंडीगढ़ में नवजो​त सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस - फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक भाषणों में लुभावने जुमलों के कारण लंबे समय तक भाजपा के स्टार प्रचारक रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरकार दिल की भड़ास निकालते हुए कहा कि भाजपा ने उसका उपयोग सिर्फ प्रचार के लिए किया। जब भाजपा की सरकार बनी तो उसे मंच तक से उतार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और अकाली दल के लिए दो-दो सौ रैलियां कीं, लेकिन पुरस्कार में उन्हें पंजाब से ही दूर कर दिया गया, जो उन्हें किसी शर्त पर स्वीकार नहीं था। 
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सिद्धू ने स्पष्ट कहा कि उनके माथे पर नहीं लिखा है कि ‘सिद्धू इज फॉर सेल।’सिद्धू ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले राजनाथ सिंह ने उन्हें दिल्ली बुलाया था और कहा था कि पार्टी अमृतसर से अरुण जेटली को चुनाव लड़वाना चाहती है। उन्होंने तत्काल स्वीकार कर लिया। उस समय राजनाथ सिंह और अरुण जेटली ने कहा था कि उन्हें राज्यसभा का सदस्य बना दिया जाएगा। जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। लेकिन केंद्र में भाजपा सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बना दिया। मुझे लगा कि राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पंजाब के करीब होंगे। 
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Sidhu's political moves, not BJP spared no Kejriwal
चंडीगढ़ में नवजो​त सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस - फोटो : अमर उजाला
लेकिन उन्हें बादल के लिए प्रचार करने को कहा गया। एक नेता उन्हें पंजाब न जाने को कहता था तो दूसरा उन्हें बादल के लिए प्रचार करने को कहा था। वह जब भी राज्यसभा में जाते थे, जो उन्हें सिर में बोझ लगता था। उसे लगता था कि साजिश के तहत उसे अमृतसर से दूर किया गया। जो उन्हें स्वीकार नहीं था और उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। उपराष्ट्रपति हमीद अंसारी ने उनसे पूछा कि क्या किसी दबाव में इस्तीफा दे रहे हो तो मैंने कुछ नहीं कहा। 

इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल का संदेश आया कि वह उससे मिलना चाहते हैं। वह उनके घर पर गए तो उन्हें कहा गया कि वह उनके साथ पंजाब में काम करें। चुनाव में उनकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा तो वहां भी रेस शुरू होने से पहले ही उन्हें अमृतसर से बाहर करने की बात कही गई। वह चाहते थे कि उनकी पत्नी चुनाव लड़े और वह पार्टी के लिए प्रचार। केजरीवाल पर टिप्पणी करते हुए सिद्धू ने कहा, ‘भोली सूरत दिल के खोटे, नाम बढ़े और दर्शन छोटे।’

केजरीवाल सोचते हैं कि पूरी दुनिया में वह सिर्फ ईमानदार हैं। लेकिन अब उन्हें पता चला कि वह भी पूरे ईमानदार नहीं हैं। ईमानदारी का कापीराइट सिर्फ उन्हीं के पास है। उन्हें भी हर नेता की तरह ‘यस मैन’ चाहिए। लोकतंत्र में अहंकार स्वीकार्य नहीं है। 
 
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