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साइंस छोड़ आर्ट से जुड़े सिद्धू, पढ़ें उनके इस अनोखे सफर की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:00 PM IST
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Balkar Sidhu
- फोटो : amar ujala
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कल्चरल फील्ड में इंटरनेशनल लेवल तक टैगोर थिएटर का नाम पहुंचाना चाहता हूं, यह कहना है बलकार सिद्धू का, जिन्होंने सोमवार को टैगोर थिएटर के नए डायरेक्टर के तौर पर प्रभार संभाला। एक खास बातचीत के दौरान उन्होंने अपने सफर की कहानी ब्यां की-
बल्कार सिद्धू ने बताया कि उनका जन्म 12 अगस्त 1952 को पंजाब के अमृतसर जिले के एक गांव मखण विंडी में हुआ था। पिता उस समय आजाद हिंद फौज में थे और माता गृहिणी थी। उन्होंने बताया कि एक्टिंग, फोक डांस और संगीत का शौक बचपन से ही था। स्कूल में हर शनिवार को एक कल्चरल एक्टिविटी होती थी, और मैं उसमें भाग लेता। 1960 में हमारा पूरा परिवार अमृतसर से चंडीगढ़ आ गया। लेकिन उस समय मैंने यह ठान लिया था कि बड़ा होकर कला के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाउंगा। लेकिन पिता जी मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे और उन्होंने मेरा दाखिला सेक्टर 11 के गवर्नमेंट कॉलेज में बीएससी नॉनमेडिकल में करवा दिया। मैं उनसे इतना ज्यादा डरता था कि कभी उनसे इस बारे में बात ही नहीं कर पाया।
साइंस में मेरी रूचि बिल्कुल भी नहीं थी। मैं अनचाहे मन से कॉलेज जाता और पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता। एक दिन हमारी केमिस्ट्री की लैब लगी हुई थी। मुझे पता चला कि खुड्डा अली शेर गांव में पंजाबी गायक मुहम्मद सदीक और गायिका रणजीत कौर एक शादी में आए हुए हैं। मैं लैब छोड़कर उन्हें सुनने के लिए चला गया। पर बीएससी का हरेक विषय मेरे दिमाग से उपर जा रहा था। इसलिए मैंने साइंस छोड़ने का इरादा कर लिया। उस समय मेरी नौकरी सिविल सेक्रेटिएट चंडीगढ़ के हाउसिंग बोर्ड में लग गई। मैं सुबह वहां जाता और शाम को आर्ट्स की क्लासेज अटेंड करता। 1976 में पहली बार मैंने चंडीगढ़ के शिवालिक थिएटर में परफॉर्म किया था।
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इन फिल्मों में कर चुके हैं काम
मेरे डैड की मारुती और तनु वेड्स मनु जैसी बॉलीवुड फिल्मों के साथ-साथ सतश्री आकाल और जट्ट जेम्स बॉंड जैसी पंजाबी फिल्मों में काम कर चुकेहैं। बॉलीवुड और पॉलीवुड केअलावा कई टीवी सीरियल्स में आ चुके हैं।
कथक और भरतनाट्यम में भी निपुणता हासिल
बलकार सिद्धू को पंजाबी लोक गीतों और नृत्यों के साथ-साथ कथक और भरत नाट्यम जैसे क्लासिकल डांस में भी निपुणता हासिल है। वे 200 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं और 20 से अधिक नाटकों का निर्देशन भी उन्होंने किया है। इसके अलावा वे एक अच्छे लेखक और कवी भी हैं। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकदामी की मैनेजिंग कमेटी के मैंबर के साथ वे चंडीगढ़ की इंडियन पीपल्ज थिएटर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भी हैं।
टैगोर थिएटर में रहेंगी यह प्राथमिकताएं
उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकता यहीं रहेगी कि इंटरनेशनल लेवल तक टैगोर थिएटर का नाम कल्चरल एक्टिविटीज में लिया जाए। ट्राइसिटी के आर्टिस्टों के साथ-साथ अन्य राज्यों के आर्टिस्टों को मंच प्रदान करना भी मेरी प्राथमिकता रहेगी। टैगोर थिएटर की खासियत यहां करवाई जाती वर्कशॉप हैं जिसमें बच्चे डांस और थिएटर सीखते हैं, आगे भी ऐसी वर्कशॉप करवाई जाती रहेंगी। जसपाल भट्टी कॉमेडी संडे काफी सफल रहा है, हम इसे भी जारी रखेंगे।
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बल्कार सिद्धू ने बताया कि उनका जन्म 12 अगस्त 1952 को पंजाब के अमृतसर जिले के एक गांव मखण विंडी में हुआ था। पिता उस समय आजाद हिंद फौज में थे और माता गृहिणी थी। उन्होंने बताया कि एक्टिंग, फोक डांस और संगीत का शौक बचपन से ही था। स्कूल में हर शनिवार को एक कल्चरल एक्टिविटी होती थी, और मैं उसमें भाग लेता। 1960 में हमारा पूरा परिवार अमृतसर से चंडीगढ़ आ गया। लेकिन उस समय मैंने यह ठान लिया था कि बड़ा होकर कला के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाउंगा। लेकिन पिता जी मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे और उन्होंने मेरा दाखिला सेक्टर 11 के गवर्नमेंट कॉलेज में बीएससी नॉनमेडिकल में करवा दिया। मैं उनसे इतना ज्यादा डरता था कि कभी उनसे इस बारे में बात ही नहीं कर पाया।
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साइंस में मेरी रूचि बिल्कुल भी नहीं थी। मैं अनचाहे मन से कॉलेज जाता और पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता। एक दिन हमारी केमिस्ट्री की लैब लगी हुई थी। मुझे पता चला कि खुड्डा अली शेर गांव में पंजाबी गायक मुहम्मद सदीक और गायिका रणजीत कौर एक शादी में आए हुए हैं। मैं लैब छोड़कर उन्हें सुनने के लिए चला गया। पर बीएससी का हरेक विषय मेरे दिमाग से उपर जा रहा था। इसलिए मैंने साइंस छोड़ने का इरादा कर लिया। उस समय मेरी नौकरी सिविल सेक्रेटिएट चंडीगढ़ के हाउसिंग बोर्ड में लग गई। मैं सुबह वहां जाता और शाम को आर्ट्स की क्लासेज अटेंड करता। 1976 में पहली बार मैंने चंडीगढ़ के शिवालिक थिएटर में परफॉर्म किया था।
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इन फिल्मों में कर चुके हैं काम
मेरे डैड की मारुती और तनु वेड्स मनु जैसी बॉलीवुड फिल्मों के साथ-साथ सतश्री आकाल और जट्ट जेम्स बॉंड जैसी पंजाबी फिल्मों में काम कर चुकेहैं। बॉलीवुड और पॉलीवुड केअलावा कई टीवी सीरियल्स में आ चुके हैं।
कथक और भरतनाट्यम में भी निपुणता हासिल
बलकार सिद्धू को पंजाबी लोक गीतों और नृत्यों के साथ-साथ कथक और भरत नाट्यम जैसे क्लासिकल डांस में भी निपुणता हासिल है। वे 200 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं और 20 से अधिक नाटकों का निर्देशन भी उन्होंने किया है। इसके अलावा वे एक अच्छे लेखक और कवी भी हैं। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकदामी की मैनेजिंग कमेटी के मैंबर के साथ वे चंडीगढ़ की इंडियन पीपल्ज थिएटर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भी हैं।
टैगोर थिएटर में रहेंगी यह प्राथमिकताएं
उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकता यहीं रहेगी कि इंटरनेशनल लेवल तक टैगोर थिएटर का नाम कल्चरल एक्टिविटीज में लिया जाए। ट्राइसिटी के आर्टिस्टों के साथ-साथ अन्य राज्यों के आर्टिस्टों को मंच प्रदान करना भी मेरी प्राथमिकता रहेगी। टैगोर थिएटर की खासियत यहां करवाई जाती वर्कशॉप हैं जिसमें बच्चे डांस और थिएटर सीखते हैं, आगे भी ऐसी वर्कशॉप करवाई जाती रहेंगी। जसपाल भट्टी कॉमेडी संडे काफी सफल रहा है, हम इसे भी जारी रखेंगे।