फुल्का की 'बेरुखी' के 'आप' पर बड़े साइड इफेक्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरविंदर सिंह फुल्का के इस्तीफा दे देने से पंजाब में आम आदमी पार्टी के राजनीतिक समीकरण बिगड़ गए हैं। पहले ही बागी तेवरों के चलते पार्टी के दो सांसद सस्पेंड चल रहे हैं, अब फूलका ने भी नया धमाका कर दिया है।
एक तरफ पार्टी 2017 में पंजाब की सत्ता में काबिज होने के लिए शहरों और कस्बों में रैलियां कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं, ऐसे में वर्करों के मनोबल पर भी विपरीत असर हो रहा है।
2014 में फुल्का की हुई थी धमाकेदार एंट्री
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान एचएस फूलका ने सक्रिय राजनीति में धमाकेदार एंट्री की थी और लुधियाना संसदीय सीट पर चुनाव लड़कर प्रमुख राजनीतिक दलों के समीकरण बिगाड़ दिए थे, हालांकि फुल्का चुनाव जीत नहीं पाए थे और दूसरे नंबर पर रहे थे। उनको लुधियाना से 2,80,750 वोट मिले।
फुल्का ने शिअद उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली को तीसरे स्थान पर खदेड़ दिया था। अयाली को 2,56,590 वोट मिले थे। करीब 19 हजार वोट से इस चुनाव में कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू ने जीत दर्ज की थी। बिट्टू को कुल 3,00,459 वोट पड़े।
इन चुनावों में फुल्का ने मुल्लांपुर दाखा के विधायक और लोकसभा चुनाव में शिअद उम्मीदवार मनप्रीत अयाली से उनके हलके में पटकनी दी थी। इसके अलावा उनको जगरांव हलके में सबसे अधिक वोट मिले थे, जबकि वहां शिअद का विधायक है।
चुनाव में हार के बाद से ही कम हो गई थी सक्रियता
फुल्का का कहना है कि 1984 में सिख कत्लेआम के आरोपियों को सजा दिलाने और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए ही उन्होंने सक्रिय राजनीति को अलविदा कहा है। बावजूद इसके उनका यह तर्क आम आदमी के गले नहीं उतर रहा है।
फुल्का कहते हैं कि पंजाब में उन्हें आप के सीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके लिए पद अहम नहीं है, बल्कि वह अपने मिशन को तरजीह देना जरूरी समझते हैं।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आप की लहर बन चुकी है और 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले आप ने फूलका को पंजाब में भेजा था। वह लुधियाना संसदीय सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद से उनकी सक्रियता पंजाब में काफी कम हो गई थी।
1984 के दंगा पीड़ितों के लिए कर दिया त्याग
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने शनिवार को आम आदमी पार्टी के दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। फुल्का ने कहा कि आप में सक्रिय भूमिका की वजह से वह सिख दंगा पीड़ितों की कानूनी लड़ाई में पूरा समय नहीं दे पा रहे थे। वह पंजाब में आप के लीगल सेल के प्रमुख के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे।
अपने पदों से इस्तीफा देते हुए फुलका ने कहा है कि अब पंजाब में आप को उनकी जरूरत नहीं है। शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने पार्टी पदों से इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से सलाह के बाद ही उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन पार्टी के सदस्य बने रहेंगे।
फूलका ने कहा कि उन्होंने पंजाब में पार्टी को खड़ा किया। लोकसभा चुनाव में चार सीटें जीतीं और अब पार्टी राज्य में अपने पैर जमा चुकी है, लिहाजा अब पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिखों की लड़ाई वह उस वक्त से लड़ते आ रहे हैं, जब वे युवा वकील थे। यह उनके लिए एक मिशन है और दंगा पीड़ित सिखों को इंसाफ दिलाकर रहेंगे।