पंजाबः नवजोत सिद्धू के लिए सिरदर्द बना स्टफ्ड तीतर, अब आएगा इस काम
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स्टफ्ड तीतर कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के लिए सिरदर्द बनता दिख रहा है। सिद्धू ये तीतर पाकिस्तान से लेकर आए थे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात के दौरान उन्होंने इसे तोहफे में दिया था।
कस्टम आयुक्तालय ने अटारी के रास्ते पाकिस्तान से बिना अनुमति इस आमद की जांच शुरू कर दी है, वहीं राज्य के वन विभाग ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने जवाब में साफ कर दिया है कि इस स्टफ्ड तीतर का इस्तेमाल केवल एजुकेशनल पर्पज के लिए ही किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने पंजाब वन एवं वन्य जीव विभाग से स्टफ्ड तीतर के बारे में पूछा था कि इसे रखा जा सकता है या नहीं।
वन विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे जवाब से यह साफ हो गया है कि उक्त स्टफ्ड तीतर को वन विभाग भी रखने को तैयार नहीं है। दरअसल वन विभाग के पास अब ऐसी कोई व्यवस्था भी नहीं है, जिसके तहत स्टफ्ड किए वन्य प्राणियों का संरक्षण कर सके। अब सीएमओ को यह तय करना होगा कि क्या उक्त स्टफ्ड तीतर को एजुकेशनल पर्पज से किसी विद्यालय या महाविद्यालय की लैबोरेटरी को दिया जाए या किसी ऐसे म्यूजियम को सौंप दिया जाए जहां स्टफ्ट वन्य प्राणियों को रखा जाता हो।
उधर, कस्टम विभाग ने केवल इतना कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। उसके बाद ही कोई टिप्पणी की जाएगी। विभाग का कहना है कि चूंकि तीतर भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 4 के तहत संरक्षित है।
वहीं इस अधिनियम के तहत संरक्षित स्टफ्ड पशु या पक्षी आयात करने के लिए सीमा शुल्क विभाग और वन्यजीव विभागों से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है। इसे भारत में लेकर आने के लिए एक ट्रांजिट परमिट की आवश्यकता होती है। नवजोत सिंह सिद्धू ने अटारी सीमा पर कस्टम विभाग को स्टफ्ड तीतर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।