मैंने नीतीश कुमार की तुलना गुरु साहिबान से नहीं की, जिसने की उसे सजा मिली: ज्ञानी इकबाल सिंह
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तख्त श्री पटना साहिब जी के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा है कि पंजाब के बाहर बसे सिखों को अपने राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक सरोकारों की रक्षा के लिए वहां की सरकारों से बेहतर संबंध बनाने पड़ते हैं। पंजाब में भी शिअद ने भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता किया हुआ है। भाजपा का अर्थ ही आरआरएस है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गठजोड़ अब भाजपा के साथ है।
बिहार के सिखों के काम करवाने के लिए मुख्यमंत्री के पास जाना पड़ता है। नीतीश कुमार श्री पटना साहिब जी में आयोजित किसी धार्मिक समागम में आ गए, तो इसका अर्थ नहीं की वह आरएसएस के एजेंट हो गए हैं। ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि तख्त के जत्थेदार की जिम्मेदारी धार्मिक भी व राजनीतिक भी है। पंजाब के बाहर के सिखों के काम न रुकें वह इस प्रयास में रहते हैं। वह तन, मन व धन से सीखी को समर्पित हैं।
ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तुलना गुरु साहिबान से नहीं की। जिसने की उसको तख्त ने सजा सुना दी है। उन्होंने समागम में कहा था कि संगत कह रही है कि नीतीश कुमार बिहार के सिखों के लिए महाराजा रंजीत सिंह हैं। बिहार के सिखों के लिए नीतीश कुमार ने जो काम किए हैं, आज तक किसी भी मुख्यमंत्री ने नहीं किए हैं। नीतीश कुमार की सिखों के प्रति सेवा को देखते हुए उनका वह दिल से सम्मान करते हैं।
ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि कुछ पंथ विरोधी उनको जत्थेदार के पद से हटाने की साजिश रच रहें हैं। यह लोग तख्त श्री पटना साहिब जी की जमा 30 करोड़ की राशि हड़पना चाहतें है। उन्होंने बिहार के 200 से अधिक सिखों को ग्रंथि सिंह सजाया है। यह सिख पंज प्यारों की सेवा भी निभा रहे हैं।
ये मेरा नहीं श्री तख्त साहिब का विरोध कर रहे हैं। इस वर्ष प्रबंधक कमेटी में बदलाव हुआ है। उस बदलाव में शिकायत करने वाले कमिककर सिंह ग्रुप को भी पद नहीं मिला है। पटना साहिब की धार्मिक समागम की स्टेज पर भी कंट्रोल करना चाहता था।
श्री अकाल तख्त केवल कौमी मामलों पर करे विचार
ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि सिखों की सर्वोच्च अदालत श्री अकाल तख्त साहिब में केवल कौमी मामले ही विचार के लिए रखे जाने चाहिए। शेष सभी मामले एसजीपीसी की धर्म प्रचार कमेटी को देखने चाहिए। एसजीपीसी, तख्त श्री पटना साहिब व तख्त श्री हजूर साहिब के संविधान में जत्थेदार की कोई पोस्ट नहीं है।
जत्थेदार की सम्मानित पदवी शुरू से चली आ रही है। संविधान में मुख्य पुजारी की पोस्ट है। भविष्य में गुरुद्वारा प्रबंधन में कोई संशोधन होता है तो तख्त श्री पटना साहिब व श्री हजूर साहिब को भी उसी एक्ट के तहत लाया जा सकता है। सभी तख्त एक ही एक्ट के तहत आएंगे तो वह उसका स्वागत करते हैं।