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विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी नई शिक्षा नीति लागू करने में मुख्य चुनौती : एम जगदीश
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चंडीगढ़। यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश का कहना है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी नई शिक्षा नीति लागू करने में मुख्य चुनौती है, क्योंकि इससे शोध कार्यों में कमी आएगी और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाएगी। देश के चार करोड़ विद्यार्थियों में से केवल चार प्रतिशत केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं और बाकी के 94 प्रतिशत राज्य के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं। कई राज्य विश्वविद्यालयों में 80 प्रतिशत तक सीटें खाली हैं। नॉर्दन जोन वाइस चांसलर सम्मेलन के लिए चंडीगढ़ आए एम जगदीश ने वीरवार को पीयू के गोल्डन जुबली हॉल में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि नियामक संस्था होने के नाते वह लगातार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकारों से निवेदन कर रहे हैं। इसके लिए वह लगातार सरकारों को पत्र भी लिख रहे हैं। साथ ही राज्य विश्वविद्यालयों को फंडिंग देकर शोध के काम पर ध्यान देना होगा। प्रेसवार्ता के दौरान मातृभाषा को लेकर कम अहमियत दिए जाने के सवाल पर एम जगदीश ने कहा कि अगले एक साल में उनकी कोशिश है कि बीकॉम, बीएससी कोर्स की किताबों को पंजाबी में उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने बताया कि भारत की हरेक भारतीय भाषा में किताबों का अनुवाद किया जाएगा जिसके लिए अलग से समिति गठित की गई है। क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित किताबों को डिजिटली ईकुंभ एप पर अपलोड किया जाएगा। विद्यार्थी निशुल्क एप डाउनलोड कर अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ सकेंगे।
एम जगदीश बोले- पीयू को पूरा समर्थन, केंद्र से अधिकाधिक फंड लाने की करेंगे कोशिश
इस दौरान पीयू में फंड की कमी से आ रही परेशानियों और सातवें वेतन आयोग के लिए यूजीसी के फंड उपलब्ध करवाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी में फंड की कमी चल रही है जिससे शिक्षकों को 2017 से सातवें वेतन आयोग का एरियर नहीं मिला है। लगातार पीयू के समक्ष फंड की कमी को लेकर आ रही चुनौतियों पर यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश ने बताया कि उनका यूनिवर्सिटी को पूरा समर्थन है, केंद्र सरकार से जितना हो सके, वह फंड लाएंगे। उन्होंने कहा कि पीयू एक खास विश्वविद्यालय है। यह राज्य विश्वविद्यालय है लेकिन केंद्र से भी फंडिंग मिलती है। सातवें वेतन आयोग लागू करने और एरियर देने के लिए शिक्षा मंत्रालय से बात चल रही है।
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सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार पाने वाले 10 देशों में मातृभाषा में दी जाती है शिक्षा
अनुसंधान संस्थान, आईआईटी व अन्य मेडिकल संस्थान अंग्रेजी भाषा में अच्छा काम कर रहे हैं ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने के महत्व पर पूछे सवाल पर एम जगदीश ने कहा कि उन्होंने स्वयं 10वीं तक तेलुगू में पढ़ाई की है। उन्होंने बताया सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार पाने वाले श्रेष्ठ 10 देशों में अपनी मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है। क्षेत्रीय भाषा पढ़ने से अपने समृद्ध क्षेत्रीय इतिहास से विद्यार्थियों को रूबरू करवाना भी है। उन्हाेंने कॉलोनियल मानसिकता से बाहर आने पर जोर दिया और बताया कॉग्निटिव साइंस में यह साबित हो चुका है कि प्रारंभिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में होने से बच्चा बाद में अंग्रेजी बेहतर तरीके से सीख पाता है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी भाषा को प्रमुखता नहीं देंगे तो कौन देगा।
नई तकनीक का विकास करने के लिए विद्यार्थी का सामाजिक मुद्दों का जानकार होना जरूरी
मल्टीडिसीप्लिनरी शिक्षा का उद्देश्य यही है कि कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थी को नृत्य और मानविकी के छात्र को तकनीकी विषय पढ़ने की आजादी हो। एम जगदीश ने जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कहा कि मल्टीडिसीप्लिनरी शिक्षा की जरूरत है। एक इंजीनियर को नई तकनीक बनाते समय सामाजिक ज्ञान के प्रति, लोगों की भावनाओं के प्रति जागरूक होना जरूरी है ताकि उनके अनुकूल उत्पाद बनें। यह तभी मुमकिन हो पाएगा जब विद्यार्थी संकाय की सीमाओं में बंधित न रहकर अलग अलग विषय पढ़ सकेंगे।
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उन्होंने कहा कि नियामक संस्था होने के नाते वह लगातार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकारों से निवेदन कर रहे हैं। इसके लिए वह लगातार सरकारों को पत्र भी लिख रहे हैं। साथ ही राज्य विश्वविद्यालयों को फंडिंग देकर शोध के काम पर ध्यान देना होगा। प्रेसवार्ता के दौरान मातृभाषा को लेकर कम अहमियत दिए जाने के सवाल पर एम जगदीश ने कहा कि अगले एक साल में उनकी कोशिश है कि बीकॉम, बीएससी कोर्स की किताबों को पंजाबी में उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने बताया कि भारत की हरेक भारतीय भाषा में किताबों का अनुवाद किया जाएगा जिसके लिए अलग से समिति गठित की गई है। क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित किताबों को डिजिटली ईकुंभ एप पर अपलोड किया जाएगा। विद्यार्थी निशुल्क एप डाउनलोड कर अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ सकेंगे।
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एम जगदीश बोले- पीयू को पूरा समर्थन, केंद्र से अधिकाधिक फंड लाने की करेंगे कोशिश
इस दौरान पीयू में फंड की कमी से आ रही परेशानियों और सातवें वेतन आयोग के लिए यूजीसी के फंड उपलब्ध करवाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी में फंड की कमी चल रही है जिससे शिक्षकों को 2017 से सातवें वेतन आयोग का एरियर नहीं मिला है। लगातार पीयू के समक्ष फंड की कमी को लेकर आ रही चुनौतियों पर यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश ने बताया कि उनका यूनिवर्सिटी को पूरा समर्थन है, केंद्र सरकार से जितना हो सके, वह फंड लाएंगे। उन्होंने कहा कि पीयू एक खास विश्वविद्यालय है। यह राज्य विश्वविद्यालय है लेकिन केंद्र से भी फंडिंग मिलती है। सातवें वेतन आयोग लागू करने और एरियर देने के लिए शिक्षा मंत्रालय से बात चल रही है।
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सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार पाने वाले 10 देशों में मातृभाषा में दी जाती है शिक्षा
अनुसंधान संस्थान, आईआईटी व अन्य मेडिकल संस्थान अंग्रेजी भाषा में अच्छा काम कर रहे हैं ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने के महत्व पर पूछे सवाल पर एम जगदीश ने कहा कि उन्होंने स्वयं 10वीं तक तेलुगू में पढ़ाई की है। उन्होंने बताया सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार पाने वाले श्रेष्ठ 10 देशों में अपनी मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है। क्षेत्रीय भाषा पढ़ने से अपने समृद्ध क्षेत्रीय इतिहास से विद्यार्थियों को रूबरू करवाना भी है। उन्हाेंने कॉलोनियल मानसिकता से बाहर आने पर जोर दिया और बताया कॉग्निटिव साइंस में यह साबित हो चुका है कि प्रारंभिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में होने से बच्चा बाद में अंग्रेजी बेहतर तरीके से सीख पाता है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी भाषा को प्रमुखता नहीं देंगे तो कौन देगा।
नई तकनीक का विकास करने के लिए विद्यार्थी का सामाजिक मुद्दों का जानकार होना जरूरी
मल्टीडिसीप्लिनरी शिक्षा का उद्देश्य यही है कि कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थी को नृत्य और मानविकी के छात्र को तकनीकी विषय पढ़ने की आजादी हो। एम जगदीश ने जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कहा कि मल्टीडिसीप्लिनरी शिक्षा की जरूरत है। एक इंजीनियर को नई तकनीक बनाते समय सामाजिक ज्ञान के प्रति, लोगों की भावनाओं के प्रति जागरूक होना जरूरी है ताकि उनके अनुकूल उत्पाद बनें। यह तभी मुमकिन हो पाएगा जब विद्यार्थी संकाय की सीमाओं में बंधित न रहकर अलग अलग विषय पढ़ सकेंगे।