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ऐलानः अकाली दल नहीं लड़ेगा मोहाली उपचुनाव

Sat, 12 Dec 2015 09:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Sat, 12 Dec 2015 09:49 PM IST
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shiromani akali dal will not fight mohali by election

मोहाली नगर निगम के वार्ड नंबर-29 में होने वाले उपचुनाव अकाली दल नहीं लड़ेगा। हाईकमान के आदेश पर यह फैसला लिया गया।

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इसके बाद पार्टी की तरफ से चुनाव मैदान में उतारी गईं सुखमिंदर कौर मोजेवाल ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। मीडिया को यह जानकारी शनिवार को फेज-2 स्थित अपने आवास पर सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने दी।

सांसद ने बताया कि उप चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। कोई उम्मीदवार पार्टी के चुनाव निशान पर मैदान में नहीं उतरा है। ऐसे में पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें चंडीगढ़ स्थित निवास पर बुलाया था। जहां पर उनकी इस मामले को लेकर बैठक हुई।
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इसके बाद उन्होंने चुनाव में अकाली दल का उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया है। वहीं, उन्होंने साफ किया है कि पार्टी चुनाव मैदान में उतरे किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी। जिस भी उम्मीदवार के पक्ष में उनके समर्थक मतदान करना चाहते हैं, वह अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं।
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वहीं, जब उनसे पूछा गया कि अगर पार्टी को चुनाव नहीं लड़ना था तो ऐसे में पहले उनकी तरफ से सुखमिंदर कौर मोजेवाल को टिकट देकर चुनाव मैदान में क्यों उतारा गया।

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब यह सारी प्रक्रिया हुई तो वह दिल्ली में थे। ऐसे में पार्टी की मीटिंग नहीं हो पाई थी। दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि सुखमिंदर कौर मोजेवाल पार्टी की एक मेहनती नेता हैं।

चुनाव न लड़ने की यह भी हो सकती है वजह
नगर निगम के उप चुनाव में कांग्रेस ने आजाद ग्रुप की उम्मीदवार उपिंदरजीत कौर को समर्थन दिया है। उपिंदरजीत कौर स्व. पार्षद अमतेश्वर कौर की बेटी हैं। जिनकी कुछ समय पहले मौत हो गई थी। ऐसे में अकाली दल को पूरा अंदेशा है कि आजाद ग्रुप की उम्मीदवार को सहानुभूति का लाभ मिलेगा।

दूसरी तरह अकाली दल की ही बागी उम्मीदवार हरबंस कौर मल्ली मैदान में है। जबकि अन्य उम्मीदवार का संबंध भी अकाली दल से रहा है। सूत्रों की माने तो चारों तरफ से अकाली दल को नुकसान होने के आसार थे। ऐसे में पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है।

पार्षद थे चुनाव लड़ने के पक्ष
सांसद ने प्रेस कांफ्रेंस करने से ठीक पहले अकाली दल व बीजेपी के पार्षदों से बंद कमरे में चर्चा की। इसमें पार्षदों से पूछा गया कि क्या चुनाव लड़ना चाहिए। उसमें अधिकतर पार्षदों का कहना था कि चुनाव लड़ना चाहिए। लेकिन, उन्होंने कहा कि पार्टी प्रधान का फैसला है कि चुनाव नहीं लड़ना है।


हालांकि, पार्षदों की दलील थी कि पिछली बार पूरे शहर में चुनाव हुुआ था। ऐसे में उनका उम्मीदवार सिर्फ तीन वोटों से हारा था। वहीं, अब चुनाव सिर्फ एक वार्ड में है। ऐसे में पूरी प्लानिंग से चुनाव लड़ा जाए तो जीत उन्हें ही मिलेगी। वहीं, पार्षदों का कहना था कि आखिर चुनाव लड़ना ही नहीं था तो पहले उम्मीदवार मैदान में क्यों उतारा था।

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