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विश्लेषणः पंजाब विस चुनाव में शिअद को डेरे का समर्थन मिलने से लेने के देने पड़ गए

Tue, 14 Mar 2017 10:26 AM IST
सुधीर राघव/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुधीर राघव/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 14 Mar 2017 10:26 AM IST
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shiromani akali dal faced harms of dera sacha sauda support in punjab assembly election 2017
प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल - फोटो : अमर उजाला
मतदान से ठीक पहले डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय से की गई समर्थन की घोषणा शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को इस बार बहुत भारी पड़ी। इस घोषणा ने उल्टा असर किया और शिअद के परंपरागत पंथक वोट एक बड़ा हिस्सा छिटक गया।
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31 जनवरी को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के समधि और मोड़ मंडी से कांग्रेस प्रत्याशी हरमिंदर सिंह जस्सी की सभा के पास विस्फोट हुआ। छह लोग मारे गए। ठीक अगले दिन एक फरवरी को डेरे ने शिअद-भाजपा को समर्थन की खुली घोषणा कर दी।
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इससे पहले कई नेताओं ने डेरे में जाकर हाजिरी लगाई थी। इनमें अकाली-भाजपा प्रत्याशी भी थे। सिख प्रत्याशियों के वोट के लिए डेरे की शरण में जाने को पंथक नेताओं ने मुद्दा बनाया। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग का मामला अकाल तख्त तक जा पहुंचा। डेरे से समर्थन मांगने वालों के प्रति सिखों में नाराजगी बढ़ी।
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आंखें खोलने वाले नतीजे

shiromani akali dal faced harms of dera sacha sauda support in punjab assembly election 2017
CM Parkash singh badal & Sukhbir singh badal - फोटो : File Photo
यह माना जाता है कि पंजाब में डेरे के 35 लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। इनमें से 70 फीसदी मालवा में है। इनका प्रभाव मालवा की 27 सीटों पर काफी माना जाता है। यह वजह थी कि डेरे की घोषणा के बाद अकाली-भाजपा खेमें में खुशी दौड़ गई थी। मगर मतदान केंद्रों पर चार फरवरी को जो नजारा दिखा और उसके बाद 11 मार्च को जो नतीजे आए, वे डेरों की राजनीति पर विश्वास करने वालों की आंखें खोलने वाले हैं।

मालवा की 69 सीटों में से शिअद-भाजपा को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। सिरसा डेरे में हाजरी लगाने वाले बठिंडा शहरी से शिअद-भाजपा उम्मीदवार सरूप चंद सिंगला तीसरे स्थान पर रहे। यह सीट डेरे की राजनीति से दूर रहे कांग्रेस प्रत्याशी मनप्रीत सिंह बादल ने जीती। डेरा प्रमुख के समधि हरमिंदर जस्सी खुद भी मोड़ सीट पर तीसरे स्थान पर रहे। यह सीट आप के जगदेव सिंह ने जीती।

बादल सरकार में मंत्री रहे सिकंदर सिंह मलूका भी पंजाब चुनाव से पहले डेरे की शरण में गए थे। नतीजा यह रहा कि रामपुरा फूल सीट पर वह कांग्रेस के गुरप्रीत कांगड़ से हार गए। डेरे से समर्थन मिलने की जो खुशी तब अकाली नेताओं को हुई होगी, उसके लिए नतीजे आने के बाद वे जरूर पछता रहे होंगे।

आंकड़े भी दे रहे गवाही

shiromani akali dal faced harms of dera sacha sauda support in punjab assembly election 2017
प्रकाश सिंह बादल
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में शिअद को 34 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। इस चुनाव में सिर्फ 25 फीसदी वोट मिले और कुर्सी की लड़ाई बादल हार गए। वोटों में करीब 9 फीसदी की यह बड़ी गिरावट संकेत दे रही है कि पंथक वोट का भी शिअद से मोहभंग हुआ है।

इस वोट का बड़ा हिस्सा आप के खाते में गया। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ी रही आप ने करीब 24 फीसदी वोट हासिल किए। भाजपा को पिछली बार सात फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे मगर इस बार पांच फीसदी ही मिल सके।
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