Haryana DGP: वरिष्ठों को पछाड़ शत्रुजीत कपूर बने हरियाणा के डीजीपी, जींद जिले से खास नाता, पंजाब के रहने वाले
आईपीएस शत्रुजीत कपूर मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पसंद हैं और दूसरा भ्रष्टाचार के खिलाफ वो हरियाणा में बड़ा चेहरा हैं। सख्त अधिकारी की छवि के चलते वह अपनी काबिलियत बिजली निगमों के चेयरमैन रहते हुए दिखा चुके हैं। गृह मंत्री अनिल विज के साथ भी कपूर ने बेहतर तालमेल बनाया हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमाम लॉबिंग और दांव पेंचों को तोड़ते हुए 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर हरियाणा के नए डीजीपी बन गए हैं। पैनल में सबसे कनिष्ठ होते हुए भी कपूर अपने वरिष्ठ 1989 बैच के मोहम्मद अकील और डॉ. आरसी मिश्रा पर भारी पड़े। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पसंद कपूर की डीजीपी के तौर पर नियुक्ति को लेकर प्रदेश के गृह सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने बुधवार को आदेश जारी किए। कपूर ने पीके अग्रवाल के स्थान पर अपना कार्यभार भी संभाल लिया।
हालांकि, हरियाणा में पिछली बार वरिष्ठता के आधार पर ही डीजीपी के तौर पर पीके अग्रवाल की नियुक्ति हुई थी लेकिन इस बार शत्रुजीत कपूर का डीजीपी बनना पहले ही तय माना जा रहा था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नजदीकी और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के चलते कपूर अपने से वरिष्ठ 1989 बैच के आईपीएस मोहम्मद अकील और डॉ. आरसी मिश्रा पर भारी पड़े। कपूर का कार्यकाल दो साल का रहेगा, जबकि वह 31 अक्तूबर, 2026 को सेवानिवृत्त होंगे।
30 जून को डीजीपी पीके अग्रवाल की सेवा अवधि पूरी हो गई थी और उन्हें 15 अगस्त तक सेवा विस्तार दिया गया। 11 जुलाई को हरियाणा सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा। डीजीपी के चयन को लेकर केंद्रीय लोक सेवा आयोग की बैठक 10 अगस्त को दिल्ली में हुई थी। इसमें हरियाणा की ओर से मुख्य सचिव संजीव कौशल और निवर्तमान डीजीपी पीके अग्रवाल शामिल हुए थे। उसी रात को यूपीएससी ने 9 आईपीएस अधिकारियों में से तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का चयन कर तीन का पैनल तैयार किया था।
गृह विभाग के विशेष सचिव मनीराम शर्मा खुद यूपीएससी से पैनल लेकर चंडीगढ़ पहुंचे। प्रक्रिया के तहत सूबे के गृह विभाग से नए डीजीपी का पैनल भेजा गया। बुधवार को दो घंटे तक मंथन के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल की हरी झंडी मिलते ही गृह विभाग की ओर से आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया।
मिश्रा का नाम भी चला, एक दिन बाद जारी हुआ पत्र
तीन अधिकारियों के पैनल में डॉ. आरसी मिश्रा का नाम भी डीजीपी की दौड़ में चला। मिश्रा आरएसएस की पसंद बताए जा रहे थे। हालांकि, अंतिम मुहर कपूर के नाम पर लगी। इसी कशमकश के बीच डीजीपी की नियुक्ति 15 अगस्त को नहीं हो सकी जबकि पीके अग्रवाल 15 अगस्त को सेवानिवृत्त हो चुके थे।
हर जगह साबित की अपनी काबिलियत
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक डिग्री धारक शत्रुजीत कपूर हरियाणा के कई जिलों में बतौर एसपी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, वह बिजली निगमों के सीएमडी रहे हैं और वर्तमान में एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक रहे हैं। उनकी अगुवाई में पहली बार हरियाणा के बिजली निगम मुनाफे में पहुंचे हैं और एसीबी ने भी ताबड़तोड़ कार्रवाई कर एचसीएस से लेकर आईएएस अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। सख्त और ईमानदार छवि के धनी आईपीएस कपूर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर पहनाने जाते हैं।
जींद से पुराना नाता
मूलरूप से पंजाब निवासी शत्रुजीत कपूर का हरियाणा के जींद से पुराना नाता है। दरअसल, 1990 में जब वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे तो उनके भाई जींद में अधिकारी थे। वह जींद रहकर अपनी तैयारी कर रहे थे। जब यूपीएससी का फार्म भरा तो फार्म में रिहायसी पता भी जींद का ही भर दिया गया। दस्तावेजों में स्थाई पता जींद का आने के चलते वह जींद जिले में सेवाएं नहीं दे सके।