सीएम सिटी से दिल्ली-चंडीगढ़ का सफर और नजदीक
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अब करनाल से दिल्ली-चंडीगढ़ दूर नहीं रहेंगे। मात्र एक घंटा 45 मिनट में करनाल से दिल्ली और चंडीगढ़ का सफर तय किया जा सकेगा। इसके लिए शहरवासियों को दिल्ली जाने के लिए 470 रुपये देने होंगे।
वहीं, चंडीगढ़ के लिए 495 रुपये में बुकिंग होगी। दरअसल गुरुवार को शहरवासियों की करीब ढाई साल पुरानी मांग पूरी हो गई। अब करनाल में नई दिल्ली-चंडीगढ़ और चंडीगढ़- नई दिल्ली शताब्दी ट्रेन का ठहराव शुरू हो गया है। 12046 चंडीगढ़ नई दिल्ली, यह गाड़ी अब प्रतिदिन करनाल में दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर करनाल में रुकेगी।
इसके साथ ही 12045 नई दिल्ली-चंडीगढ़ शताब्दी, 8 बजकर 51 मिनट पर करनाल में ठहरेगी। दो मिनट के ठहराव के बाद यह गाड़ी करनाल से रवाना होगी। करनाल से चलकर यह गाड़ी नई दिल्ली दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर पहुंचेगी। वहीं चंडीगढ़ पहुंचने का समय रात 10 बजकर 40 मिनट का रहेगा। करनाल से दिल्ली की दूरी 123 व चंडीगढ़ की दूरी 143 किलोमीटर है।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्रेन के साथ करनाल रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण को भी हरी झंडी दिखा दी। साथ ही रेलवे कर्मचारियों के लिए बारात घर का भी उद्घाटन किया।
इस दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि जो भी मांगें सीएम ने रखी हैं, उनको जल्द पूरा किया जाएगा। इस मौके पर ओएसडी अमरेंद्र सिंह, सीपीएस बख्शीश सिंह, विधायक हरविंद्र कल्याण, भगवानदास कबीरपंथी, मेयर रेणुबाला गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर, कृष्ण गर्ग, राजेश शर्मा, नवनीत बावा, नवीन बतरा आदि मौजूद थे।
करनाल मां की तरह देश को पिला रहा दूध
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि करनाल का देश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपना नाम है। यहां की एनडीआरआई डेयरी पूरे देश को मां की तरह दूध पिला रही है।
इतना ही नहीं, यहां की बेटी कल्पना चावला ने न केवल विश्व में बल्कि अंतरिक्ष में भी अपनी छाप छोड़ी है, जोकि देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने प्रदेशवासियों से कहा कि वे उनसे कोई मांग न करें। चूंकि वह तो खुद हरियाणा के बन गए हैं।
अमर उजाला ने किया था खबर में जिक्र
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को 12046 चंडीगढ़-नई दिल्ली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई तो अमर उजाला की खबर सार्थक हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 123 साल में पहली बार कोई रेल मंत्री करनाल आया है। शताब्दी तो 100 साल की होती है, लेकिन करनाल की ओर तो किसी ने 122 साल भी ध्यान नहीं दिया। ध्यान रहे कि अमर उजाला ने अपने 28 जुलाई के संस्करण में अपने पाठकों को यह बताया था कि दोपहर करीब 1:33 पर करनाल में पहली शताब्दी रुकेगी। सबसे पहले करनाल में रेल मंत्री के आने का समाचार भी 26 जुलाई के संस्करण में अमर उजाला ने ही अपने पाठकों को दिया था।
करनाल वासियों की यह मांगें अब जल्द होंगी पूरी
करनाल रेलवे स्टेशन की 15 साल की सबसे बड़ी मांग अब जल्द ही पूरी हो सकती है। रामनगर की ओर जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज अब जल्द ही बन सकता है। रेलवे लाइन पार इस समय करीब 32 कॉलोनियों में 1.5 लाख की आबादी रह रही है।
साथ ही लाइन पार एरिया कि बड़़़ी मार्केट रामनगर की ही है। इन 32 कॉलोनियों व करीब दर्जनभर गांव के लोग रामनगर की मार्केट से जुड़े हैं। ऐसे में इस मार्केट तक पहुंचने के लिए करीब 2 लाख की आबादी को जान जोखिम में डालकर लाइन क्रॉस करनी पड़ती है। रेल मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की इस मांग को जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं इस एरिया में एक टिकट घर या रेलवे की जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवा (जेटीबीएस) भी शीघ्र ही खोली जाएगी।
इन मांगों की ओर नहीं गई प्रभु दृष्टि
करनाल रेलवे स्टेशन दिल्ली से 120 व अंबाला जंक्शन से करीब 75 किलोमीटर दूरी पर है। 434 गांव में करीब 5 लाख की आबादी करनाल रेलवे स्टेशन पर निर्भर करती है। बावजूद इसके कई मूलभूत सुविधाओं का यहां अभाव है। दानवीर कर्ण की नगरी में धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी है। लेकिन कई धार्मिक स्थानों पर जाने वाली गाड़ियों का ठहराव यहां नहीं है।
इनमें 12445/46 नई दिल्ली उधमपुर उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (रोजाना), 22455/56 कालका साईं नगर शिरडी एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) व 22457/58 ऊना-नांदेड़ एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) इनमें से किसी भी गाड़ी का ठहराव नहीं हो पाया। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह जरूर कहा कि करनालवासियों की हर मांग शीघ्र ही पूरी होगी। खुद रेलमंत्री ने भी यह बात कही।
कार्यक्रम में दिखी अव्यवस्थाएं
केंद्रीय रेलमंत्री सहित सीएम के दौरे को ध्यान में रखते हुए करनाल रेलवे स्टेशन पर लोगों के बैठने की व्यवस्था सही नहीं थी। इस दौरान चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात दिखाई दिया, लेकिन कार्यक्रम में धक्का-मुक्की का माहौल देखने को मिला।
प्रेस, वरिष्ठ नागारिकों, अति विशिष्ट सदस्यों इत्यादि के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था रेलवे व जिला प्रशासन दोनों नहीं कर पाए। उम्मीद से अधिक जनता कार्यक्रम में आ गई। अलबत्ता मारा-मारी का माहौल दिखाई दिया। दूसरी ओर तेज गर्मी होने के बावजूद स्टेशन पर पानी की व्यवस्था नहीं थी?