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पाक वकील ने माना, भगत सिंह के खिलाफ 451 लोगों ने झूठी गवाही दी
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Wed, 18 May 2016 12:50 PM IST
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भारतीय वकील को शहद भगत सिंह से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए पाक वकील
- फोटो : अमर उजाला
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शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को पाकिस्तान में नाजायज तौर पर फांसी दी गई थी। उनके नाम एफआईआर में थे ही नहीं। झूठ को सच बनाने के लिए पाक सरकार ने 451 लोगों से झूठी गवाही दिलवाई। ये कहना है भगत सिंह मैमोरियल फाउंडेशन, पाक के चेयरमैन एडवोकेट इम्तियाज राशिद कुरैशी का।
कुरैशी ने जलियांवाला बाग में भारतीय एडवोकेट मोमिन मलिक को पुलिस की एफआईआर समेत सारे अदालती दस्तावेज भेंट किए और इस मामले में इंसाफ हासिल करने का दावा भी किया। अब इस मामले को पाकिस्तानी अदालत में रीओपन करने के बाद इसकी स्टडी हिंदुस्तान में होगी।
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कुरैशी ने जलियांवाला बाग में भारतीय एडवोकेट मोमिन मलिक को पुलिस की एफआईआर समेत सारे अदालती दस्तावेज भेंट किए और इस मामले में इंसाफ हासिल करने का दावा भी किया। अब इस मामले को पाकिस्तानी अदालत में रीओपन करने के बाद इसकी स्टडी हिंदुस्तान में होगी।
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न्यायिक प्रक्रिया को ताक पर रख कर दी गई फांसी
भारतीय वकील को शहद भगत सिंह से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए पाक वकील
- फोटो : अमर उजाला
कुरैशी ने बताया, दस्तावेज में स्पष्ट है कि तत्कालीन सरकार ने सारी न्याय प्रक्रिया को ताक पर रख कर भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी थी। उनका कहना है कि पुलिस में उस दौरान उक्त लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर निकलवाई गई तो उसमें उनके नाम ही नहीं है, यानी सरकार ने जबरन फांसी पर लटका दिया।
कुरैशी ने अपनी स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि इसमें उस दौर के कई प्रमुख तथा प्रतिष्ठित नेताओं के नाम भी दर्ज हैं, जिसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।उन्होंने कहा कि मामले को लेकर दोनों ही मुल्कों के लोग संजीदा हैं और उनकी कोशिश है कि बर्तानवी सरकार शहीदों के परिवारों को मुआवजा दे और माफी मांगे।
कुरैशी ने अपनी स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि इसमें उस दौर के कई प्रमुख तथा प्रतिष्ठित नेताओं के नाम भी दर्ज हैं, जिसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।उन्होंने कहा कि मामले को लेकर दोनों ही मुल्कों के लोग संजीदा हैं और उनकी कोशिश है कि बर्तानवी सरकार शहीदों के परिवारों को मुआवजा दे और माफी मांगे।