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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में ऑनरेरी मुख्य सचिव के लिए प्रस्ताव पास, कंट्रोल के लिए सुखबीर ने बनाई रणनीति

Sun, 29 Nov 2020 03:30 PM IST
निवेदिता वर्मा अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 29 Nov 2020 03:30 PM IST
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SGPC appoints harjinder singh dhami as honorary chief secreatary
बीबी जागीर कौर और हरजिंदर सिंह धामी। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में गुरुद्वारों का प्रबंधन करने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की नई अध्यक्ष बीबी जागीर कौर को कंट्रोल करने के लिए शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने तुरुप का पत्ता खेला है। 
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के इतिहास में पहली बार ऑनरेरी मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए साधारण सभा की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव पारित कर एसजीपीसी सदस्य हरजिंदर सिंह धामी को इस पद पर नियुक्त किया गया है। अब तक पहले एसजीपीसी इश्तिहार के जरिए उम्मीदवारों की नियुक्ति करती रही है। 
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शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रधान सुखबीर बादल ने दोआबा से संबंधित बीबी जागीर कौर को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपते हुए दूसरे एसजीपीसी सदस्य को ऑनरेरी मुख्य सचिव की सेवा सौंप कर समीकरण को अपने नियंत्रण में करने का प्रयास किया है। 
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बीबी जागीर कौर और धामी दोनों ही 24 साल से एसजीपीसी के सदस्य हैं। धामी पिछले साल एसजीपीसी के महासचिव की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इस पद पर रह कर उन्होंने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा है, जिसका लाभ उन्हें मुख्य सचिव की सेवा निभाने के दौरान मिलेगा। 

 

माझा-दोआबा को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सुखबीर ने साधा सियासी समीकरण  

सुखबीर बादल ने दोआबा के साथ-साथ माझा के दो एसजीपीसी सदस्यों सुरजीत सिंह भिट्टेविंड (सीनियर उपाध्यक्ष) व एडवोकेट भगवंत सिंह स्यालका (महासचिव) को जिम्मेदारी सौंपकर माझा की सिख सियासत को साधने का प्रयास किया है। वहीं एसजीपीसी के दोनों मुख्य पदों पर दोआबा के दो सदस्यों की नियुक्ति से सुखबीर बादल ने दोआबा की सिख राजनीति में एक संतुलन बनाने का भी प्रयास किया है। 

राजासांसी से चुनकर आने वाले भिट्टेविंड आगामी विधान सभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निकट सहयोगी वीर सिंह लोपोके की दावेदारी को चुनौती न दें, इसलिए उन्हें सीनियर उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बिक्रम मजीठिया के विधानसभा हलके से चुन कर आने वाले स्यालका को महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप कर पंथक वोट को मजबूत करने की कोशिश की गई है।


कभी जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा के साथी रहे धामी के लिए मुख्य सचिव के पद पर जिम्मेदारी निभाते हुए एसजीपीसी के अधिकारियों व कर्मचारियों से काम लेना व उन पर नकेल कसना बड़ी चुनौती है। दूसरी तरफ उन्हें अनुभवी बीबी जागीर कौर के साथ तालमेल पैदा करने के साथ-साथ एसजीपीसी के प्रबंधन को सुधारने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी होगी। हालांकि एसजीपीसी की पूर्व महासचिव बीबी किरणजोत ने कहा है कि अध्यक्ष व मुख्य सचिव दोनों अनुभवी हैं। इसलिए उम्मीद है कि एसजीपीसी के हालत ठीक होंगे। 
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