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हरियाणा सरकार के लिए नए साल में सबसे बड़ी चुनौती है, न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय करना

Wed, 01 Jan 2020 09:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 01 Jan 2020 09:18 AM IST
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Setting common minimum program is a big challenge for the haryana government
मनोहरलाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला - फोटो : एएनआई

हरियाणा की गठबंधन सरकार के लिए नए साल में सबसे बड़ी चुनौती न्यूनतम साझा कार्यक्रम को सिरे चढ़ाना होगा। प्रदेश में भाजपा, जजपा सरकार 27 अक्टूबर को दिवाली के दिन अस्तित्व में आ गई थी। उसके बाद से अब तक दोनों दलों के संकल्प पत्र को न्यूनतम साझा कार्यक्रम का रूप नहीं दिया जा सका है। 

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गृह मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में गठित समिति इसे लेकर एक बैठक कर चुकी है। दूसरी बैठक की तिथि तय नहीं है, हालांकि यह बैठक अब तक हो जानी चाहिए थी। लेकिन, वित्त और विधि विभाग न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल वादों पर होने वाले खर्च और कानूनी पेचीदगियों को लेकर अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाए हैं। 
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दोनों विभागों को यह बताना था कि वादों को सिरे चढ़ाने पर कुल कितना बजट खर्च होगा और कितने मामलों में काननी दिक्कत आ सकती है। यह रिपोर्ट आने के बाद ही कार्यक्रम तय हो पाएगा। 
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भाजपा, जजपा की ओर से चुनाव के समय किए गए बड़े वादों के धरातल पर उतरने का प्रदेश की जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है। चूंकि, पेंशन बढ़ोतरी, पुरानी पेंशन स्कीम, पंजाब समान वेतनमान सहित अनेक वादे ऐसे हैं, जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं।

पहले महीने में ही दो हड़ताल से पाना होगा पार

हरियाणा सरकार के सामने नए साल के पहले महीने में ही एक और चुनौती खड़ी है। सरकार को 3 और 4  जनवरी को हरियाणा नगरपालिका कर्मचारी संघ की हड़ताल से निपटना होगा। निकाय कर्मी नगर निगम आयुक्त, कार्यकारी अधिकारियों व पालिका सचिव के कार्यालय और 87 शहरों के मुख्य बाजारों में उल्टी झाड़ू लेकर प्रदर्शन करेंगे। 

इसके बाद 7-8 जनवरी को रोडवेज के चक्का जाम और ट्रेड यूनियनों की हड़ताल से जूझना होगा। चक्का जाम के सफल रहने पर जनता को बड़ी परेशानी हो सकती है। हालांकि, सरकार रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी से वार्ता के प्रयास में है। परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा है कि हड़ताल टालने के लिए कर्मचारी नेताओं से बातचीत की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों से भी हड़ताल से निपटने के लिए उचित प्रबंध करने को लेकर चर्चा करेंगे। 

ये वादे सिरे चढ़ाना चुनौती
. किसानों एवं छोटे दुकानदारों का सहकारी बैंकों का कर्ज माफ करने का जजपा ने वादा किया है। जमीन की नीलामी भी बंद की जाएगी।
. जजपा कर्मचारियों से पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने व पंजाब समान वेतनमान देने का वादा कर चुकी है। भाजपा ने अपने पहले कार्यकाल के घोषणा पत्र में पंजाब समान वेतनमान देने का वादा किया था, मगर पूरा नहीं कर पाई।
. वृद्घावस्था सम्मान पेंशन 5100 रुपये प्रतिमाह देना। जजपा के वादे अनुसार महिलाओं को 55 वर्ष व पुरुषों को 58 वर्ष पूर्ण होने पर घर पर ही मिलेगी। भाजपा ने महंगाई अनुसार पेंशन बढ़ाने का वादा किया हुआ है।
. हरियाणा के निगम, बोर्ड व अन्य संस्थाओं के चेयरमैन, अध्यक्ष, सदस्य, ओएसडी, कुलपति, रजिस्ट्रार आदि पदों पर हरियाणा के निवासियों को ही जजपा लगाना चाहती है, जबकि अनेक नियुक्तियां अब तक दूसरे प्रदेश के लोगों की हो चुकी हैं।
. हरियाणा की सभी नौकरियों में 75 प्रतिशत पद हरियाणावियों के लिए आरक्षित करने का वादा जजपा ने किया है। इस पर अब तक बयानबाजी ही हुई है।
. सरकारी कर्मचारियों को जजपा ने एचआरए पहली जनवरी 2017 से देने का वादा किया है। भाजपा सरकार इसे पहली जनवरी 2019 से लागू कर चुकी है।
. नौकरी मिलने तक जजपा शिक्षित युवाओं को 11 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा कर चुकी है। अभी इस पर कोई निर्णय नहीं।
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