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चुनाव से गायब हुए गंभीर मुद्दे, ठगा सा महसूस कर रहे वोटर  

Sat, 04 Feb 2017 12:48 AM IST
सुशील कुमार/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर)
सुशील कुमार/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर) Updated Sat, 04 Feb 2017 12:48 AM IST
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Serious issues were missing from election, voters are feeling a bit cheated
पंजाब विधानसभा चुनाव

पंजाब में चुनाव प्रचार थमने के बाद समाज के प्रति चिंतित रहने वाले लोग राजनेताओं के रवैये से आहत और निराश हैं। चार फरवरी को मतदान होगा लेकिन पिछले एक माह में जिस प्रकार सियासी दलों द्वारा एक दूसरे पर कीचड़ उछाला गया है, उसमें गंभीर मुद्दे दबकर रह गए। 

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इससे विभिन्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कुछ दलों ने गंभीर मुद्दों को चुटकुलों तक सीमित कर दिया तो कुछ ने तवज्जो ही नहीं दी। 
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लंबे समय से किसान और मजदूर वर्ग के हितों के लिए संघर्ष कर रही भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि कर्ज के कारण पंजाब का किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहा है। 
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किसी भी दल ने गंभीरता से इस मसले का समाधान जनता के समक्ष नहीं रखा। चिट फंड कंपनियों ने मालवा इलाके को बर्बाद कर दिया है लेकिन इस मुद्दे पर भी हवाई वायदे हुए। 

किसान संगठन मायूस तो आरटीआई एक्टिविस्ट निराश

Serious issues were missing from election, voters are feeling a bit cheated
चुनाव - फोटो : file

युवाओं को रोजगार देने के मामले में भी कोई ठोस नीति, जनता के सामने नहीं रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी और केजरीवाल तक ने पंजाब चुनाव में दस्तक दी लेकिन युवा वर्ग के भविष्य के प्रति किसी ने आश्वस्त नहीं किया है।  
 
आरटीआई कार्यकर्ता जतिंदर जैन ने कहा कि पंजाब की खराब आर्थिकता और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे अचानक चुनाव के वक्त ही गायब हो गए हैं। इन मुद्दों के प्रति सभी दलों को अपनी सटीक सोच और इसका समाधान जनता के सामने रखना चाहिए था लेकिन नेताओं की जुबान एक दूसरे पर निशाना साधने तक ही सीमित रही। 

आईडीपी के नेता करनैल सिंह ने कहा कि सियासत में परिवारवाद का मुद्दा हो या फिर लोकतंत्र प्रणाली में सुधार लाने का मुद्दा, किसी ने भी इन्हें गंभीरता से नहीं लिया है। 

व्यापार मंडल के प्रतिनिधि जगजीत सिंह अहुजा ने कहा कि व्यापारियों के कई दिक्कतों के प्रति किसी भी सियासी दल का ध्यान नहीं गया है। कई कानूनी पेचिदगियों और नीतियों के कारण व्यापार मंदी के दौर में है। 

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