Punjab: सीएम की व्यस्तता में अफसर संभालेंगे सीएमओ का जिम्मा, जरूरी फाइल के लिए एसीएस फोन पर लेंगे अनुमति
मुख्यमंत्री ने अपने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएससीएम), स्पेशल पर्सनल सेक्रेटरी (एसपीएससीएम), जेपीएससीएम और डिप्टी सेक्रेटरी (डीएससीएम) व अन्य अधिकारियों को अपने अधीन अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है।
विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री की व्यस्तता के दौरान सूबे के वरिष्ठ अधिकारी सीएमओ का कामकाज देखेंगे। जरूरी हुआ तो अधिकारी सीएम से फोन पर अनुमति लेंगे और महत्वपूर्ण फाइलों को निकालेंगे। ऐसा इसलिए किया गया है कि सीएमओ का कामकाज प्रभावित न हो। नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री ने अपने कार्यालय में नियुक्त आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को विभिन्न विभागों की फाइलों की जिम्मेदारी सौंप दी है।
शनिवार को जारी ताजा आदेश के तहत, मुख्यमंत्री ने अपने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएससीएम), स्पेशल पर्सनल सेक्रेटरी (एसपीएससीएम), जेपीएससीएम और डिप्टी सेक्रेटरी (डीएससीएम) व अन्य अधिकारियों को अपने अधीन अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है।
आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री जब मुख्यालय में नहीं होंगे, तब त्वरित कार्रवाई वाले मामले, जिनका निपटारा मुख्यमंत्री द्वारा ही किया जाना आवश्यक होगा, को मुख्यमंत्री से उनके मोबाइल फोन पर ही विचार-विमर्श कर तय समय में आदेश जारी कर दिए जाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री के कार्यालय लौटने का इंतजार नहीं किया जाएगा और न ही कोई फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी जाएगी। यह भी कहा गया है कि अगर संभव हो तो ऐसे मामलों का निपटारा मुख्यमंत्री के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी द्वारा किया जा सकता है।
विभागों की जिम्मेदारी:
ए. वेणुप्रसाद (मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव)
पर्सनल, गृह व न्याय, विजिलेंस, वित्त, सामान्य प्रशासन (जिसमें आतिथ्य व समन्वय शामिल होंगे), खनन एवं भूविज्ञान, ऊर्जा, कृषि एवं कृषि कल्याण, बागवानी, मिट्टी एवं जल संरक्षण, वन, वन्य जीव, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट, एक्साइज एंड टैक्सेशन, स्थानीय निकाय, जल स्रोत, सहकारिता, योजना, जेल, संसदीय मामले, विधि एवं विधायी मामले सहित कुल 21 विभाग।
एसपीएससीएम (आर) रवि भगत:
सूचना एवं जनसंपर्क, राजस्व पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान, जलापूर्ति एवं सैनिटेशन, ट्रांसपोर्ट, सामाजिक न्याय अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक, सामाजिक सुरक्षा महिलाएं एवं बाल विकास, श्रम, रोजगार उत्पत्ति एवं प्रशिक्षण, प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी, खेल एवं युवक सेवाएं, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, चुनाव।
एसपीएससीएम कुमार अमित:
पब्लिक वर्क्स, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, साइंस टेक्नोलॉजी एंड पर्यावरण, कार्यक्रम क्रियान्वयन, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण, नागरिक उड्डयन, ग्रामीण विकास एवं पंचायतें, पशुपालन मछली पालन एवं डेयरी विकास, स्वतंत्रता सेनानी, रक्षा सेवाएं कल्याण, शिकायत निवारण। इनके अलावा, सीएमओ की सभी शाखाएं, मुख्यमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री का कोविड राहत कोष, मुख्यमंत्री विवेकाधीन अनुदान, पंजाब रक्षा एवं सुरक्षा राहत कोष, सीएमओ के आतिथ्य एवं कार्यालय/अन्य खर्च।
एपीएससीएम हिमांशु जैन:
प्रशासनिक सुधार, शासकीय सुधार, उद्योग एवं कामर्स, निवेश प्रोत्साहन, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले, एनआरआई मामले। इनके अलावा, मुख्यमंत्री के सेक्रेटरी-कम-ओएसडी के परामर्श से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सूची तैयार करना और उसे सीलबंद लिफाफे में प्रतिदिन नामित अधिकारियों को भेजना, जब भी जरूरत हो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के मिनट्स जारी करना।
जेपीएससीएम संदीप ग्राहा:
सरकार द्वारा शुरू की जा रही विभिन्न विभागों की योजनाओं और परियोजनाओं की निगरानी करना और विभिन्न नीतियों की तैयारी/समीक्षा के लिए एसपीएससीएम (के) और एपीएससीएम के साथ समन्वय करना।
ऐसे समझे नई व्यवस्था को:
1. पूर्व सीएम के समय सीएमओ की सारी जिम्मेदारी सुरेश कुमार पर थी, इसलिए नई व्यवस्था के लिए आर्डर स्पष्ट होने जरूरी थे।
2. वर्तमान आर्डर में पीएससीएम के स्थान पर एपीएससीएम को वरीयता में रखा गया है।
3. सीएम बाहर होंगे या व्यस्त होंगे तो भले ही अधिकारियों के विभाग तय कर दिए गए हैं, लेकिन सीएम से फोन पर बात एपीएससीएम ही करेंगे और उनकी अनुमति से फाइल निकालेंगे।
4. फोन पर अनुमति के बावजूद सीएम के वापस आने पर एसीएससीएम को फाइल पर आर्डर लेने होंगे।