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हरियाणा चुनाव में छाया 'डंकी': 'बेरोजगारी बच्चों को बाहर भेजने पर मजबूर करती है...', पढ़ें परिजनों की आपबीती

Fri, 04 Oct 2024 12:10 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 04 Oct 2024 12:10 PM IST
सार

हरियाणा के चुनाव में बेरोजगारी और नौकरियां एक बड़ा मुद्दा है। हरियाणा में चुनाव प्रचार करने पहुंचे राहुल गांधी अपनी रैलियों व रोड शो में बेरोजगारी व डंकी रूट से जाने वाले युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठाते आए हैं।

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Sending people abroad through dunki unemployment became issues in Haryana Election
डंकी रुट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जींद के दुड़ाना गांव की गलियों, चौपालों और चौकों पर नजरें दौड़ाएंगे तो शायद ही कोई युवा मिले। घर के बाहर आमतौर पर बुजुर्ग ही बैठे मिलेंगे। इस गांव के अधिकतर युवा बेहतर भविष्य की तलाश में भारत से बाहर जाकर बस गए हैं। 

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3500 आबादी वाले गांव के करीब 450 युवक अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दुबई समेत अन्य देशों में बस गए हैं। इनमें कुछ युवा स्टडी वीजा से बाहर गए तो कुछ डंकी रूट से गए। गांव के एक छोर पर बैठे गांव के 66 वर्षीय मंजीत बताते हैं कि उनका बेटा भी अमेरिका में है। वह डंकी रूट से गया था। बेटा जंगलों के रास्ते भूखा-प्यासा करीब डेढ़ साल बाद अमेरिका पहुंचा है। अपने जिगर के टुकड़े का भविष्य बनाने के लिए एक किला खेत बेचना पड़ा है। उसे अमेरिका भेजने में करीब 40 लाख रुपये का खर्च आया है।
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मंजीत जैसी कई कहानियां हरियाणा के तमाम घरों में देखने को मिलती है। वह कहते हैं कि यदि उनके बेटे को इसी मुल्क में अच्छी नौकरी मिलती तो शायद वह इकलौते बेटे को बाहर भेजते। 

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बन रहा बड़ा मुद्दा

बेरोजगारी पर कांग्रेस के हमलों को भाजपा काउंटर करते हुए कहती है कि यह मुद्दा कांग्रेस के शासनकाल से चला आ रहा है। राज्य सरकार ने पिछले दस साल में बिना पर्ची-बिना खर्ची के एक लाख 40 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां पारदर्शी तरीके से दी हैं, जो कांग्रेस के पिछले दस साल के शासन काल की दोगुना नौकरियां हैं। अवैध इमिग्रेशन पर रोक लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए हैं।

दुड़ाना गांव निवासी हरियाणा पुलिस से रिटायर्ड इंस्पेक्टर रतन सिंह के तीन बच्चे भी अमेरिका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में बसे हैं। वह कहते हैं कि उनका बड़ा बेटा बीए पास, छोटा 12वीं पास और बेटी एमएससी नर्सिंग पास आउट थी। जब उन्हें यहां नौकरियां नहीं मिली तो मजबूरन उन्हें बाहर भेजना पड़ा। इसके लिए उन्हें अपने जीपीएफ का पैसा और दो किले जमीन बेचनी पड़ी।

नाैकरियों के इंतजार में बच्चे हो रहे ओवर एज

हालांकि उन्होंने अपने सभी बच्चों को स्टडी वीजा के माध्यम से भेजा है। उन्होंने बताया कि आज के समय यदि किसी को स्टडी वीजा से भेजना है तो कम से कम 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं, डंकी रूट से भेजने पर 40 से 50 लाख रुपये का खर्च आएगा। यदि गलत एजेंट के चक्कर में फंसे तो पैसा भी डूब जाता है। गांव के भूपिंदर कहते हैं कि कोई मां-बाप नहीं चाहता है कि उनका बच्चा बाहर जाए। मजबूरी में ही लोग बाहर जाते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर नौकरियां लटकती रहती हैं। इससे कई बच्चे ओवरएज हो गए। 

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा कहते हैं कि भाजपा सरकार ने युवाओं को धोखा दिया है। पढ़े-लिखे युवाओं को पक्का रोजगार देने के बजाय कच्ची नौकरी दी। इससे युवाओं में हताशा व निराशा है। नौकरी नहीं मिलने पर बेरोजगार युवक हरियाणा से पलायन कर गया। बेरोजगारी की वजह से ही प्रदेश में नशा बढ़ा है और नशे के कारण अपराध बढ़ा है। इसके लिए भाजपा सरकार ही जिम्मेदार है।

आतिशबाजी से पता चलता है कि बेटा पहुंच गया विदेश

गांव के कुलवंत सिंह ने बताया कि जब किसी का बेटा या बेटी विदेश पहुंच जाता है तो लोग आतिशबाजी कर जश्न मनाते हैं। पटाखों से ही पता चलता है कि बच्चा अमेरिका या कनाडा पहुंच गया। हर महीने से तीन से चार बार आतिशबाजी देखने को मिलती है। आतिशबाजी के बाद घर वाले बाबा रोड़ा की समाधि पर आकर प्रसाद चढ़ाते हैं। बाबा रोड़ा की वजह से गांव में कृपा बरस रही है। वह बताते हैं कि जो बच्चे विदेश में बसे हैं वह और उनके माता-पिता गुल्लक में कुछ न कुछ पैसे भेजते रहते हैं। हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये गुल्लक में आते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर जो भी आता है, उसकी मन्नत जरूर पूरी होती हैं।

हरियाणा में कितनी बेरोजगारी है

हाल ही में केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन पीरियोडिक लेबर फोर्स (पीएलएफएस ) 2023-24 में ओवरआल बेरोजगारी दर 3.4 फीसदी है। 22-23 में यही बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी थी। वहीं, चुनिंदा आयु वर्ग में बीते तिमाही के मुकाबले बेरोजगारी बढ़ी है। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में 15-29 आयु वर्ग में अप्रैल से जून में बेरोजगारी दर 11.2 फीसदी है, जो जनवरी से मार्च की तिमाही में करीब 9.5 फीसदी थी।

नौकरियों के मुद्दे पर हरियाणा सरकार का क्या दावा 

कार्यवाहक सीएम नायब सिंह सैनी के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे ने बताया, भाजपा ने सरकार ने दस साल में एक लाख 45 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं। इसके साथ ही करीब 37 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में स्वरोजगार एवं नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। एचकेआरएन के माध्यम से लगभग 1.20 लाख लोगों को अनुबंध के आधार पर काम पर रखा गया था। अब इन सभी की नौकरियां भी सुरक्षित हैं।

भर्ती रोको गैंग की वजह से करीब 30 हजार से ज्यादा नौकरियों के परिणाम रुके हुए हैं। वहीं, अवैध तरीके से विदेश भेजे जाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार ने साल की शुरुआत में हरियाणा रजिस्ट्रेशन और ट्रैवल एजेंट का विनियमन विधेयक 2024 को मंजूरी दी है। इसमें कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने विदेश में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं को लीगल रूट से 250 युवाओं को भेजा विदेश भेजा था।

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