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सीनेट चुनाव की संभावनाएं कम, फिर भी तैयारियों में जुटी पीयू

Sun, 11 Oct 2020 01:48 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 01:48 AM IST
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Senate election Possibilities less, yet PU ready for preparations
चंडीगढ़। पुटा चुनाव के बाद अब सीनेट चुनाव की बारी है। बेशक इस चुनाव की संभावनाएं कम हैं फिर से पीयू इसकी तैयारी में जुटी है। सभी विभागों के कर्मचारियों का डाटा मांगा जा रहा है ताकि उनकी ड्यूटी चुनाव में लगाई जा सके। वहीं दूसरी ओर गोयल ग्रुप पुटा चुनाव जीतने के बाद अब सीनेट चुनाव की ओर देख रहा है। इसके लिए चारों ओर से दबाव बनाने की तैयारी की जा रही है।
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सीनेट का चुनाव अगस्त व सितंबर माह में करवाया जाना था, लेकिन कोरोना के कारण चुनाव टाल दिया गया। अब पुटा का चुनाव हो गया। 627 शिक्षकों वाले संगठन का चुनाव होने के बाद एक ग्रुप यह सवाल उठा रहा है कि पुटा का चुनाव हो सकता है तो पीयू कैंपस की छह सीटों के लिए चुनाव क्यों नहीं हो सकता। कम से कम पीयू अपने कैंपस में तो चुनाव करवा सकता है। पीयू अभी सीनेट चुनाव के मूड में नहीं है, लेकिन चुनाव से जुड़े अधिकारी कागजों में अपनी तैयारी कर रहे हैं। सभी विभागों को फिर से पत्र भेजे गए हैं। पूछा गया है कि उनके यहां कितने कर्मचारी काम करते हैं और कितनी ड्यूटी चुनाव में लगाई जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि गोयल ग्रुप पुटा चुनाव को आधार मानकर हाईकोर्ट भी जा सकता है। वह पहले ही इसको लेकर घोषणा कर चुके हैं। मालूम हो कि 31 अक्तूबर को सीनेट का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। उसके बाद पीयू के संचालन के लिए सिंडिकेट बचेगी। उसका कार्यकाल भी दिसंबर में पूरा हो जाएगा।
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इनसेट--
सीनेट सुधार करने की तैयारी, बोर्ड ऑफ गवर्नेंस भी ले सकता है जगह
सूत्रों का कहना है कि सीनेट के चुनाव अक्तूबर में होते नजर नहीं आ रहे हैं। नवंबर व दिसंबर में वैसे ही चुनाव नहीं हो पाएंगे। ऐसे में स्थिति सीनेट सुधार की बन रही है। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस इसकी जगह ले सकता है। इसका आधार पीयू राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कर बना रही है। जब सीनेट सुधार होगा तो सिंडिकेट भी अस्तित्व में नहीं रहेगी। पूरा संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के पास होगा। इस बोर्ड में कौन-कौन शामिल होंगे, यह अभी तय नहीं है, लेकिन अधिकांश लोग इसमें शिक्षक ही शामिल होंगे। शिक्षकों का चयन कैसे होगा? यह बाद में पता चलेगा। सूत्रों का कहना है कि चांसलर कार्यालय से भी दस लोगों का मनोनयन होगा। हालांकि अभी इसमें देर है।
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पीयू के बचेंगे सालाना करोड़ों रुपये
यदि सीनेट व सिंडिकेट का ढांचा बदलता है तो पीयू के करोड़ों रुपये बचेंगे। सीनेट की साल में तीन से चार बैठकें होती हैं। सिंडिकेट की बैठक हर माह होती है। एजेंडे से लेकर खाना-पीना आदि पर करोड़ों रुपये साल के खर्च होते हैं। साथ ही दोनों के चुनाव में भी दो करोड़ रुपये तक खर्च होते हैं। ऐसे में यह रकम पीयू के खजाने में रहेेगी। इससे अन्य कार्य करवाए जा सकेंगे।
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