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सेलवेल कंपनी की प्रॉपर्टी अटैच करने के लिए डीसी बालाजी जोशी लिखा पत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:34 AM IST
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Chandigarh DC Ajit Balaji Joshi
- फोटो : File Photo
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नगर निगम कमिश्नर एवं प्रशासक बी पुरुषार्था ने डीसी अजीत बालाजी जोशी को पत्र लिखकर सेलवेल कंपनी की प्रॉपर्टी अटैच करने के लिए कहा है। दरअसल, नगर निगम ने सेलवेल कंपनी को पब्लिक टॉयलेट चलाने के लिए दिए थे, लेकिन कंपनी ने विज्ञापन शुल्क के 16 करोड़ 51 लाख रुपये निगम के पास जमा नहीं करवाए। कमिश्नर ने डीसी को पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट के सेक्शन 98(ए) के चेप्टर 7 के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा है, जिसके तहत कंपनी की प्रॉपर्टी अटैच करने के लिए कहा गया है।
मालूम हो कि सेलवेल कंपनी को दिए गए पब्लिक टॉयलेट्स का मामला पिछले 6 साल से विवाद में घिरा है। नगर निगम के अनुसार, एक तो बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी कंपनी ने करोड़ों रुपये का विज्ञापन शुल्क जमा नहीं करवाया है और दूसरा जो पब्लिक टॉयलेट कंपनी ने नगर निगम को वापस दिए है वह उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में कंपनी को चलाने के लिए अलॉट किए गए थे।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने वर्ष 2006 से 2012 तक कंपनी को एक बार 84 और दूसरी बार 46 पब्लिक टॉयलेट्स चलाने के लिए दिए थे। हर टॉयलेट्स ब्लॉक के बाहर विज्ञापन लगाने के लिए खाली जगह छोड़ी गई थी। यह विज्ञापन शुल्क कंपनी को नगर निगम को जमा करवाना था लेकिन, कंपनी से ऐसा नहीं किया। नवंबर 2014 में कंपनी को 9 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करवाने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन, इस पर ब्याज लगने से अब यह राशि बढ़कर साढ़े 16 करोड़ से हो गई है। सेलवेल कंपनी ने इन नोटिस के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर रखी है। यह मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जबकि साल 2014 में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट भी नगर निगम को राशि वसूल करने के आदेश जारी कर चुका है। कमिश्नर ने अपने पत्र में हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र भी किया गया है। इसके अलावा नगर निगम पिछले साल नंवबर में सेलवेल कंपनी को दो साल के लिए डिबाड कर चुकी है। इस कारण कंपनी नगर निगम में दो साल के लिए टेंडर के लिए आवेदन नहीं कर सकती है।
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मालूम हो कि सेलवेल कंपनी को दिए गए पब्लिक टॉयलेट्स का मामला पिछले 6 साल से विवाद में घिरा है। नगर निगम के अनुसार, एक तो बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी कंपनी ने करोड़ों रुपये का विज्ञापन शुल्क जमा नहीं करवाया है और दूसरा जो पब्लिक टॉयलेट कंपनी ने नगर निगम को वापस दिए है वह उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में कंपनी को चलाने के लिए अलॉट किए गए थे।
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जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने वर्ष 2006 से 2012 तक कंपनी को एक बार 84 और दूसरी बार 46 पब्लिक टॉयलेट्स चलाने के लिए दिए थे। हर टॉयलेट्स ब्लॉक के बाहर विज्ञापन लगाने के लिए खाली जगह छोड़ी गई थी। यह विज्ञापन शुल्क कंपनी को नगर निगम को जमा करवाना था लेकिन, कंपनी से ऐसा नहीं किया। नवंबर 2014 में कंपनी को 9 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करवाने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन, इस पर ब्याज लगने से अब यह राशि बढ़कर साढ़े 16 करोड़ से हो गई है। सेलवेल कंपनी ने इन नोटिस के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर रखी है। यह मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जबकि साल 2014 में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट भी नगर निगम को राशि वसूल करने के आदेश जारी कर चुका है। कमिश्नर ने अपने पत्र में हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र भी किया गया है। इसके अलावा नगर निगम पिछले साल नंवबर में सेलवेल कंपनी को दो साल के लिए डिबाड कर चुकी है। इस कारण कंपनी नगर निगम में दो साल के लिए टेंडर के लिए आवेदन नहीं कर सकती है।
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