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फाइनांस करवा रखी कार बेचने के नाम पर ठगे 52 लाख रुपये, कारवाले डॉट काम और कार ट्रेड डॉट के जरिए हुआ था शातिरों से संपर्क
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चंडीगढ़। विशाखापटनम के कुछ लोगों ने मर्सिडीज कार बेचने के नाम पर सेक्टर-10 निवासी व्यक्ति को 52 लाख रुपये की चपत लगा दी है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने शिकायत पर आरोपी पुन्यमंथूला नव्या राधाकृष्ण, चिंता शंकर राव व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 व 120/बी के तहत मामला दर्ज करके सभी की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत में हिम्मत जाखड़ ने बताया कि वह सेक्टर-10 में रहते हैं। 21 अगस्त 2019 को कारवाले डॉट कॉम व कार ट्रेड डॉट कॉम के जरिए उसका विशाखापटनम के रहने वाले पुन्यमंथूला नव्या राधाकृष्ण से संपर्क हुआ था। वह मर्सिडीज कार मॉडल नंबर जीएएस-400 बेचना चाह रहा था। शिकायत में बताया गया कि कार की तस्वीरें व दस्तावेज भेजने के बाद पता चला कि गाड़ी पुन्यमंथूला नव्या राधाकृष्ण के पिता पी. आनंद राव के नाम पर है।
आरोपी ने यह भी कहा कि कार पर कोई कर्ज नहीं है। बाद में चेक करने पर पता चला कि कार एक बैंक से फाइनांस करवा रखी है। जब यह बात उक्त आरोपियों को बताई गई तो उन्होंने कहा कि बैंक से एनओसी लेनी थी, कोई कर्ज बाकी नहीं है। इसके बाद आरोपी ने कहा कि उसके पिता की मौत हो गई है और कार वह अपने नाम करवा लेगा। फिर कहने लगे कि आंध्र प्रदेश ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से उसके नाम पर कार रजिस्टर्ड नहीं हुई है क्योंकि उसके नाम पर पहले से तीन गाड़ियां रजिस्टर्ड है। बाद में आरोपी ने कहा कि कार ससुर चिंता शंकर राव के नाम पर करवा ली है। इसके बाद आरोपियों के झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने 52 लाख रुपये भेज दिए लेकिन बाद में पता चला कि कार पर अभी भी कर्ज है और आरोपियों द्वारा भेजे गए दस्तावेज फर्जी थे। इससे परेशान होकर मामले की सूचना पुलिस को दी।
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पुलिस को दी शिकायत में हिम्मत जाखड़ ने बताया कि वह सेक्टर-10 में रहते हैं। 21 अगस्त 2019 को कारवाले डॉट कॉम व कार ट्रेड डॉट कॉम के जरिए उसका विशाखापटनम के रहने वाले पुन्यमंथूला नव्या राधाकृष्ण से संपर्क हुआ था। वह मर्सिडीज कार मॉडल नंबर जीएएस-400 बेचना चाह रहा था। शिकायत में बताया गया कि कार की तस्वीरें व दस्तावेज भेजने के बाद पता चला कि गाड़ी पुन्यमंथूला नव्या राधाकृष्ण के पिता पी. आनंद राव के नाम पर है।
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आरोपी ने यह भी कहा कि कार पर कोई कर्ज नहीं है। बाद में चेक करने पर पता चला कि कार एक बैंक से फाइनांस करवा रखी है। जब यह बात उक्त आरोपियों को बताई गई तो उन्होंने कहा कि बैंक से एनओसी लेनी थी, कोई कर्ज बाकी नहीं है। इसके बाद आरोपी ने कहा कि उसके पिता की मौत हो गई है और कार वह अपने नाम करवा लेगा। फिर कहने लगे कि आंध्र प्रदेश ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से उसके नाम पर कार रजिस्टर्ड नहीं हुई है क्योंकि उसके नाम पर पहले से तीन गाड़ियां रजिस्टर्ड है। बाद में आरोपी ने कहा कि कार ससुर चिंता शंकर राव के नाम पर करवा ली है। इसके बाद आरोपियों के झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने 52 लाख रुपये भेज दिए लेकिन बाद में पता चला कि कार पर अभी भी कर्ज है और आरोपियों द्वारा भेजे गए दस्तावेज फर्जी थे। इससे परेशान होकर मामले की सूचना पुलिस को दी।
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