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छात्र ने एडवाइजर से की शिकायत, अंकल! मुझे साइकिल से स्कूल जाना है, लेकिन ट्रैक ही नहीं है
Mon, 06 May 2019 02:28 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 06 May 2019 02:28 PM IST
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साइकिल ट्रैक
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अंकल, मुझे साइकिल से स्कूल जाना अच्छा लगता है, लेकिन मेरे घर के सामने हाइवे है और साइकिल ट्रैक ही नहीं बना। इसलिए रोजना पापा को स्कूल तक छोड़ने जाना पड़ता है। आगे जाकर साइकिल ट्रैक बना भी है तो उसमें कई महीनों से गड्ढे हैं। पानी भरा होने से गिरने का डर लगता है। प्लीज शहर के साइकिल ट्रैक बनवाएं और जहां टूटे हैं उनको दुरुस्त करवाएं। यह शिकायत हल्लोमाजरा निवासी हर्षदीप ने एडवाइजर मनोज परिदा से की है।
कार्मल कॉन्वेंट में कक्षा आठवीं के छात्र हर्षदीप ने शिकायत करते हुए कहा है कि मुझे साइकिल चलाने का शौक है। हाईकोर्ट केआदेश पर शहर की सुंदरता केलिए साइकिल ट्रैक तो बना दिए गए, लेकिन कई जगह अभी भी समस्या है। जीरकपुर से ट्रिब्यून चौक तक हाइवे हैं। वहां से इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने के लिए काफी लोग साइकिल से निकलते हैं। साइकिल ट्रैक न होने से सभी को समस्या होती है।
तेज रफ्तार से आने वाली गाड़ियों से टकराने का डर रहता है। हल्लोमाजरा से स्कूल जाते समय पापा को आधे रास्ते तक आना होता है। उसके बाद सेक्टर 31 में शांति पथ पर आशादीप भवन के पीछे साइकिल ट्रैक पर काफी गड्ढे हैं। यह गड्ढे करीब 4 माह से हैं, लेकिन अभी तक गड्ढे भरे नहीं गए। गड्ढों में पानी भरा है जिससे उसमें गिरने का डर बना रहता है।
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कार्मल कॉन्वेंट में कक्षा आठवीं के छात्र हर्षदीप ने शिकायत करते हुए कहा है कि मुझे साइकिल चलाने का शौक है। हाईकोर्ट केआदेश पर शहर की सुंदरता केलिए साइकिल ट्रैक तो बना दिए गए, लेकिन कई जगह अभी भी समस्या है। जीरकपुर से ट्रिब्यून चौक तक हाइवे हैं। वहां से इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने के लिए काफी लोग साइकिल से निकलते हैं। साइकिल ट्रैक न होने से सभी को समस्या होती है।
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तेज रफ्तार से आने वाली गाड़ियों से टकराने का डर रहता है। हल्लोमाजरा से स्कूल जाते समय पापा को आधे रास्ते तक आना होता है। उसके बाद सेक्टर 31 में शांति पथ पर आशादीप भवन के पीछे साइकिल ट्रैक पर काफी गड्ढे हैं। यह गड्ढे करीब 4 माह से हैं, लेकिन अभी तक गड्ढे भरे नहीं गए। गड्ढों में पानी भरा है जिससे उसमें गिरने का डर बना रहता है।
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हर्षदीप के पिता कमलजीत सिंह का कहना है कि यहां कई लोग ऐसे हैं जिनकी आमदनी ज्यादा नहीं है। ऐसे लोग बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजते हैं। शहर में सबसे ज्यादा साइकिल का उपयोग करने वाले लोग इसी क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन यहां साइकिल ट्रैक नहीं है। जहां साइकिल ट्रैक हैं वहां आवारा पशु बैठे रहते हैं। जिससे बच्चों को डर लगता है। सेक्टर 35 निवासी ओमप्रकाश शुक्ला बताते हैं कि यहां बने साइकिल ट्रैक पर कभी लाइट नहीं जलती है। रात के समय लोगों को मुख्य सड़क से होकर गुजरना होता है। हल्लोमाजरा लाइट पॉइंट पर कैमरा न लगा होने से भी खतरा बना रहता है।
चीफ इंजीनियर फोन ही नहीं उठाते
ओमप्रकाश शुक्ला ने बताया कि साइकिल ट्रैक से जुड़ी समस्या को लेकर यदि चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को फोन लगाओ तो उठाते ही नहीं है। इसी प्रकार कमलजीत सिंह ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस से साइकिल ट्रैक बनवाने के लिए फोन लगाया तो चीफ इंजीनियर का नंबर दिया, लेकिन उनका फोन ही नहीं उठता, इसलिए मेरे बेटे ने एडवाइजर से ट्रैक बनाने की अपील की है।
चीफ इंजीनियर फोन ही नहीं उठाते
ओमप्रकाश शुक्ला ने बताया कि साइकिल ट्रैक से जुड़ी समस्या को लेकर यदि चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को फोन लगाओ तो उठाते ही नहीं है। इसी प्रकार कमलजीत सिंह ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस से साइकिल ट्रैक बनवाने के लिए फोन लगाया तो चीफ इंजीनियर का नंबर दिया, लेकिन उनका फोन ही नहीं उठता, इसलिए मेरे बेटे ने एडवाइजर से ट्रैक बनाने की अपील की है।