Haryana News: हरियाणा विधानसभा में गूंजेगा सहकारिता विभाग का घोटाला, विपक्ष घेरने और सरकार बचाव की तैयारी में
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में सहकारिता विभाग में हुआ करोड़ों रुपये का घोटाला गूंजेगा। इस बीच खबर यह निकलकर सामने आ रही है कि सरकार 2005 से मामले की जांच करा सकती है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को आशंका है कि यह घोटाला 2018 से नहीं बल्कि 2005 से चल रहा था।
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सहकारिता विभाग में हुए करोड़ों रुपये का घोटाला इसी माह से शुरू होने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में गूंजेगा। विपक्षी दल कांग्रेस और इनेलो ने इस पर सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। उधर, राज्य सरकार ने घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ धड़ाधड़ कार्रवाई करके बचाव की रणनीति तैयार की है। हालांकि, बताया जा रहा है कि मनोहर सरकार पिछली हुड्डा सरकार के कार्यकाल 2005 से इस मामले की जांच करा सकती है।
एसीबी को भी आशंका है कि यह घोटाला 2018 से नहीं बल्कि 2005 से चल रहा था। अगर ऐसा हुआ तो कई सेवानिवृत्त अफसरों के साथ पिछले रजिस्ट्रार भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।
इसके अलावा इस मामले में एनसीडीसी (नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन) के अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं, क्योंकि आईसीडीपी में पूरा पैसा केंद्र से आता है और बकायदा इसके लिए पूरी रिपोर्ट तैयार की जाती है कि किस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च किया जाएगा। इसके अलावा पूरी तरह से निगरानी का कार्य केंद्र के अधिकारियों का होता है लेकिन एनसीडीसी के अधिकारियों ने इतने साल बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई जानकारी नहीं ली और एक के बाद एक करोड़ों रुपये इस प्रोजेक्ट में जारी करते रहे।
बिना रिकॉर्ड कैसे होगी जांच
घोटाले का खुलासा होने के बाद एसीबी और सरकार रिकॉर्ड तलब कर रही है लेकिन विभाग के पास काफी संख्या में रिकॉर्ड ही नहीं है। ऐसे में घोटाले की पूरी जांच होना मुश्किल है, क्योंकि अधिकतर स्थानों पर या तो रिकॉर्ड गायब कर दिया गया या फिर खराब हो गया है। पैक्स समितियों से लेकर सहकारी समितियों और जिला स्तर के कार्यालयों से भी रिकॉर्ड गायब है।
नरेश गोयल से अतिरिक्त चार्ज भी छीने
सहकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक नरेश गोयल से आईसीडीपी के नोडल अधिकारी का चार्ज वापस लेने के बाद उनके संयुक्त रजिस्ट्रार के साथ एडमिन का चार्ज भी ले लिया है। मुख्यालय की ओर से 2005 से ही सभी जिलों में किस जिले में कौन एआर, डीआर से लेकर आईसीडीपी का जीएम रहा है, उनका डाटा भी तैयार कराया जा रहा है।