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फर्जीवाड़ाः हरियाणा में अफसरों ने पदक विजेताओं के नाम पर चहेतों-रिश्तेदारों को बांटे करोड़ों
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:44 PM IST
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Anil Vij and Ashok Khemka
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हरियाणा खेल निदेशालय में जूनियर और सब जूनियर प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये प्रदान करने का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। 2015 की खेल नीति में जूनियर और सब जूनियर श्रेणी के पदक विजेताओं को कोई इनामी राशि देने का प्रावधान नहीं है, बावजूद इसके निदेशालय के उच्च अधिकारियों ने 2015 से 2018 तक लगभग दो हजार खिलाड़ियों को 35 से चालीस करोड़ रुपये बांट दिए। स्वर्ण पदक विजेता को 20 लाख रुपये, रजत पदक विजेता को 15 लाख, कांस्य पदक विजेताओं को दस लाख रुपये व प्रतियोगिता में भाग लेने वालों को तीन लाख रुपये दिए गए हैं।
नई खेल नीति बनने के बाद ही निदेशालय में यह फर्जीवाड़ा शुरू हुआ। इससे पहले मामूली राशि ही उत्साहवर्धन के तौर पर इन श्रेणियों के खिलाड़ियों को दी जाती थी। खेल नीति में वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, पैरावर्ल्ड गेम, पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप वार्षिक के लिए ही यह राशि वितरित करने का प्रावधान है। लेकिन, निदेशालय के उच्च अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जूनियर और सब जूनियर पदक विजेताओं को भी करोड़ों रुपये की रेवड़ियां बांट दी। यही नहीं, ईनामी राशि पाने वाले खिलाड़ियों में उच्च अधिकारियों के चहेते, रिश्तेदार और सगे संबंधी भी हैं।
फर्जी टूर्नामेंट और खिलाड़ियों को भी मिला ईनाम
खेल निदेशालय के उच्च अधिकारियों ने जमकर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। जूनियर और सब जूनियर श्रेणी में अनेक ऐसे खिलाड़ियों को भी लाखों की इनामी राशि बांट दी गई, जो इसे पाने के लिए पात्र ही नहीं थे। इसके साथ ही टूर्नामेंट भी फर्जी था और उसे सरकार या किसी अधिकृत संस्था की मान्यता नहीं थी। इसके अलावा अनेक ऐसी खेलों के लिए भी ईनाम दे दिया गया है, जिन्हें हरियाणा सरकार ने अपनी खेल नीति में शामिल ही नहीं किया है।
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खेमका ने पकड़ा इनाम वितरण का फर्जीवाड़ा
खेल विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका ने जूनियर और सब जूनियर खिलाड़ियों को लाखों रुपये बिना प्रावधान के ही बतौर इनाम बांटने का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। खेमका के पास जब इसकी फाइल आई तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं, चूंकि खेल नीति में शामिल यूथ ओलंपिक गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता को दस लाख, रजत पदक विजेता को साढ़े सात लाख और कांस्य पदक विजेता को पांच लाख रुपये मिल रहे हैं, और जूनियर-सब जूनियर प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को बीस, 15 और दस लाख रुपये की राशि दे दी गई। पूरे मामले से खेमका ने खेल मंत्री अनिल विज को अवगत करा दिया है और राशि वितरण का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। बताया जा रहा है कि खेल निदेशक जगदीप सिंह की पद से छुट्टी भी इसी मामले के चलते हुई है।
अब रिकवरी की लटकी तलवार, सरकार पर अंतिम निर्णय
खेल नीति में जूनियर-सब जूनियर को इनाम देने का कोई प्रावधान न होने पर भी करोड़ों रुपये बांटने के मामले में आईएएस अशोक खेमका ने खेल मंत्री अनिल विज और सरकार से राय मांगी है। चूंकि, इतनी बड़ी राशि बिना प्रावधान के किसके इशारे पर बांटी गई, इसकी तह तक खेमका पहुंचना चाहते हैं। जिन खिलाड़ियों को 2015 के बाद लाखों रुपये दिए गए हैं, उनसे रिकवरी भी की जा सकती है। सरकार के निर्णय के बाद ही खेल विभाग अगली कार्रवाई शुरू करेगा।
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नई खेल नीति बनने के बाद ही निदेशालय में यह फर्जीवाड़ा शुरू हुआ। इससे पहले मामूली राशि ही उत्साहवर्धन के तौर पर इन श्रेणियों के खिलाड़ियों को दी जाती थी। खेल नीति में वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, पैरावर्ल्ड गेम, पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप वार्षिक के लिए ही यह राशि वितरित करने का प्रावधान है। लेकिन, निदेशालय के उच्च अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जूनियर और सब जूनियर पदक विजेताओं को भी करोड़ों रुपये की रेवड़ियां बांट दी। यही नहीं, ईनामी राशि पाने वाले खिलाड़ियों में उच्च अधिकारियों के चहेते, रिश्तेदार और सगे संबंधी भी हैं।
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फर्जी टूर्नामेंट और खिलाड़ियों को भी मिला ईनाम
खेल निदेशालय के उच्च अधिकारियों ने जमकर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। जूनियर और सब जूनियर श्रेणी में अनेक ऐसे खिलाड़ियों को भी लाखों की इनामी राशि बांट दी गई, जो इसे पाने के लिए पात्र ही नहीं थे। इसके साथ ही टूर्नामेंट भी फर्जी था और उसे सरकार या किसी अधिकृत संस्था की मान्यता नहीं थी। इसके अलावा अनेक ऐसी खेलों के लिए भी ईनाम दे दिया गया है, जिन्हें हरियाणा सरकार ने अपनी खेल नीति में शामिल ही नहीं किया है।
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खेमका ने पकड़ा इनाम वितरण का फर्जीवाड़ा
खेल विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका ने जूनियर और सब जूनियर खिलाड़ियों को लाखों रुपये बिना प्रावधान के ही बतौर इनाम बांटने का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। खेमका के पास जब इसकी फाइल आई तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं, चूंकि खेल नीति में शामिल यूथ ओलंपिक गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता को दस लाख, रजत पदक विजेता को साढ़े सात लाख और कांस्य पदक विजेता को पांच लाख रुपये मिल रहे हैं, और जूनियर-सब जूनियर प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को बीस, 15 और दस लाख रुपये की राशि दे दी गई। पूरे मामले से खेमका ने खेल मंत्री अनिल विज को अवगत करा दिया है और राशि वितरण का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। बताया जा रहा है कि खेल निदेशक जगदीप सिंह की पद से छुट्टी भी इसी मामले के चलते हुई है।
अब रिकवरी की लटकी तलवार, सरकार पर अंतिम निर्णय
खेल नीति में जूनियर-सब जूनियर को इनाम देने का कोई प्रावधान न होने पर भी करोड़ों रुपये बांटने के मामले में आईएएस अशोक खेमका ने खेल मंत्री अनिल विज और सरकार से राय मांगी है। चूंकि, इतनी बड़ी राशि बिना प्रावधान के किसके इशारे पर बांटी गई, इसकी तह तक खेमका पहुंचना चाहते हैं। जिन खिलाड़ियों को 2015 के बाद लाखों रुपये दिए गए हैं, उनसे रिकवरी भी की जा सकती है। सरकार के निर्णय के बाद ही खेल विभाग अगली कार्रवाई शुरू करेगा।