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SYL मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से पंजाब को तगड़ा झटका, अमरिंदर का इस्तीफा

Fri, 11 Nov 2016 09:16 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 11 Nov 2016 09:16 AM IST
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SC verdict on SYL link, captain resign from lok sabha
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के पानी के बंटवारे को लेकर पंजाब सरकार को झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक पंजाब टर्मिशन आफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 पास कर दिया है। समझौता रद्द करने का अधिकार पंजाब सरकार को नहीं है।
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सतलुज-यमुना लिंक नहर पर निर्माण कार्य जारी रहेगा। नहर की जमीन किसानों को देना गलत है। हरियाणा को पंजाब की नदियों से पानी का हिस्सा देना पड़ेगा। इस नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद है। 
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जस्टिस एआर दवे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 12 मई को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस दवे 18 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इस मामले में केंद्र ने कहा है कि राज्य इस मामले का निपटारा खुद करें। 
 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया इस्तीफा

SC verdict on SYL link, captain resign from lok sabha
captain amrinder singh - फोटो : amar ujala

सतलुज यमुना लिंक नहर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंजाब के खिलाफ आने पर पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। कैप्टन ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। जबकि, विधायक शुक्रवार सुबह विधानसभा स्पीकर को अपना त्याग पत्र सौंपेंगे।

अपने आवास पर वीरवार को प्रेसवार्ता के दौरान कैप्टन ने कहा कि फैसला पंजाब के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम प्रकाश सिंह बादल आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर रहे हैं, लेकिन दस साल सत्ता में रहने पर उन्होंने कुछ नहीं किया। कांग्रेस अब जनता की अदालत में जाएगी और दो तिहाई बहुमत मांगेगी। ताकि सत्ता में आने पर पंजाब के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाया जा सके। 

कैप्टन ने आशंका जताई कि बादल कुछ ऐसा खतरनाक कदम उठा सकते हैं, जिससे पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब सारे विधायक इस्तीफा ही दे देंगे, तो सत्र में जाने का कोई मतलब नहीं है। साल 2004 में जब उन्होंने एक्ट बनाया था तो शिअद ने उन्हें समर्थन दिया था, लेकिन कांग्रेस अब शिअद को समर्थन नहीं देगी, क्योंकि पार्टी को बादल पर भरोसा नहीं है। बादल ने ही फरवरी 1978 में एसवाईएल के लिए जमीन एक्वायर की थी, हरियाणा से पैसे लिए थे। देवीलाल ने हरियाणा विधानसभा में पंजाब के साथ समझौते की पुष्टि की थी। अब प्रेसिडेंशियल रेफ्रेंस में भी केंद्र सरकार, जिसका शिअद हिस्सा है, ने पंजाब विरोधी स्टैंड लिया था। जिससे बादलों के पाखंड का खुलासा होता है।
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