कभी जेई थे रामपाल, आज हैं 'सतलोक' के संत
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हरियाणा के हिसार में स्थित सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल किसी समय हरियाणा सरकार में जेई थे। सोनीपत जिले के धनाना गांव में 8 सितंबर, 1951 को भगत नंदराम के घर में जन्मे रामपाल ने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर जेई बने थे।
इसी दौरान उनकी मुलाकात कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई। स्वामी रामदेवानंद से रामपाल इतने प्रभावित हुए कि शिष्य के तौर पर उनकी बताई शिक्षाओं का पालन करने लगे।
उनके शिष्य बनने के बाद रामपाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब वो इस पंथ की गद्दी पर आसीन हुए और खुद का आश्रम बना डाला, जिसमें उनके नियमित प्रवचन होने लगे। इसके बाद संत रामपाल का कद और साम्राज्य बढ़ने लगा।
1999 में खुला पहला आश्रम
इसी बीच उनकी भक्त कमला देवी ने करौंथा गांव में आश्रम के लिए जमीन दान में दी। सन् 1999 में उन्होंने करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की। शुरुआत में पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर का सत्संग शुरू किया।
देखते-देखते कुछ ही वर्षों में इस आश्रम ने भव्य रूप ले लिया और यह कई एकड़ में फैल गया। इतना ही नहीं, हिसार जिला के बरवाला के अलावा अन्य राज्यों में भी उन्होंने अपने आश्रम बना डाले।
शुरुआत के कुछ वर्षों में तो सब सामान्य चला किंतु धीरे-धीरे करौंथा व साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल द्वारा किए जा रहे प्रचार पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
2006 में शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब साल 2006 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद की एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की। आर्य समाज ने इस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया। रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में हुए खूनी टकराव में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
मामला यही नहीं है, सतलोक आश्रम को खाली करने का मामला भी अदालत में चल रहा है। कुछ स्थानीय लोगों और आर्य समाजी लोगों की मांग है कि संत रामपाल करौंथा आश्रम खाली कर दें। इसे लेकर लंबी कानूनी लड़ाई हो चुकी है, इसके बाद आश्रम पर कब्जे के लिए चली लंबी कानूनी जंग में संत रामपाल को जीत मिली, जब 2009 में हाईकोर्ट ने सतलोक आश्रम को दोबारा संत रामपाल ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया।
इस फैसले को राज्य सरकार और आर्यसमाज प्रतिनिधि सभा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 18 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाजियों की अपील खारिज कर दी। इससे आर्य समाजी नाराज हो गए। इसके बाद हुए प्रदर्शन में 12 मई 2013 को रोहतक के करौंथा गांव में जबरदस्त टकराव और हिंसा हुई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी और पुलिस जवानों समेत 120 लोग घायल हुए थे।
21 महीने जेल में रह चुके हैं संत रामपाल
संत रामपाल को 2006 में हुई उस घटना के बाद करीब 21 महीने जेल में रखा गया। आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर का कहना है कि संत रामपाल को 21 महीने तक झूठे केस में जेल में रखा गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी ओर से कोई प्रदर्शन नहीं किया गया।
लेकिन अगर हम मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो इसी मामले में जारी अदालती कार्रवाई में पेश न होने की वजह से संत रामपाल के खिलाफ अवमानना के मामले में गैर जमानती वारंट जारी हुआ।
कई बार बीमारी और अन्य चीजों का बहाना बनाकर वे पेश होने से बचते रहे। आखिरकार अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। जब पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो उनके अनुयायी 'कमांडो' बनकर सामने खड़े हो गए।
40 हजार फोर्स बाबा के सामने 'बेबस'
बाबा रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए तीन दिन से पुलिस दबाव की रणनीति बनाए हुए थी। राज्य पुलिस के अलावा नेवल कमांडो, सीआरपीएफ और आरएएफ के जवान भी मोर्चे पर थे।
पूरे अमले के साथ पुलिस रविवार को सुबह 11 बजे आश्रम की ओर बढ़ी, मगर रात तक करीब 200 मीटर दूर ही खड़ी रही। इस दौरान पुलिस के अफसरों ने अपने काफिले के साथ आश्रम के सामने कई चक्कर लगाए।
आश्रम के मुख्य दरवाजे पर डटे अनुयायियों-समर्थकों की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई। बुलेट प्रूफ गाडियों, वज्र वाहनों, घोड़ा पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को दिखाकर अनुयायियों पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन बाबा के अनुयायी व निजी कमांडो भी डटे रहे। बाद में सुरक्षाबलों के जवानों को नजदीकी थानों और धर्मशालाओं में भेज दिया गया।
यूं चल रहा घटनाक्रम
5 नवंबर -
रामपाल की हाईकोर्ट में पेशी थी, लेकिन रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए। हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम के श्रद्धालुओं को पंचकूला में ही रोकने के आदेश दिए थे।
6 नवंबर -
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और रामकुमार ढाका के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को वारंट को लागू करवाने और दोनों को गिरफ्तार करने के सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा अदालत में पेश हुए और उन्होंने रामपाल के अस्वस्थ होने की बात कही।
7 नवंबर -
रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके बरवाला के पास स्थित सतलोक आश्रम में अनुयायी जुटने शुरू हो गए। इस दिन करीब आठ हजार अनुयायी आश्रम में पहुंचे। इसी दिन से आश्रम में तीन दिवसीय सत्संग शुरू हुआ। वहीं डीसी और एसपी इसी दिन चंडीगढ़ पहुंचे।
8 नवंबर -
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिसार में अर्धसैनिक बल तैनात हो गया। पुलिस की ओर से 10 अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों के साथ विभिन्न जिलों से 35 कंपनियां हिसार बुलाई गईं। 10 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए। पुलिस ने बरवाला को चारों तरफ से नाकेबंदी कर सील कर दिया। उधर, इस दिन आश्रम में करीब 25000 अनुयायी इकट्ठा हो गए।
अनुयायी और ब्लैक कमांडों डटे आश्रम के बाहर
9 नवंबर
जिला प्रशासन ने रामपाल का री-मेडिकल करवाया। मेडिकल में उनके चलने-फिरने में अस्वस्थ होने की बात कही गई और उन्हें 72 घंटे के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। वहीं रामपाल के साथ-साथ दूसरे आरोपी राष्ट्रीय समाजसेवक समिति के मुखी रामकुमार ढाका को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। इस दिन सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और ब्लैक कमांडो आश्रम के गेट के बाहर तैनात रहे।
10 नवंबर -
पुलिस को संत रामपाल को हाईकोर्ट में पेश करना था लेकिन पुलिस रामपाल को कोर्ट में पेश नहीं कर सकी, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो बंकर से भी रामपाल को निकाल लाए। इसलिए अगली पेशी हर हालत में रामपाल को पेश किया जाए अथवा डीजीपी खुद पेश हों। हाईकोर्ट ने डीजीपी व गृह सचिव को सोमवार तक संत रामपाल और रामकुमार ढाका को पेश करने के निर्देश दिए।
11 नवंबर -
सतलोक आश्रम की ओर से रामपाल के मुंह पर ऑक्सीजन लगाए फोटो और वीडियो जारी किया गया। इसके अलावा आश्रम के गेट पर बड़ी संख्या में अनुयायी डटे रहे। पुलिस कंपनियां और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी बरवाला से वापस हिसार पहुंच गए। छह दिन बीत जाने के बाद भी इस दिन तक अनुयायी सर्द हवाओं के बीच आश्रम के आगे डटे रहे।
12 नवंबर -
पुलिस ने रामपाल के आश्रम की घेराबंदी शुरू कर दी। आश्रम के रास्तों पर पुलिस ने 15 जगह नाके लगाकर हर नाके पर 10-15 पुलिस कर्मी तैनात कर दिए। बरवाला और उकलाना में भी पुलिस फोर्स भेज दी गई। वहीं अनुयायियों ने इस दिन स्पष्ट चेतावनी दे डाली कि अब तो किसी भी हालत में संत को नहीं ले जाने देंगे।
दिल्ली घेरने की अनुयायियों की चेतावनी
13 नवंबर -
इस दिन रामपाल के अनुयायियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके हक में फैसला नहीं आया तो 17 नवंबर को दिल्ली घेरेंगे और राष्ट्रपति आवास पहुंचकर न्याय दो या मौत दो का नारा बुलंद करेंगे। वहीं आश्रम कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया।
वहीं मामले से संबंधित रणनीति बनाने के लिए डीजीपी एसएन वशिष्ठ भी हिसार पहुंचे और पुलिस कर्मियों की बैठक ली। प्रशासन ने अस्पताल, अग्निशमन, रोडवेज विभागों को साथ लेकर संत रामपाल पर शिकंजा कसने के लिए तैयारियों को मुस्तैद किया गया।
14 नवंबर -
सतलोक आश्रम के बाहर टकराव के आसार बढ़ गए। प्रशासन की ओर से आश्रम की बिजली-पानी काट दिया गया। रोडवेज की बसें, एंबुलेंस और जेसीबी मंगवाई गईं। साथ ही इस ओर के सभी रूट डायवर्ट कर दिए गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्रम का हवाई सर्वे भी किया। दिल्ली से पैरामिलिट्री फोर्स भी मंगवाई गई। वहीं आश्रम के बाहर बैठे अनुयायियों ने किसी भी हालत में रामपाल को गिरफ्तार न होने देने का ऐलान किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी संत रामपाल की अर्ली हियरिंग की याचिका को खारिज कर दिया।
15 नवंबर -
इस दिन पुलिस रामपाल के आश्रम को घेरकर और करीब पहुंच गई। आईजी अनिल राव ने 500 मीटर की दूरी से आश्रम का निरीक्षण किया। आसपास के शिक्षण संस्थानों की तीन दिन के लिए छुट्टी कर दी गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस दिन रामपाल से खुद ही अदालत में पेश होने की अपील की। उधर, मानव शृंखला बनाकर अनुयायियों ने आश्रम के बाहर डेरा डाल दिया और चार गुना निजी ब्लैक कमांडो ने छतों पर मोर्चा संभाला।