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15 राज्यों की साड़ियां मिलेंगी यहां, जरूर पहुंचें

Sun, 15 Nov 2015 04:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 15 Nov 2015 04:35 PM IST
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saree special exhibition in kissan bhawan

अगर आप असली सिल्क से बनीं साड़ियां और सूट पसंद करतीं हैं तो खरीदारी का शानदार मौका है। सेक्टर-35 के किसान भवन में 26 नवंबर तक सिल्क फैब प्रदर्शनी लगाई जा रही है।

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इसमें देशभर के 15 राज्यों से 108 हथकरघा बुनकर समितियां और संस्थाएं बेहतरीन और शानदार किस्म की सिल्क साड़ियां, सूट और ड्रेस मैटेरियल लेकर आईं हैं। आपको यहां फर्निशिंग, कई वैराइटी के दुपट्टे, सलवार सूट और स्टॉल्स भी मिलेंगे। वहीं किसी भी स्टाल से कोई भी कपड़ा खरीदने पर केंद्र सरकार की ओर से 20 प्रतिशत की सब्सिडी भी दी जा रही है।
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प्रदर्शनी आयोजकों के अनुसार यहां मिलने वाले कपड़े पहले ही मार्केट रेट से बहुत कम हैं। क्योंकि यहां खरीदार सीधे साड़ियां, सूट बनाने वालों से सीधा सामान खरीदते हैं। इनमें बिचौलियों की भूमिका नहीं होती। इसलिए यहां मिलने वाले कपड़े मार्केट से सस्ते हैं। यहां कॉजीवरम, पोचमपल्ली, जामदानी, पैठानी, बालूचरी, जार्जेट, डूपियन सिल्क, कॉटन और नेट से बने उत्पाद मिलेंगे।
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प्रदर्शनी में वाराणसी, बेस्ट बंगाल और कर्नाटक में सबसे ज्यादा बिकने वाली सिल्क निर्मित साड़ियां और सूट मौजूद हैं। वाराणसी से आए इश्तियाक अहमद के अनुसार सिल्क के लिए देशभर में वाराणसी का नाम प्रसिद्ध है। उनके यहां एक से बढ़कर एक सिल्क के प्रोडक्ट हैं। इनमें तनछुई, खड्डी शिफॉन, जामदानी, जामेवार साड़ियां सबसे प्रचलित हैं। 

तेलंगाना के दनवाड़ा से आए रमेश के अनुसार उनके पास 4500 से लेकर 45 हजार तक की सिल्क साड़ियां हैं। इसके अलावा 1500 रुपये प्रति मीटर वाला ड्रेस मैटेरियल भी है। ये सब हस्त निर्मित हैं, जिन्हें उनकी संस्था से जुड़ी महिलाएं महीनों की मेहनत के बाद तैयार करती हैं।

बिहार से आए मोहमद अल्ताफ के अनुसार उनके यहां मधुबनी सिल्क साड़ी खासी प्रचलित है। इनकी देशभर में डिमांड है। इस वक्त उनके पास जो वैरायटी है, उसकी कीमत 2 से 10 हजार रुपये है। इसके अलावा सिल्क और सिल्क मिक्स सूट भी है, जिनकी कीमत 1 हजार से 4 हजार रुपये है।

90 हजार की साड़ी
उत्तर प्रदेश के मऊ से आए उद्यमी सोने और चांदी की कढ़ाई से बनी बनारसी साड़ियां लेकर आए हैं। इनकी कीमत 75 से 90 हजार रुपये तक है। ये पूरी तरह से हस्त निर्मित है। एक-एक साड़ी को बनाने में तीन-तीन महीने लगते हैं। इसके अलावा उनके पास सिल्क मिक्स निर्मित सूट और साड़ियां भी हैं, जो 1200 से 90 हजार रुपये तक की रेंज की हैं।


26 नवंबर तक चलेगी प्रदर्शनी

13 नवंबर से शुरू हुई यह प्रदर्शनी 26 नवंबर तक चलेगी। प्रदर्शनी सुबह 11 से शाम 8 बजे तक लगाई जा रही है। केवल ड्राइक्लीन कराएं हथकरघा उद्यमियों के अनुसार सिल्क से बनीं साड़ियां और सूट बहुत ध्यान से रखने पड़ते हैं। इनकी बड़ी खासियत यह है कि इन्हें सर्दी और गर्मी दोनों में पहन सकते हैं। कारीगरों के अनुसार इन्हें घर पर धोने से बचना चाहिए। इन्हें केवल ड्राइक्लीन ही कराना चाहिए। इससे यह सालों साल चलती हैं।

यहां की खास वैराइटी
आंध्रप्रदेश - गडवाल, धरमावरम, पोचमपल्ली,
असम - मूगा सिल्क
बिहार - तसर, कांथा, मधुबनी पेंटिंग
छत्तीसगढ़ - कांथा, ट्रायबल वर्क, कोसा सिल्क
दिल्ली - प्रिंटेड सिल्क साड़ियां
गुजरात - गठजोरा, पटोला
झारखंड - कांथा, कोसा सिल्क
जम्मू-कश्मीर - प्रिंटेड सिल्क साड़ियां, ड्रेस मैटेरियल
कर्नाटक - चिंतामणि, कसौटी वर्क कर्नाटक सिल्क
मध्य प्रदेश - चंदेरी, महेश्वरी
महाराष्ट्र - पैठनी, पूना साड़ी
ओडिशा - बोम्कई, सम्बलपुरी
राजस्थान - बंधेज
तमिलनाडू - कांजीवरम
उत्तर प्रदेश - तनछुई, जामदानी, जामेवार (बनारसी)
पश्चिम बंगाल - बलुचरी, कांथा, तंगाईल

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