सरबत खालसा पर गर्माई सियासत, कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरबत खालसा के पीछे कांग्रेस का हाथ होने का आरोप लगा रहे अकाली दल ने अब हमला और तेज कर दिया है। अकाली नेताओं ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल किया है कि उन्होंने दस नवंबर की एकत्रता के मास्टरमाइंड कांग्रेसियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की।
कांग्रेस हाईकमान यह स्पष्ट करे कि चब्बा में हुए देश विरोधी एकत्र पर स्पष्टीकरण देने के बजाय पार्टी ने चुप्पी क्यों साधी। शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा, हरचरण बैंस और अन्य नेताओं ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस पर जमकर वार किए।
डॉ. चीमा ने कहा कि कांग्रेस एक बार फिर पंजाब को काले दिनों में धकेलने की साजिश कर रही है। दस नवंबर की कार्रवाई भी उसी साजिश का हिस्सा है। कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने न सिर्फ चब्बा समागम की योजना बनाई, बल्कि वहां हाजिर भी हुए।
पूछा, क्या राहुल सरबत खालसा के प्रस्ताव मानते हैं
अकालियों ने कहा कि कांग्रेस यह बताए कि क्या वह दस नवंबर को पास किए गए प्रस्तावों का समर्थन करती है। पंजाब वासियों को अब पता चल गया है कि 80 व 90 के दशकों का दुखांत कांग्रेस की ही देन है। दस नवंबर के एकत्र ने साबित कर दिया है कि कांग्रेस एक बार फिर पंजाब को काले दौर की तरफ धकेलने की साजिश रच रही है।
डॉ. चीमा ने प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा को आगाह किया कि वह आग से न खेलें। साथ ही रमनजीत सिक्की, इंदरजीत जीरा, लाली मजीठिया और हरमिंदर गिल को पूर्व आतंकियों का साथ देने के जुर्म से मुक्त न करें।
लाली मजीठिया और हरमिंदर गिल की सरबत खालसा वाले दिन अलगाववादी नेताओं के साथ सामने आई फोन कॉल्स से साबित हो गया है कि कांग्रेस ने गड़बड़ी फैलाने के लिए उत्तेजित किया। साथ ही एकत्र बढ़ाने को सहायता देने का भी वचन दिया।