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पंजाबः सरबत खालसा की तैयारियां पूरी, छावनी बना अमृतसर
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Mon, 09 Nov 2015 09:57 AM IST
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पंजाब के अमृतसर में मंडियाला रोड पर 10 नवंबर को होने जा रहे सरबत खालसा की तैयारियां पूरी हो चुकी है। अखंड पाठ भी शुरू हो गया। दस नवंबर को अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद सरबत खालसा की शुरुआत होगी।
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वहीं सरबत खालसा को लेकर कोई टकराव पैदा न हो, इसके मद़देनजर पंजाब पुलिस ने अमृतसर को पूरी तरह पुलिस छावनी में तबदील कर दिया है। पुलिस के साथ-साथ रिजर्व बटालियन और पैरा मिलिट्री फोर्स भी तैनात कर दी गई है। अमृतसर चब्बा रोड पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है।
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शहर में वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में फ्लैग मार्च भी निकाला गया। सारी व्यवस्था की देखरेख डीआईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह कर रहे हैं। एसएसपी अमृतसर ग्रामीण जसदीप सिंह ने बताया कि सरबत खालसा को लेकर पूरी चौकसी बरती जा रही है।
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अमृतसर के साथ साथ सारे जिले में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अन्य जिलों से भी पुलिस को अमृतसर बुला लिया गया है। पैरा मिलिट्री फोर्स को भी अलर्ट किया किया गया है। सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
हर हालत में होगा सरबत खालसा
सरबत खालसा बुलाने वाले संगठनों के वरिष्ठ नेता और यूनाइटेड अकाली दल के नेता भाई मोहकम सिंह ने कहा कि सरबत खालसा हर हाल में होगा। सरकार इसे असफल बनाने की कोशिश करेगी लेकिन दुनिया भर में इसे लेकर उत्साह है। सिख कौम का अब पांच जत्थेदारों पर विश्वास नहीं रह गया है।
कौम अब अपनी अगुवाई किसी योग्य नेता को सौंपना चाहती है। पंज प्यारों की ओर से तलब किए जाने के बावजूद जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश नहीं हुए। ऐसे में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पास भी अब दिवाली पर कौम के नाम संदेश देने का कोई अधिकार नहीं रह गया है।
एसजीपीसी भी पंज प्यारों के आदेशों के बावजूद जत्थेदारों को पद से हटा नहीं रही है। अब सिख कौम अपना और जत्थेदारों के भविष्य का फैसला खुद करेगी। उन्होंने कहा कि सरबत खालसा का नाम किसी भी कीमत पर बदला नहीं जाएगा। सरबत खालसा सफल होगा।
दस नवंबर को आयोजित किया जाने वाला सरबत खालसा मान्य नहीं है। इसे सरबत खालसा की संज्ञा नहीं दी सकती। सरबत खालसा सिर्फ अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ही बुला सकते हैं। सरबत खालसा के नाम पर जो लोग इकट्ठे हो रहे हैं, वे पंजाब के हालात खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सिख पंथक संगठनों के आयोजन को समर्थन न दें।
-अवतार सिंह मक्कड़, अध्यक्ष, एसजीपीसी