{"_id":"68c331b0838a9c3b0a00ba34","slug":"sarangi-instrument-teaching-workshop-is-going-on-in-kalagram-chandigarh-news-c-16-pkl1079-815894-2025-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: कलाग्राम में चल रही है सारंगी वाद्ययंत्र शिक्षण की कार्यशाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: कलाग्राम में चल रही है सारंगी वाद्ययंत्र शिक्षण की कार्यशाला
विज्ञापन
मनीमाजरा। युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तरी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी) पटियाला की ओर से कलाग्राम, मनीमाजरा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बच्चों को प्राचीन भारतीय वाद्य यंत्र सारंगी, बजाना सिखाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य इस पारंपरिक वाद्य को विलुप्त होने से बचाना और नई पीढ़ी में इसे लोकप्रिय बनाना है।
इस निशुल्क कार्यशाला का संचालन एक सितंबर से हो रहा है। यह 15 सितंबर तक चलेगी। प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक चलने वाली इस कार्यशाला में 10 से 14 वर्ष की आयु के 16 से अधिक बच्चे सारंगी वादन की बारीकियां सीख रहे हैं। इस कार्यशाला का नेतृत्व प्रसिद्ध सारंगी वादक स्वर्गीय मामन खान के पोते राजेश कुमार कर रहे हैं, जिन्हें उनके बेटे अमन कुमार का सहयोग मिल रहा है।
लुप्त होती कला को बचाने का प्रयास
कलाग्राम के प्रोग्राम ऑफिसर यशविंदर शर्मा ने बताया कि कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजाने वाले कलाकारों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए एनजेडसीसी ने सारंगी की कला को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। शर्मा ने कहा कि हमें लगा कि युवाओं को सारंगी वादन से जोड़ना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कला लुप्त होने की कगार पर है। अगर हम आज युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे, तो ही हम कल को बेहतर बना पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस निशुल्क कार्यशाला का संचालन एक सितंबर से हो रहा है। यह 15 सितंबर तक चलेगी। प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक चलने वाली इस कार्यशाला में 10 से 14 वर्ष की आयु के 16 से अधिक बच्चे सारंगी वादन की बारीकियां सीख रहे हैं। इस कार्यशाला का नेतृत्व प्रसिद्ध सारंगी वादक स्वर्गीय मामन खान के पोते राजेश कुमार कर रहे हैं, जिन्हें उनके बेटे अमन कुमार का सहयोग मिल रहा है।
विज्ञापन
लुप्त होती कला को बचाने का प्रयास
कलाग्राम के प्रोग्राम ऑफिसर यशविंदर शर्मा ने बताया कि कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजाने वाले कलाकारों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए एनजेडसीसी ने सारंगी की कला को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। शर्मा ने कहा कि हमें लगा कि युवाओं को सारंगी वादन से जोड़ना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कला लुप्त होने की कगार पर है। अगर हम आज युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे, तो ही हम कल को बेहतर बना पाएंगे।
विज्ञापन