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जानिए, सतलोक से क्या साथ लेकर लौटे रामपाल?

Mon, 24 Nov 2014 02:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार Updated Mon, 24 Nov 2014 02:13 PM IST
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Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

गिरफ्तार होने के बाद पहली बार रामपाल को निशानदेही के लिए सतलोक लाया गया। सतलोक पहुंचने पर रामपाल की हालत देखने लायक थी। उसके चेहरे के भाव पल-पल बदल रहे थे। बिखरे पड़े आश्रम को देखकर मायूस हो जाता।

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हालांकि वह मर्जी से किसी चीज को छू नहीं पाया, लेकिन उसे आश्रम से दो जोड़ी कपड़े लेने की अनुमति जरूर मिली। वो भी तब मिली, जब उसने निशानदेही करवाई।

आश्रम के बाद अस्पताल ले जाया गया

Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

संत रामपाल को बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में निशानदेही के बाद रविवार को सामान्य अस्पताल में मेडिकल के लिए लाया गया।

रामपाल ने डॉक्टर को बताया कि डॉक्टर साहब! मुझे रात में नींद नहीं आ रही, बार-बार बेचैनी होने लगती है कुछ एसिडिटी की भी समस्या है।

बताया जा रहा है कि संत रविवार को स्नान नहीं कर पाए। हालांकि डॉक्टरों ने चेकअप के बाद रामपाल का स्वास्थ्य ठीक बताया है। पुलिस ने 48 घंटे पूरे होने के पश्चात रूटीन में रामपाल का मेडिकल चेकअप करवाया।

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डॉक्टर के सामने जोड़े हाथ और मुस्कुराए

Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

पुलिस सामान्य अस्पताल में रामपाल को ठीक 4 बजकर 22 मिनट पर लेकर आई। घुसते ही रामपाल ने डॉक्टर को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इसके बाद हल्का मुस्कुराया और अपनी बीमारी के बारे में बताने लगा।

डॉक्टरों ने उनका ब्लड प्रेशर चेक किया तो नार्मल मिला। इसके  बाद ठीक 4 बजकर 34 मिनट पर वह अस्पताल से बाहर आ गया। डॉक्टरों के अनुसार उसके हाव-भाव ठीक थे और शरीर से भी स्वस्थ है।

चाय पी और साथ में बिस्कुट भी खाए
सिविल लाइन थाने की हवालात में बंद रामपाल थाने के स्टाफ से परिचित होने लगा है। रविवार सुबह उसने पहली चाय के साथ बिस्कुट भी मांगे। उसने दूसरी बार सिर्फ चाय ली। इसके बाद ठीक दस बजे सुबह का खाना खाया।

करीब दो बजे हवालात से बाहर निकाला गया और पुलिस उसे बरवाला आश्रम में ले गई। आश्रम से अस्पताल में मेडिकल करवाने के बाद उन्हें ठीक 4 बजकर 50 मिनट पर दोबारा हवालात में बंद कर दिया गया। रामपाल ने रविवार को स्नान नहीं किया।

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पल-पल बदलते रहे चेहरे के भाव

Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

चंद दिनों पहले तक जिसके पीछे हजारों अनुयायियों का रेला चलता था। वह जिधर घूम जाता उसके पैरों पर हजारों अनुयायी गिर पड़ते। उसकी एक-एक बात को लोग अपना आदर्श मानते। करोड़ों का महल और करोड़ों में ही कमाई करने वाला ‘सतलोक का शहंशाह’  आज असहाय सा बंदी बनाकर अपने ही साम्राज्य में लाया गया। अब न वो अनुयायी थे और जय-जयकार।

शाही अंदाज भी समाप्त हो चुका था। हालत यह थी कि वह अपनी मर्जी से अपने ही महल की किसी चीज को हाथ तक नहीं लगा सकता था। हर चीज पुलिस के इशारे पर बात-बात पर पुलिस उसको डपटती और घुड़की देकर उससे महल के संदिग्ध स्थानों के बारे में जानकारी मांगती।

यह हाल था रविवार को सतलोक आश्रम पहुंचे संत रामपाल का, जिसे निशानदेही के लिए आश्रम लाया गया था। यहां पहुंचने के बाद हर पल उसके चेहरे के हावभाव बदल रहे थे। कभी वह अपनी कुर्सी (जहां से वह प्रवचन देता था) को आत्मीयता से देखता तो कभी सर्च अभियान में टूटे पड़े सामान को देखकर चौंक सा जाता।

शायद आखिरी बार देख पाए साम्राज्य!

Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

देशद्रोह, हत्या व हत्या प्रयास के आरोप में घिरा रामपाल गिरफ्तारी के बाद पहली बार अपने घर पहुंचा। जिस घर में हमेशा चहल पहल रहती थी वह आज पूरी तरह से खाली था। आश्रम में संत को अपना नहीं बल्कि पुलिस का साम्राज्य नजर आया।

रामपाल पर जो धाराएं लगी हैं उनके हिसाब से संत का जेल से बाहर आना मुश्किल है क्योंकि ऐसे अपराधों में सजा-ए-मौत अथवा उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। दो घंटे तक आश्रम में रहा रामपाल भी शायद यही सोचता रहा कि अब वह आखिरी बार अपने इस साम्राज्य को देख रहा है।

हो सकता है पुलिस उसे पूछताछ के नाम पर फिर आश्रम लाए लेकिन उसे इसकी उम्मीद कम ही है। रामपाल के आगे पीछे उसके अपने कमांडो नहीं खाकी ही खाकी दिखाई दे रही थी।

मर्जी से किसी चीज को छू नहीं पाया

Sant Rampal Arrived at Satlok Ashram

सूत्रों का कहना है कि रामपाल जिस साम्राज्य का राजा हुआ करता था वहां वह अपनी मर्जी से कुछ छू तक नहीं पाया। कई बार आग्रह करने के बाद उसे सिर्फ दो जोड़ी कपड़े लेने की अनुमति मिली। पुलिस के कड़े पहरे ने उसे अपने ही महल में लाचार बना दिया।

कभी लिफ्ट से होता था प्रकट
12 एकड़ के आश्रम में सेंट्रल हॉल के सामने करीब 20 बाई 30 फीट के विशेष केबिन में रामपाल प्रवचन देता था। विशेष प्रकार के इस केबिन में रामपाल लिफ्ट से प्रकट होता था। ऑटो ऑपरेटेड कुर्सियां इसकी खासियत हैं।

रामपाल प्रवचन के दौरान कभी कुर्सी से नीचे चला जाता तो कभी अचानक दाहिने से बायीं ओर प्रकट हो जाता था। यह देखकर अनुयायी उसकी जय-जयकार करने लगते थे।

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