फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Sanskrit Workshop in DAV School

'संस्कृत को बचाना है तो एकेडमी बनाए प्रशासन'

Fri, 10 Jan 2014 12:34 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 10 Jan 2014 12:34 PM IST
विज्ञापन
Sanskrit Workshop in DAV School
संस्कृत भाषा हमारी मां की तरह है जिसे हमें अपने साथ रखना होगा। अगर हमें इससे ज्यादा आमदनी नहीं भी मिलती तो इसका यह मतलब नहीं कि हम अपनी मां को भूल जाएं।
विज्ञापन


अगर संस्कृत भाषा को बचाना है तो चंडीगढ़ में संस्कृत एकेडमी बनानी होगी। इसके लिए प्रशासन को आगे आना होगा। यह कहना है पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी संस्कृत के छात्र और संस्कृत अकादमी चंडीगढ़ के अध्यक्ष उद्यन आर्य का।
विज्ञापन


वे डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 15 में चली 6 दिनों की वर्कशाप के आखिरी दिन उपस्थितजनों को संबोधित कर रहे थे। संस्कृत अकादमी चंडीगढ़ द्वारा आयोजित इस वर्कशाप में हर उम्र के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान शहर के डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन भी मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
उद्यन आर्य ने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी में अकादमी मैने 2 साल पहले शुरू की और आज इसके साथ 500 से 1000 लोग जुड़े हैं। कोशिश यही है कि चंडीगढ़ प्रशासन भी संस्कृत भाषा के लिए आगे आए और संस्कृत अकादमी का गठन किया जाए।

वर्कशॉप में पिछले छह दिनों से आ रहे 65 वर्षीय, सेक्टर 38 वेस्ट निवासी, रिटायर्ड आईपीएस एजीएयूटी कैडर के अफसर नरेंद्रजीत पाल सिंह रंधावा ने कहा कि मैने करनाटक के बेलगाम में संस्कृत सीखी थी। अखबार से इस वर्कशाप के बारे में सुना और आने कि सोची और संस्कृत में बात करने के बारे में अच्छे से सीखा।

आईडीबीआई बैंक के एजीएम पवन कुमार छिब्बड़ ने वर्कशाप से जुड़े अनुभव के बारे में बताया की मुझे अध्यात्म के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है, लेकिन अधिकतर किताबें संस्कृत में होने की वजह से मुझे उनका हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद ही पढ़ना पढ़ता था, लेकिन अब संस्कृत पढ़ ली है तो में किताबों को अच्छे से पढ़ पाऊंगा।

सेक्टर 58 के बिजनेस मैन नरेंद्र शर्मा की संस्कृत से जुड़ी अलग कहानी है। उन्होंने कहा मैंने छठी क्लास में संस्कृत पढ़ी थी लेकिन फिर मुश्किल जानते हुए ड्राइंग चुन ली।

उसके बाद कई जगह संस्कृत को सुना और मन हुआ की इसे दोबारा पढ़ा जाए, मुझे श्लोक सारे आते थे लेकिन उनके मतलब नहीं जान पाता था। वर्कशाप के बाद संस्कृत के  बारे में काफी जानने को मिला।


वर्कशाप में 21 वर्षीय, सेक्टर 26 निवासी कुलदीप आर्य ने बताया कि स्कूल में 8वीं तक संस्कृत तो पढ़ी थी। मुझे अध्यात्म से जुड़ी किताबें पढ़ने का शौक है और इनमें ज्यादातर संस्कृत ही प्रयोग में लाई जाती है, वर्कशॉप की मदद से में संस्कृत अच्छे तरीके से पढ़ सकता हूं।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed