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टेगोर में सांग में निकला 'इच्छाधारी लाल बहार'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 09 Jul 2014 01:21 PM IST
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टैगोर थियेटर में सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ओर से आयोजित सात दिवसीय सांग उत्सव के तीसरे दिन सूरज बेदी द्वारा निर्देशित इच्छाधारी लाल बहार सांग का मंचन किया गया।
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सांग की कहानी है श्रीनगर के सिंह राजा की, जिनकी नगरी में जगमोहन नाम का गरीब ब्राह्मण रहता था, जिसे उसकी पत्नी घर से बाहर निकाल देती है। पंडित दुखी होकर जंगल में चला जाता है। वहां उसे एक जहरीला सांप मिलता है जैसे ही सांप जगमोहन को काटने आता है, वह बर्तन आगे कर देता है और सांप को बर्तन में बंद कर अपनी पत्नी को दे देता है।
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जब वह बर्तन खोलती है तो सांप की जगह वह नौ लाख का हार बन जाता है। यह बात राजा को पता चल जाती है, तो वह उस हार को मंगवा कर अपनी रानी को दे देता है, पर सुबह तक रानी देखती है कि उसका एक बच्चा बन जाता है, रानी उसका नाम लाल बहार रख देती है और कुछ ही दिनों में उसकी सगाई भी हो जाती है।
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जब लाल 8 साल का होता है तो राजा गुजर जाते हैं। तब वजीर सत्यानंद वहां का राजा बन जाता है और लाल बहार को जल्लादों के हवाले कर देता है। रानी किसी तरह लाल बहार को बचाकर वहां से ले जाती है और उसे उस शहर में ले जाती है जहां लाल बहार की सगाई हुई थी। वह लाल बहार को पढ़ने के लिए स्कूल में भेजती है।
वहां के राजा की बेटी (जिससे लाल की सगाई हुई है) भी उसी स्कूल पढ़ती है। राजा की बेटी कांता अपने पिता को लाल बहार के बारे में बताती है कि लाल बहार उसके साथ पढ़ता है। राजा लाल बहार को अपने सैनिक देकर अपनी राजधानी को छुड़ाने के लिए कहता है और अंत में लाल बहार अपनी राजधानी को छुड़ाकर वहां का राजा बन जाता है।