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वेतन घोटाला : चार और पुलिसकर्मी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेजे

Sat, 25 Nov 2023 02:10 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2023 02:10 AM IST
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Salary scam: Four more policemen arrested, sent to Budail jail in judicial custody
चंडीगढ़। यूटी पुलिस से जुड़े वर्ष 2019 के वेतन घोटाले मामले में चार और पुलिसकर्मी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। इनकी पहचान एएसआई मोहन सिंह, एएसआई कृष्ण कुमार, हवलदार अलविंदर सिंह और हवलदार मुकेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह चारों आरोपी उन 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों में शामिल थे जिन्हें वेतन घोटाले में लाभ मिला था। सूत्र बताते हैं कि इन पुलिस मुलाजिमों को इस घोटाले में प्रत्येक को पांच से सात लाख रुपये का लाभ पहुंचा था। शुक्रवार को अदालत में पेश कर चारों को बुड़ैल जेल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इन आरोपियों ने इनके खातों में आई अतिरिक्त रकम को वापस भी नहीं किया था। इस मामले में नौ पुलिसकर्मी पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं। बीते अक्तूबर में एक पूर्व सीनियर कांस्टेबल नाभा साहिब, पटियाला निवासी जसबीर सिंह (53) गिरफ्तार हुआ था। उसने वीआरएस ले ली थी। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने 25 फरवरी 2020 को इस मामले में आईपीसी की धारा 201, 409, 420, 467, 468, 471, 477ए, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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दरअसल, कागजों में घपलाबाजी कर कुछ पुलिसकर्मियों के खातों में ज्यादा तनख्वाह डालकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया था। पुलिस विभाग के खाता विभाग में कार्यरत मुलाजिमों के सहयोग से यह फर्जीवाड़ा किया गया। पुलिस ने इस मामले में इसी वर्ष अप्रैल माह में एएसआई विनोद कुमार और कांस्टेबल राजबीर सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। इससे पहले तीन चार्जशीट और दायर की जा चुकीं हैं। लगभग 1.1 करोड़ रुपये के इस वेतन घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। आरोपियों में बलविंदर कुमार, हवलदार नरेश कुमार, वरिंदर कुमार व कांस्टेबल सविंदर आदि शामिल थे।
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वर्ष 2020 में एक अज्ञात शिकायत मिलने के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जांच में खुलासा हुआ था कि दिसंबर 2019 के वेतन में कई मुलाजिमों के खातों में तय वेतन से ज्यादा पैसे डाले गए थे। इस खुलासे के बाद अपराध शाखा को मामले की जांच सौंपी गई थी और पुलिस विभाग की प्रार्थना पर कैग द्वारा वर्ष 2015 से 2020 का विशेष ऑडिट किया गया था। इसमें 1.1 करोड़ रुपये का घपला सामने आया था। वाहन भत्ता और राशन/फूड भत्ता आदि की फर्जी एंट्री कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था।
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