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Hindi News ›   Chandigarh ›   Salary not received for two months, it is difficult to raise bread, distressed maids working in homes without money

दो माह से नहीं मिली सैलरी, रोटी जुटाना मुश्किल, बिना पैसे के घरों में काम करने वाली मेड परेशान

Sun, 10 May 2020 02:18 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 10 May 2020 02:18 AM IST
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Salary not received for two months, it is difficult to raise bread, distressed maids working in homes without money
चंडीगढ़। लॉकडाउन के चलते घरों में काम करने वाली मेड को सैैलरी न मिलने से उन्हें आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना कमाकर खाने वाले ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी मालिकों से अपील की थी कि कोई भी इनकी तनख्वाह न रोकें और मकान मालिक उनसे किराया न मांगें।
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मानवता के लिए उन्होंने मालिकों से यह अपील की थी लेकिन उसके बाद भी छोटे तबके के लोगों की सहायता नहीं हो पा रही है। घरों में काम करने वाली कई मेड ने बताया कि उन्हें पिछले दो महीने की तनख्वाह नहीं मिली है। इस कारण वह अपने लिए खाना तक नहीं जुट पा रहे हैं। उनका कहना है कि मकान मालिक भी किराया मांग रहे हैं।
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ऐसे में वह बेघर होने की कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उनको 15 दिन का राशन दिया, अभी वही चल रहा है। उसके खत्म होने के बाद पता नहीं भरपेट खाना मिल भी पाएगा या नहीं।
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अपना घर समझकर करती थीं काम, लेकिन नहीं मिला वेतन
सेक्टर-44 बी के घरों में काम करने वाली गुड्डी ने कहा कि वह लगभग छह सालों से इन घरों में काम करती हैं। उन घरों के सदस्यों से उनका एक परिवार के मेंबर की तरह रिश्ता है, लेकिन उन्होंने भी वेतन देने से मना कर दिया। गुड्डी ने बताया कि उनके पति मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के चलते उन्हें कहीं मजदूरी नहीं मिल रही है। ऐसे में बहुत पेरशानी हो रही है। मकान मालिक किराया मांग रहा है। बिना राशन कार्ड के राशन भी नहीं मिल रहा है। मकान मालिक कभी भी उनको बाहर निकाल सकता है।
घर का खर्च न उठाने के कारण कर रही हैं खुद को बेबस महसूस
मेड सुनीता ने बताया कि उसके दो छोटे छोटे बच्चे हैं। उनको लेकर वह कहां जाएं। न तो उनके पास खाने के लिए राशन है और न ही मकान मालिक को देने के लिए किराया। ऐसे में वह खुद को बहुत बेबस महसूस कर रही हैं। यह कहते ही उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीने कुछ अच्छे लोगों की दया से वह अपने बच्चों का पेट भर पा रही हैं। उनकों पिछले दो महीने की सैलरी नहीं मिली है। वह सेक्टर-45 में किराए के मकान में रह रहीं हैं।

भविष्य के बारे में सोच कर लगता है डर
गरीब की मजबूरी को कोई नहीं समझ सकता यह कहना है मेड शब्बो का। उन्होंने कहा कि जिन घरों में वह काम करती थी वह पैसे देने के लिए तैयार नहीं, मकान मालिक किराया माफ करने के लिए तैयार नहीं और डिपो वाले बिना राशन कार्ड के राशन देने को तैयार नहीं। ऐसे में गरीब आदमी के पास क्या विकल्प है। वह खुद तो जैसे तैसे संभाल सकता है, लेकिन छोटे-छोटे बच्चों को भूख से तड़पते नहीं देखा जा सकता। हम बहुत बेबस हैं। अभी तक तो जैसे तैसे करके चल रहा है लेकिन आगे के बारे में सोचकर डर लगता है।
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