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Hindi News ›   Chandigarh ›   Salaries of Municipal Corporation employees posted in Punjab adjoining Chandigarh reduced to half

ये नाइंसाफी है: पंजाब में तैनात चंडीगढ़ निगम के 70 कर्मचारियों का वेतन हुआ ‘आधा’, 20 साल बाद जागा ऑडिट विभाग

Tue, 23 Aug 2022 04:43 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 23 Aug 2022 04:43 PM IST
सार

ऑडिट विभाग के अनुसार, अन्य राज्यों के कर्मचारी जो चंडीगढ़ में तैनात हैं उन्हें चंडीगढ़ का डीसी रेट मिलता है, जबकि यहां के जो कर्मचारी अन्य राज्यों में हैं, उन्हें वहां का डीसी रेट मिलता है।

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Salaries of Municipal Corporation employees posted in Punjab adjoining Chandigarh reduced to half
Municipal Corporation office Chandigarh - फोटो : File Photo

विस्तार

चंडीगढ़ के साथ लगते पंजाब के इलाकों में तैनात नगर निगम के कर्मचारियों की तनख्वाह घटाकर लगभग आधी कर दी गई है। ऐसा ऑडिट विभाग की आपत्ति के बाद हुआ है। पहले इन कर्मचारियों को चंडीगढ़ डीसी रेट पर वेतन मिल रहा था। अब दो माह से पंजाब डीसी रेट से वेतन दिया जा रहा है। इससे कर्मचारी रोष में हैं। 

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नगर निगम के ऑडिट विभाग की नींद लगभग 20 साल बाद खुली और पत्र जारी कर कहा कि नियमानुसार जो कर्मचारी जहां तैनात होता है, उसे वहीं का डीसी रेट दिया जाता है। इसके बाद मोहाली में आने वाले कजौली वाटर वर्क्स और एसटीपी पर तैनात कर्मचारियों के वेतन को घटाने की कवायद शुरू हो गई। दो माह से डिग्गियां स्थित एसटीपी पर तैनात 42 कर्मचारियों का वेतन घटकर आ रहा है। अगस्त माह से कजौली और जंडपुर में तैनात 28 कर्मचारियों का वेतन भी इसी तरह कटकर आएगा। 
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17 साल से 25 साल तक के कार्यकाल के बाद नगर निगम कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के बजाय घटा रहा है। पंप ऑपरेटरों का वेतन 19702 रुपये था। पीएफ व अन्य भत्ते काटकर उन्हें 17702 रुपये मिलते थे लेकिन अब उन्हें 10800 रुपये मिल रहे हैं। वहीं सहायकों का वेतन पहले 15000 रुपये था और हाथ में 13900 रुपये आते थे। उन्हें अब 9102 रुपये मिल रहे हैं। 
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ऑडिट विभाग के अनुसार, अन्य राज्यों के कर्मचारी जो चंडीगढ़ में तैनात हैं उन्हें चंडीगढ़ का डीसी रेट मिलता है, जबकि यहां के जो कर्मचारी अन्य राज्यों में हैं, उन्हें वहां का डीसी रेट मिलता है। ऑडिट विभाग ने पत्र में कहा है कि कर्मचारी किस विभाग का है या उसकी नियुक्ति करने वाला किस राज्य का है डीसी रेट उसके हिसाब से नहीं दिया जा सकता। कर्मचारी का कार्यक्षेत्र ही उसके वेतन का डीसी रेट तय करता है।

पहले कंपनी ने मारा, अब विभाग दबा रहा

ठेके पर लगे कर्मचारियों का कहना है कि पहले कंपनी ने प्रशासन के अनुसार 7 प्रतिशत वेतन वृद्धि के नियम को नहीं माना, मामला अब तक लंबित है। हमें साल में एक माह का अतिरिक्त वेतन मिलता है, जो अब तक नहीं मिला है। यह मामला भी लंबित है। इन समस्याओं से अभी उबर नहीं पाए थे कि विभाग और दबा रहा है। वेतन घटाए जाने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि हमने काफी सामान किस्तों पर लिया है, वेतन कम होने से मुसीबत खड़ी हो गई है। इतने सालों तक ऑडिट विभाग ने इस समस्या को क्यों नहीं पकड़ा।

मेयर ने गृहमंत्री को भी दी चिट्ठी, कहा-बने पॉलिसी 

मेयर सरबजीत कौर ने बताया कि कर्मचारी अपनी समस्या लेकर मेरे पास आए थे। कुछ दिन बाद गृहमंत्री अमित शाह की ओर से चंडीगढ़ की समस्याओं के संबंध में चर्चा करने के लिए मुझे बुलाया गया था। मैंने वहां इन कर्मचारियों सहित कई अन्य कर्मचारियों का भी मुद्दा उठाया था। मैंने कहा था कि जब कर्मचारी 35 साल से ज्यादा का होता है तो उसे निकाल दिया जाता है या उसका वेतन कम हो जाता है। यह स्थिति ठीक नहीं है, इस उम्र में वह कहां जाएगा। इसके लिए एक पॉलिसी बने जो आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी भी सुनिश्चित करे। 


 

इस संबंध में हम सदन में भी मुद्दा उठाएंगे। कर्मचारियों के साथ यह नाइंसाफी है। सालों तक नियम याद नहीं आए और अब अचानक यह निर्णय लेना ठीक नहीं है। इस संबंध में जल्द प्रशासक और उनके सलाहकार से भी मिलेंगे। - सरबजीत कौर, मेयर

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