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एक जिंदगी जाने के बाद सेफ्टी उपकरण खरीदने की आई याद
ब्यूरो, चंडीगढ़, अमर उजाला
Updated Thu, 02 Jun 2016 10:11 AM IST
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सीवरेज सफाई करने गए युवक की मौत
- फोटो : amar ujala file
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सीवरमैन की मौत के बाद नगर निगम को अब सेफ्टी उपकरण खरीदने की याद आई है। नगर निगम ने सेफ्टी उपकरण खरीदने के लिए बुधवार को 26 लाख 94 हजार रुपये का टेंडर निकाला है। निगम के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी 10 जून तक अपनी बिड दे सकती है। मालूम हो कि 26 जून को एयरपोर्ट के पास सीवरेज साफ करते समय एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। उस कर्मचारी के पास सेफ्टी उपकरण नहीं थे। इस कर्मचारी के परिवार को नगर निगम ने 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। इससे पहले भी पिछले साल तीन सीवरमैन की मौत बिना सुरक्षा उपकरणों के कारण हो चुकी है।
मिथेन और कार्बन डाईऑक्साइड गैस होती है सीवरेज में मौत
जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जो सीवरेज के मेनहोल काफी दिन से बंद हैं, उनमें मिथने और कार्बन डाई आक्साइड (सीओ 2) गैस होती है जो कि काफी खतरनाक होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जब किसी मेनहोल की सफाई करनी होती है तो उसके और आसपास के 4 से 5 मेनहोल के ढक्कनों को खोला जाता है।
ताकि दोनों ओर से गैस निकल जाए। इसके बाद कर्मचारी एक मोमबत्ती जलाकर बाल्टी में रखकर मेनहोल के नीचे भेजा जाता है। अगर मोमबत्ती बुझ जाती है तो इसका मतलब है कि अभी भी सीओ 2 और मिथेन गैस है, अगर मोमबत्ती जलती रहती है तो इसका मतलब नीचे ऑक्सीजन गैस है और कर्मचारी मेनहोल में सफाई के लिए उतर सकता है। एक ठेकेदार के अनुसार अब तो गैस की जांच के लिए अलग से भी उपकरण आ गए हैं।
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सीवरमैन की संख्या कम: कृष्ण चड्ढा
सफाई कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चड्ढा का कहना है कि किसी भी सीवरमैन को काम के समय में न तो मास्क दिए जाते हैं और न ही मेनहोल के भीतर जाने पर ऑक्सीजन सिलेंडर दिए जाते है। उनका कहना है कि सीवरमैन की काफी कमी है। इस समय जनसंख्या के अनुसार 600 से ज्यादा रेगुलर सीवरमैन होने चाहिए थे।
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मिथेन और कार्बन डाईऑक्साइड गैस होती है सीवरेज में मौत
जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जो सीवरेज के मेनहोल काफी दिन से बंद हैं, उनमें मिथने और कार्बन डाई आक्साइड (सीओ 2) गैस होती है जो कि काफी खतरनाक होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जब किसी मेनहोल की सफाई करनी होती है तो उसके और आसपास के 4 से 5 मेनहोल के ढक्कनों को खोला जाता है।
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ताकि दोनों ओर से गैस निकल जाए। इसके बाद कर्मचारी एक मोमबत्ती जलाकर बाल्टी में रखकर मेनहोल के नीचे भेजा जाता है। अगर मोमबत्ती बुझ जाती है तो इसका मतलब है कि अभी भी सीओ 2 और मिथेन गैस है, अगर मोमबत्ती जलती रहती है तो इसका मतलब नीचे ऑक्सीजन गैस है और कर्मचारी मेनहोल में सफाई के लिए उतर सकता है। एक ठेकेदार के अनुसार अब तो गैस की जांच के लिए अलग से भी उपकरण आ गए हैं।
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सीवरमैन की संख्या कम: कृष्ण चड्ढा
सफाई कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चड्ढा का कहना है कि किसी भी सीवरमैन को काम के समय में न तो मास्क दिए जाते हैं और न ही मेनहोल के भीतर जाने पर ऑक्सीजन सिलेंडर दिए जाते है। उनका कहना है कि सीवरमैन की काफी कमी है। इस समय जनसंख्या के अनुसार 600 से ज्यादा रेगुलर सीवरमैन होने चाहिए थे।