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Punjab: श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल, बंद लिफाफे में सौंपा अपना जवाब

Wed, 24 Jul 2024 03:02 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 24 Jul 2024 03:02 PM IST
सार

श्री अकाल तख्त साहिब ने 15 जुलाई को अकाली दल के बागी गुट के माफीनामे को आधार मानते हुए सुखबीर बादल को 15 दिन में पक्ष रखने का समय दिया था। 

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SAD chief Sukhbir Badal goes to Sri Akal Takht Sahib in Golden Temple
जत्थेदार ज्ञानी रघुवीर सिंह को अपना स्पष्टीकरण सौंपते सुखबीर बादल। - फोटो : संवाद

विस्तार

 शिअद बादल के प्रधान सुखबीर बादल ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के समक्ष निजी तौर पर एक निमाणे सिख के रूप में पेश होकर, उन्हें बंद लिफाफे में अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सुखबीर बादल की ओर से सौंपे गए स्पष्टीकरण के संबंध में कहा कि बंद लिफाफे में सुखबीर सिंह बादल द्वारा सौंपे गए स्पष्टीकरण को लेकर पांच तख्तों के सिंह साहिबान की निकट भविष्य में होने वाली बैठक में विचार विमर्श करके अलग कार्रवाई की जाएगी।

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सुखबीर बादल बुधवार बाद दोपहर 1:20 बजे श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे। श्री हरिमंदिर में माथा टेकने के बाद वह श्री अकाल तख्त साहिब पर माथा टेकने के लिए गए। इसके बाद सुखबीर श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में जत्थेदार रघबीर सिंह के समक्ष पेश होने के लिए गए। इस दौरान उन्होंने बंद लिफाफे में बागी अकालियों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह को सौंपा। करीब 15 मिनट वह श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में ज्ञानी रघबीर सिंह के साथ रहे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। अकाल तख्त के जत्थेदार के साथ मुलाकात करने के बाद मीडिया के साथ बना कोई बात किए सुखबीर बादल वापस चले गए। इस दौरान उनके साथ पूर्व अकाली मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा, पूर्व मंत्री बलविंदर सिंह भूंदड़ भी मौजूद थे।

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मामले के संबंध में अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सुखबीर बादल ने स्पष्टीकरण क्या दिया है, इसमें क्या लिखा है, इस संबंध में अभी वह कोई भी जवाब नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि स्पष्टीकरण बंद लिफाफे में है। स्पष्टीकरण वाले इस बंद लिफाफे को पांच तख्तों के सिंह साहिबान की आगामी होने वाली बैठक में ही खोला जाएगा। वहां पर सभी सिंह साहिब के समक्ष इस मुद्दे पर विचार कर अगली कार्रवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि एक जुलाई को बागी अकालियों ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को ज्ञापन सौंपा था कि अकाली दल के कार्यकाल में गंभीर पंथक गलतियां हुई हैं, इसलिए वह भी इसमें दोषी है। वह अपनी गलती स्वीकार करते हैं कि उन्होंने मौके पर हो रही गलतियों के दौरान आवाज नहीं उठाई। इसलिए अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार जब भी उनको अकाल तख्त साहिब पर तलब करके जो भी धार्मिक सजा सुनाएंगे वह उस सजा को स्वीकार करेंगे। इसके बाद 15 जुलाई को पांच सिंह साहिब ने इस पत्र पर विचार करते हुए अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी 15 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर अपने स्पष्टीकरण देने के लिए आदेश जारी किए थे। 

एसजीपीसी के अध्यक्ष धामी ने भी 90 लाख के विज्ञापनों के संबंध में बंद लिफाफे में अलग से सौंपा जत्थेदार को स्पष्टीकरण

पांच सिंह साहिबान द्वारा 15 जुलाई को आयोजित बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को भी डेरा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को माफी देने के बाद उनके समर्थन में विभिन्न समाचार पत्रों में एसजीपीसी द्वारा उस समय दिए गए 90 लाख रुपये के विज्ञापनों संबंधी भी स्पष्टीकरण मांगा गया था। एसजीपीसी की ओर से भी इस संबंधी एसजीपीसी का स्पष्टीकरण बंद लिफाफे में अकाल तख्त के जत्थेदार रघबीर सिंह को सौंपा गया। धामी ने कहा कि यह पंथ का धार्मिक मुद्दा है, इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। बेशक साल 2015 में हुए उक्त घटनाक्रम के दौरान एसजीपीसी के पूर्व प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ प्रधान थे, लेकिन जत्थेदार के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने जत्थेदार को बंद लिफाफे में जवाब सौंप दिया है। इस संबंध में सिंह साहिब जो भी फैसला लेंगे वह स्वीकार होगा।

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