हरियाणा चुनाव में शिअद का HSGMC कार्ड
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की सिख वोटरों पर खास नजर है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) का मुद्दा जोर-शोर से उछल रहा है। वहीं, सिख बाहुल्य हलकों पर राजनीतिक दल खास फोकस कर रहे हैं।
भाजपा, इनेलो-शिअद और कांग्रेस सहित अन्य दलों की ओर से सिख बाहुल्य हलकों में पार्टी के खास चेहरे व सिख नेताओं को उतार कर पंथक मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
शिअद की ओर से सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल, अध्यक्ष सुखबीर बादल, महासचिव बिक्रमजीत मजीठिया, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, मंत्री सिकंदर सिंह मलूका व डॉ. दलजीत सिंह चीमा, भाजपा नेता नवजोत सिंह सिद्धू, कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजिंदर कौर भट्ठल सरीखे बड़े नाम हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों में प्रचार करके सिख वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
शिअद का प्रचार एचएसजीएमसी पर आधारित
इस दौरान एचएसजीएमसी का मुद्दा गर्माया है। शिअद नेताओं का प्रचार मुख्य रूप से इसी मुद्दे पर आधारित है। वह अन्य मसलों को भी उठा रहे हैं, लेकिन एचएसजीएमसी एक ऐसा मामला है जो कि सिखों से सीधा जुड़ा है।
एचएसजीएमसी को लेकर कांग्रेस और शिअद के बीच सीधा टकराव है। प्रचार के दौरान दोनों के बीच इस मसले पर परस्पर विरोधी बयानबाजी जारी है।
शिअद नेता अलग शिरोमणि कमेटी के गठन पर सिख पंथ को बांटने की बात कहते हुए कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं, तो कांग्रेस एचएसजीएमसी के जरिए सिखों को अधिकार देने का प्रचार करते हुए सिख वोटरों को लुभाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा के नवजोत सिद्धू अपने ही अंदाज में शिअद व कांग्रेस को आड़े हाथों ले रहे हैं। कुल मिलाकर अन्य बिरादरियों सहित सिख मतदाताओं को सभी पार्टियां विशेष महत्व दे रही हैं।
यहां है सिखों का प्रभाव
हरियाणा में सिख वोटरों का प्रभाव मुख्यत: अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, सिरसा के विधानसभा क्षेत्रों में अधिक माना जाता है। गुड़गांव और फरीदबाद क्षेत्रों में भी सिख आबादी की प्रभावशाली उपस्थिति है।
शिअद, कांग्रेस के विरोध में सहजधारी सिख पार्टी
सहजधारी सिख पार्टी ने हरियाणा चुनाव में शिअद और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवारों के विरोध की घोषणा की है। पार्टी अध्यक्ष डॉ. परमजीत सिंह राणू का कहना है कि एसजीपीसी में शिअद ने सहजधारियों का मताधिकार छीनने का हर संभव प्रयास किया तो हरियाणा में एचएसजीएमसी के गठन के वक्त कांग्रेस ने उन्हें यह अधिकार नहीं दिया। इसका खामियाजा दोनों ही पार्टियों को इस चुनाव में भुगतना पड़ेगा।