Punjab News: समान नागरिक संहिता के विरोध में अकाली दल, कहा- अपना रुख स्पष्ट करें CM भगवंत मान
चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि आप ने विभिन्न मामलों में फंसे अपने शीर्ष नेताओं को बचाने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ आदिवासियों के अधिकारों को भी छोड़ दिया है। इस मुद्दे पर पार्टी के घोर आत्मसमर्पण के लिए कोई अन्य स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है।
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। शिअद के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने आम आदमी पार्टी पर यूसीसी के संवेदनशील मुद्दे पर पंजाबियों को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उल्लेखनीय है कि आप ने बुधवार को यूसीसी को अपना सैद्धांतिक समर्थन दिया था। चीमा ने इसे सरासर पाखंड बताते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि आप आलाकमान ने अपनी पंजाब इकाई और मुख्यमंत्री को शामिल किए बिना देश में यूसीसी के कार्यान्वयन का समर्थन करने का निर्णय लिया है। यहां तक कि सिख समुदाय को भी विश्वास में नहीं लिया गया। इससे पता चलता है कि आप आलाकमान पंजाब में अपने मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य में धार्मिक संस्थाओं के प्रति कितना सम्मान रखता है।
चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि आप ने विभिन्न मामलों में फंसे अपने शीर्ष नेताओं को बचाने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ आदिवासियों के अधिकारों को भी छोड़ दिया है। इस मुद्दे पर पार्टी के घोर आत्मसमर्पण के लिए कोई अन्य स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है।
उन्होंने यह दावा करके यूसीसी की आवश्यकता को उचित ठहराने के लिए आप सांसद संदीप पाठक की भी निंदा की कि संविधान के अनुच्छेद 44 में इसके लिए प्रावधान था। उन्होंने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि यूसीसी को समवर्ती सूची में रखा गया था।
आनंद कारज एक्ट भी हो जाएगा खारिज
चीमा ने मुख्यमंत्री से कहा कि आप आनंद कारज एक्ट का प्रचार कर रहे हैं लेकिन इसे भी यूसीसी में खारिज कर दिया जाएगा। इसके अलावा, विरासत, विवाह और तलाक कानूनों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों और आदिवासी समुदायों के अधिकार प्रभावित होंगे। इससे समाज में उथल-पुथल मच जाएगी, जो देश के हित में नहीं है। देश में यूसीसी के कार्यान्वयन से अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।