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टैगोर में सांग फेस्टः 'नरसी का भात' में दिखा कंजूस सेठ का दान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Jun 2016 08:24 PM IST
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चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में सांग फेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर 18 स्थित टैगोर थिएटर में आयोजित सांग उत्सव में रविवार को नरसी का भात सांग पेश किया गया। आठ दिवसीय सांग उत्सव का आयोजन सूचना जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा की ओर से किया जा रहा है। धर्मबीर सांगी की रचना और निर्देशन में यह सांग पेश किया गया।
कहानी में एक कंजूस सेठ होता है जिसे भगवान पर भरोसा नही होता। उसकी एक लड़की हरनंदी होती है। सेठ जी गंगा नदी नहाने जाते है, जहां उन्हें एक ब्राह्राण मिलता है जो कहता है कि पहले दान करो फिर स्नान करो। सेठ इंकार कर देता है और नहाता नही। कृष्ण भगवान उसे पकड़ लेते है दान किए बगैर नहाने नही दिया जाएगा।
इस पर सेठ कहता कि मेरा पास तो कुछ भी नही। भगवान कहते है कि मुझे पता है तेरे पास करोड़ों की माया है। इतना सुनते ही सेठ कहता है कि मैं घर जाकर एक पाई दान कर दूंगा। भगवान उसके घर पहुंच जाते है। लेकिन सेठ बिमार होने का ढ़ोग करने लगता है। इस पर कृष्ण भगवान उसे नरसी माया दिखाते है। जिससे उसे नफरत हो जाती है और वह अपनी करोड़ो की माया दान कर देता हैं।
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कहानी में एक कंजूस सेठ होता है जिसे भगवान पर भरोसा नही होता। उसकी एक लड़की हरनंदी होती है। सेठ जी गंगा नदी नहाने जाते है, जहां उन्हें एक ब्राह्राण मिलता है जो कहता है कि पहले दान करो फिर स्नान करो। सेठ इंकार कर देता है और नहाता नही। कृष्ण भगवान उसे पकड़ लेते है दान किए बगैर नहाने नही दिया जाएगा।
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इस पर सेठ कहता कि मेरा पास तो कुछ भी नही। भगवान कहते है कि मुझे पता है तेरे पास करोड़ों की माया है। इतना सुनते ही सेठ कहता है कि मैं घर जाकर एक पाई दान कर दूंगा। भगवान उसके घर पहुंच जाते है। लेकिन सेठ बिमार होने का ढ़ोग करने लगता है। इस पर कृष्ण भगवान उसे नरसी माया दिखाते है। जिससे उसे नफरत हो जाती है और वह अपनी करोड़ो की माया दान कर देता हैं।
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