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प्रद्युमन हत्याकांडः आरोपी को हाईकोर्ट से नहीं मिली कोई राहत, कई नए सच आए सामने
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 06 Jun 2018 02:25 PM IST
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pradyuman murder case
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुग्राम के बहुचर्चित प्रद्युमन हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली, वहीं कई नए सच सामने आए हैं। मासूम प्रिंस की गला रेत कर हत्या करने वाले आरोपी छात्र की जमानत की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। गुरुग्राम जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से जमानत याचिका खारिज होने पर आरोपी के परिजनों ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई कोर्ट को बताया गया था कि आरोपी भोलू जुवेनाइल किस मनोवृति का था? वह अश्लील फिल्में देखता था। जहर को लेकर कई तरह की सर्च भोलू ने की थी। सबूत मिटाने को लेकर नेट पर भी सर्च की थी ।
गुरुग्राम कोर्ट ने कर दी थी याचिका खारिज
याचिका में दावा है कि छात्र अभी नाबालिग है और उसके साथ नाबालिगों जैसा ही व्यवहार करना चाहिए। हालांकि सीबीआई इस मामले में छात्र को बालिग के हिसाब से देखती है और उसने कोर्ट में भी इसकी याचिका लगाई थी। इसके बाद ही गुरुग्राम कोर्ट ने आरोपी भोलू की सुनवाई व्यस्क व्यक्ति के तौर पर करने के बाद अपना फैसला सुनाया था।
परिजनों की याचिका पर कोर्ट ने बदले आरोपी के नाम
बताते दें कि परिजनों ने कोर्ट में ये भी गुहार लगाई थी कि मीडिया में आरोपी और मृतक का असली नाम प्रकाशित न किया जाए। इससे आरोपी की पहचान होती है जिसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकारते हुए मृतक को प्रिंस और आरोपी को भोलू नाम दिया।
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दो बार जमानत हो चुकी है खारिज
बचाव पक्ष के अधिवक्ता से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी के परिजनों ने जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड में दो बार जमानत याचिका दायर की गई थी लेकिन दोनों बार ही जस्टिस बोर्ड ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया था। जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी के मामले को संगीन बताते हुए इस मामले की सुनवाई वयस्क आरोपी के रुप में करने की स्वीकृति देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय भेज दिया था।
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गुरुग्राम कोर्ट ने कर दी थी याचिका खारिज
याचिका में दावा है कि छात्र अभी नाबालिग है और उसके साथ नाबालिगों जैसा ही व्यवहार करना चाहिए। हालांकि सीबीआई इस मामले में छात्र को बालिग के हिसाब से देखती है और उसने कोर्ट में भी इसकी याचिका लगाई थी। इसके बाद ही गुरुग्राम कोर्ट ने आरोपी भोलू की सुनवाई व्यस्क व्यक्ति के तौर पर करने के बाद अपना फैसला सुनाया था।
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परिजनों की याचिका पर कोर्ट ने बदले आरोपी के नाम
बताते दें कि परिजनों ने कोर्ट में ये भी गुहार लगाई थी कि मीडिया में आरोपी और मृतक का असली नाम प्रकाशित न किया जाए। इससे आरोपी की पहचान होती है जिसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकारते हुए मृतक को प्रिंस और आरोपी को भोलू नाम दिया।
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दो बार जमानत हो चुकी है खारिज
बचाव पक्ष के अधिवक्ता से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी के परिजनों ने जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड में दो बार जमानत याचिका दायर की गई थी लेकिन दोनों बार ही जस्टिस बोर्ड ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया था। जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी के मामले को संगीन बताते हुए इस मामले की सुनवाई वयस्क आरोपी के रुप में करने की स्वीकृति देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय भेज दिया था।