मानसून सत्र: बिना चर्चा विधेयक पारित कराने पर हंगामा, कांग्रेस-इनेलो का वॉकआउट
- कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल हटाने, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा न करने का किया विरोध
- इनेलो विधायक अभय चौटाला ने भी उठाए सवाल, स्पीकर से हुई बहस
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हरियाणा विधानसभा का एकदिवसीय मानसून सत्र हंगामेदार रहा। बिना चर्चा के संशोधन विधेयकों को पारित कराने पर कांग्रेस और इनेलो विधायकों ने खूब हंगामा किया। जरूरी विधेयक ही सदन में पेश करने की मांग कर रहे विपक्ष की सुनवाई न होने पर कांग्रेस और इनेलो सदन से वाकआउट कर गए। कुछ देर बाद विधायक दोबारा सदन में उपस्थित हुए।
मानसून सत्र की कार्यवाही शोक प्रस्ताव पढ़ने के साथ शुरू हुई। इसके बाद जैसे ही कार्यवाहक स्पीकर रणबीर गंगवा ने प्रश्नकाल व ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को कार्यवाही से हटाने का प्रस्ताव रखा, कांग्रेस विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया। स्पीकर ने जानकारी दी कि सवालों के जवाब सदन पटल पर रख दिए गए हैं, इन पर मौखिक चर्चा नहीं होगी।
इन्हें संबंधित विधायकों को भेज दिया जाएगा। इनेलो विधायक अभय चौटाला के रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार व शिशु मृत्यु दर के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं की जाएगी, जवाब सदन पटल पर रख दिया है। जिसका अभय ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि वे जवाब से संतुष्ट नहीं हैं।
कार्यवाहक स्पीकर ने कहा, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने यह फैसला लिया है, उसमें नेता प्रतिपक्ष मौजूद थे। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि कोरोना के कारण विपरीत हालात में सत्र हो रहा है। विधायकों को अनेक मुद्दे उठाने होते हैं लेकिन कोरोना से सीएम, स्पीकर समेत 9 विधायक ग्रसित हैं। इसलिए एडवाइजरी कमेटी के फैसले को माना जाए।
कांग्रेस विधायकों के शोर शराबा करने पर विज ने कहा कि पहले यह कह दो, भूपेंद्र हुड्डा को वे अपना नेता नहीं मानते। कांग्रेस विधायक इसके बावजूद शांत नहीं हुए। स्पीकर ने बीच में हस्तक्षेप किया पर कांग्रेस विधायक नाराजगी जताते रहे। नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने कहा कि सीएम समेत हमारे कई साथी संक्रमित हैं। अनेक कर्मचारी भी चपेट में। सदन में कई मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकती। भ्रष्टाचार समेत अनेक मुद्दे थे। उन पर भी बहस होना जरूरी थी, जो नहीं हो पाएगी। जरूरी बिल व संशोधन विधेयक ही सदन पटल पर रखे जाएं।
कोरोना से कोई मरा नहीं जा रहा, चर्चा कराई जाए
अभय चौटाला ने कहा कि प्रश्नकाल होना चाहिए। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर भी चर्चा हो। कोरोना से कोई मरा नहीं जा रहा। सबकी जांच हुई है, उसके बाद ही सदन में आए हैं। उनके ध्यानाकर्षण पर चर्चा अगले सत्र में कराई जाए। भूपेंद्र हुड्डा ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव ऐसे ही रखे जाएं, उन्हें निरस्त न किया जाए।
इस पर स्पीकर ने कहा कि ऐसा ही होगा प्रस्ताव रद्द नहीं होंगे, भविष्य में बुलाए जाने वाले सत्र में इन पर चर्चा कराएंगे। चौटाला ने कहा कि पुरानी परंपरा खत्म कर दी गई। पहले बैठक में हर दल से नेता बुलाए जाते थे, निर्दलीय विधायक भी शामिल होते रहे। इस बार तो सत्ता पक्ष व नेता प्रतिपक्ष ने ही तय कर लिया कि सदन कैसे चलाना है। जब चर्चा नहीं करनी है तो क्या हस्ताक्षर के लिए ही 300 किलोमीटर दूर से विधायकों को बुलाया है। छह महीने से प्रदेश में लूट मची है, दो बड़े घोटाले हुए, उन पर चर्चा होनी चाहिए थी।
सत्र के लिए जुटे 700 लोग, खतरे में नहीं डाल सकते जान
कार्यवाहक स्पीकर रणबीर गंगवा ने कहा कि सत्र के लिए विधायक, अधिकारियों व कर्मचारियों समेत कुल 700 लोग जुटे हैं। कोरोना के विपरीत समय में ज्यादा समय तक इतने लोग कुछ क्षेत्र में नहीं रह सकते। इसलिए सत्र को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने एक ही दिन तक सीमित किया है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले से ही चलेगा सदन
संसदीय कार्य मंत्री कंवर पाल ने कहा कि विपक्ष ने अपने नेता पर ही सवाल खड़े किए हैं। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में सबने मिलकर निर्णय लिया। पहले भी कमेटी के निर्णय से ही सदन चलता रहा। अब भी वैसे ही चलेगा, अगर हुड्डा बैठक में विरोध जताते तो हम सदन चलाने को तैयार थे।
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