हरियाणा : कोरोना पॉजिटिव का दोबारा नहीं होगा टेस्ट, स्वस्थ व्यक्ति बिना जांच कर सकेंगे अंतरराज्यीय यात्रा
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कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग को अनुकूल बनाने को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत अब एक बार पॉजिटिव मिल चुके व्यक्ति का दोबारा टेस्ट नहीं होगा। साथ ही ठीक होने के बाद डिस्चार्ज के समय भी टेस्ट की कोई जरूरत नहीं है।
स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से सभी सिविल सर्जन को भेजे पत्र में आईसीएमआर की गाइडलाइन का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लैब पर बोझ बढ़ रहा है और लैब कर्मचारी भी संक्रमित हो रहे हैं। अधिक से अधिक लोगों का टेस्ट हो सके, इसके लिए अतिरिक्त दवाब को कम करना है।
साथ ही अंतरराज्यीय यात्रा करने वाले स्वस्थ व्यक्ति को आरटीपीसीआर टेस्ट की जरूरत नहीं है। लक्षण वालों लोगों को इंटर स्टेट जाने से बचना होगा, ताकि संक्रमण न फैले। वहीं जिन लोगों को लक्षण नहीं हैं, उनको कोविड प्रोटोकाल का पालन करना होगा। टेस्टिंग बढ़ाने के लिए मोबाइल टेस्टिंग भी शुरू की गई है।
विशेषज्ञ समिति की अनुमति के बाद ही मिलेगा टोसिलिजुमैब इंजेक्शन
हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि कोविड अस्पतालों को टोसिलिजुमैब इंजेक्शन विशेषज्ञ समिति की अनुमति के बाद ही मिलेगा। इस इंजेक्शन के लिए कोविड अस्पतालों को विशेषज्ञ समिति के पास ई-मेल पर आग्रह करना होगा। आवेदन प्रोफार्मा के अनुसार करना होगा और अधूरे एवं प्रोफार्मा के बिना भेजे गए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
तकनीकी समिति प्रतिदिन दो बार सुबह 10-11 बजे और शाम को 4-5 बजे वर्चुअल या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैठक करेगी। निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीएचएस), एमएसडी बैठक बुलाएंगे और तकनीकी समिति के साथ समन्वय स्थापित कर तेजी से निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे अनुमोदन से लेकर संबंधित अस्पताल में दवा की डिलिवरी व दवा के समग्र प्रबंधन की निगरानी भी करेंगे।
सीएमओ के पास जमा करानी होगी राशि
अनुमोदित आवेदक अस्पताल को इंजेक्शन की कीमत संबंधित सीएमओ के पास जमा करवानी होगी। दवा देने से इनकार करने के मामले में कारणों को लिखा जाएगा और अपेक्षित अस्पतालों व चिकित्सकों को सूचित किया जाएगा। इसके अलावा, डीएचएस (एमएसडी) रिकॉर्ड बनाए रखेंगे।
सभी सीएमओ दिन के दिन दवा जारी करना सुनिश्चित करेंगे और स्टोर रोजाना दिन-रात खुला रहेगा। अस्पतालों को इंजेक्शन से संबंधित उचित रिकॉर्ड रखना होगा। यदि टोसिलिजुमैब इंजेक्शन जारी कर दिया जाता है और बाद में मरीज की मौत हो जाती है, तो संबंधित अस्पताल मरीज को राशि की प्रतिपूर्ति करेगा और दवा को स्टॉक में रखेगा, ताकि अनुमोदन उपरांत भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके।