RSS प्रमुख ने बताया, भारत कैसे बनेगा विश्व गुरू?
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भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हम सबको काम करना होगा। भारत की गौरवशाली परंपरा रही है। इसलिए विश्व में भारत को बड़ा और शक्तिशाली होने की जरूरत है। युवाओं को संबोधित करते सर संघचालक ने कहा कि तरुणोदय शिविर में हम सब इसलिए जुटे हैं, क्योंकि सबका सपना भारत को परम वैभव पर ले जाना है।
यह तब पूरा होगा, जब हम सबसे पहले अपने भारत को जानें। केवल भौगोलिक स्थिति ही नहीं, अपितु उसकी अस्मिता के मूल स्रोत और उसकी वैज्ञानिक दृष्टि, सांस्कृतिक मूल्य और उज्ज्वल परंपरा को जानना होगा। इसी परंपरा में हमारा हर काम सत्यं, शिवम् सुंदरम् होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) के सर संघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने यह बात कही। भागवत ने कहा, जाति व्यवस्था और समाज में महिलाओं का गौण स्थान भारत की परंपरा नहीं है। देश में सदियों से महिलाओं का उच्च स्थान व जातिविहीन समाज की संरचना रही है। सांस्कृतिक रूप से हम सब एकसूत्र में बंधे हैं, जिसमें जाति का कहीं कोई स्थान नहीं है।
वे शनिवार को बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी परिसर में चल रहे तरुणोदय शिविर के दूसरे दिन युवाओं को संबोधित कर रहे थे। समन्वयवादी परंपरा के कारण ही हमने सभी क्षेत्रों में कीर्तिमान बनाए हैं। ज्ञान-विज्ञान, खेती,अध्यात्म से लेकर लौह स्तंभ और स्टेनलेस स्टील तक। वनवासी बंधुओं द्वारा बनाया जाने वाला स्टेनलेस स्टील उच्च कोटि का है, जिसका लोहा बड़ी-बड़ी कंपनियां भी मानती हैं। निजी स्वार्थ के चलते संघ में आने वाले व्यक्ति ज्यादा दिन संगठन में नहीं टिकते।
ह्वेनसांग की बताई कहानी
भागवत ने कहा कि हमने विश्व को ज्ञान दिया। इस ज्ञान को हर किसी तक पहुंचाने के लिए बलिदान भी दिया। जब ह्वेनसांग नाव में नालंदा विश्वविद्यालय से पुस्तकें लेकर चीन जा रहे थे, तब तूफान आ गया।
नाव चलाने वाले ने कहा कि नाव से कुछ भार कम करना पड़ेगा। ह्वेनसांग चिंतित दिखाई दिए तो उनके साथ जा रहे तीन भारतीयों ने जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी ताकि ज्ञान से भरी पुस्तकें चीन जा सकें और वहां के लोगों के काम आ सकें।
भारत माता का परिचय कराने में कितना समय
उन्होंने कहा, एक व्यक्ति का परिचय कराने के लिए यहां पर 15 सेकेंड लगे हैं। देश में 125 करोड़ जनता है, इस हिसाब से भारत माता का परिचय कराने के लिए कितना समय लगेगा, यह जानना जरूरी है।
भारत को जाने बिना इसके लिए काम कैसे होगा? उन्होंने कहा अर्थशास्त्र न मुनाफा कमाने का तंत्र है और न ही उपभोग को बढ़ावा देने का, बल्कि सभी का भरण पोषण हो, इसके लिए है।