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आरएसएस का पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा को खास मशविरा- सबको साथ लेकर चलो

Mon, 20 Jan 2020 02:30 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 20 Jan 2020 02:30 PM IST
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RSS Adviced Punjab BJP State President Ashwini Sharma
अश्वनी शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
अश्वनी शर्मा को दोबारा पंजाब भाजपा प्रदेश प्रधान बनाने में आरएसएस के तीन महारथियों का आशीर्वाद रहा, जिसे पार्टी हाईकमान टाल नहीं पाया। आरएसएस के तीनों दिग्गजों ने अश्वनी शर्मा को पास बैठाकर सलाह भी दी कि है कि पंजाब में अकेले चलो की राजनीति को खत्म कर सबको साथ लेकर चलो की राजनीति को दोबारा से लेकर आना है, क्योंकि पार्टी में गुटबाजी से हालात काफी खराब हैं और वर्कर अवसाद में हैं।
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दरअसल, अश्वनी शर्मा को 2010 में पंजाब के प्रधान बने थे तो पंजाब में शिरोमणि अकाली दल भाजपा की सत्ता थी। किसी को यकीन नहीं था कि 2012 में गठबंधन पंजाब में दोबारा सरकार रिपीट कर सकता है क्योंकि पंजाब का राजनीतिक इतिहास इस बात का साक्षी है कि पंजाब में लगातार दो बार किसी पार्टी की सरकार नहीं बनी। अश्वनी शर्मा ने वर्करों के बीच जाकर उनकी दिल की भड़ास को निकाला और सरकार विरोधी बातों को सुनकर सूबे में एंटी इनकंबेंसी को काफी हद तक खत्म किया और नतीजन भाजपा को को 23 में से 12 सीट हासिल हुई।
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अश्वनी शर्मा खुद भी चुनाव लड़कर विधायक बन गए। इसके बाद भाजपा में जबरदस्त गुटबाजी का आगाज हुआ और पार्टी का वोट बैंक पंजाब में लगातार गिरता गया। पीएम मोदी की लोकप्रियता को भी पंजाब की भाजपा भुना नहीं पाई। पार्टी में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला- मनोरंजन कालिया का गुट, तीक्ष्ण सूद और केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश का गुट, श्वेत मलिक-राकेश राठौर का गुट बन गया।
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कई नेताओं ने अपनी गोटियां फिट कर रखी थीं

पंजाब में भाजपा को दोबारा जिंदा करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक बनवीर कुमार, आरएसएस के दिग्गज कश्मीरी लाल खन्ना, आरएसएस के प्रांत के प्रचारक प्रमोद कुमार के बीच लगातार वार्ता हुई और तय किया गया कि किसी उस नेता को आगे लाया जाए, जो न केवल सारी गुटबाजी को खत्म करे, बल्कि भाजपा को दोबारा सूबे में जिंदा करे।

इसके लिए पूर्व प्रधान अश्वनी शर्मा के नाम पर जिक्र हुआ और फाइनल किया गया। हालांकि दिल्ली हाईकमान तक कई नेताओं ने अपनी गोटियां फिट कर रखी थी, जिसमें श्वेत मलिक दोबारा प्रधानगी की कुर्सी चाहते थे, जबकि मनोरंजन कालिया भी प्रधानगी की रेस में आगे चल रहे थे लेकिन संघ के तीनों दिग्गजों की तरफ से दिल्ली में भाजपा हाईकमान को जो नाम भेजा वो अश्वनी शर्मा का था, इसके बाद दिल्ली में बैठे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी प्रधान जेपी नड्डा ने भी कुछ नहीं बोला और अपनी मोहर लगा दी।

आरएसएस के नेता कश्मीरी लाल खन्ना पंजाब के प्रमुख रह चुके हैं और पंजाब की राजनीति पर अच्छी पकड़ है। बिग्रेडियर जगदीश गगनेजा से पहले पंजाब में आरएसएस समन्वय की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, इसी दौरान अश्वनी शर्मा को पंजाब की प्रधानगी मिली थी। तभी से आरएसएस अश्वनी शर्मा की गुड बुक में शामिल हो गये थे।
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