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सजावट से आगे बढ़ा ट्रेंड: कई हादसों के बाद बढ़ी चिंता, अब घरों की सुरक्षा पर निवेश कर रहे चंडीगढ़वासी

Tue, 05 May 2026 03:28 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 05 May 2026 03:28 PM IST
सार

चंडीगढ़ में अब 30 फीसदी से अधिक रिहायशी और कॉमर्शियल इमारतें बीमा के दायरे में आ चुकी हैं। अनुमान है कि एक लाख से ज्यादा मकानों का होम इंश्योरेंस हो चुका है। इनमें ज्यादातर शहर के बड़े मकान शामिल हैं।

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Rising Concerns Following Several Incidents Chandigarh Residents Now Investing in Home Security
House - फोटो : AdobeStock

विस्तार

महानगरों में आग और हादसों की बढ़ती घटनाओं ने घरों की सुरक्षा को लेकर लोगों की सोच बदल दी है। गाजियाबाद की 15 मंजिला इमारत में आग और नोएडा में एसी ब्लास्ट जैसी घटनाओं के बाद चंडीगढ़ में भी लोग अब केवल घर सजाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि उसकी सुरक्षा पर भी निवेश बढ़ा रहे हैं। शहर के सेक्टर-17, 22 व 34 समेत कई इलाकों में आगजनी की घटनाओं ने सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है।
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चंडीगढ़ में अब 30 फीसदी से अधिक रिहायशी और कॉमर्शियल इमारतें बीमा के दायरे में आ चुकी हैं। अनुमान है कि एक लाख से ज्यादा मकानों का होम इंश्योरेंस हो चुका है। इनमें ज्यादातर शहर के बड़े मकान शामिल हैं। पहले जहां इसे वैकल्पिक माना जाता था, वहीं अब यह जरूरत बनता जा रहा है।
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बीमा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत गृह रक्षा जैसी व्यापक योजनाएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं। ये पॉलिसियां न केवल भवन के ढांचे बल्कि घर के अंदर रखे कीमती सामान को भी कवर करती हैं। नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया जैसी सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि घर 30 से 45 दिनों से अधिक खाली रहता है और इसकी सूचना नहीं दी जाती तो क्लेम खारिज हो सकता है।
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इंश्योरेंस के जरूरी नियम

बीमा के लिए संपत्ति का वैध स्वामित्व जरूरी है। किरायेदार केवल सामान का बीमा करा सकते हैं। पक्के मकानों को प्राथमिकता दी जाती है जबकि निर्माणाधीन या खाली प्लॉट कवर नहीं होते। बीमा राशि बाजार मूल्य नहीं बल्कि पुनर्निर्माण लागत के आधार पर तय होती है।

चंडीगढ़ में होम इंश्योरेंस तेजी से बढ़ा है। कम प्रीमियम में बड़ा जोखिम कवर मिलता है। अब एक लाख से ज्यादा मकान बीमित हो चुके हैं। -मंदीप सिंह, इंश्योरेंस एडवाइजर

आज के समय में होम इंश्योरेंस जरूरत बन चुका है। लोग खुद आगे आकर सुरक्षा चाहते हैं, खासकर नए घरों में यह प्राथमिकता बन गया है। -राज नारायण यादव, इंश्योरेंस एडवाइजर


हम अपने प्रोजेक्ट्स में निर्माण के बाद इंश्योरेंस को अनिवार्य सलाह देते हैं। अब तक सौ से ज्यादा प्रोजेक्ट में अधिकतर ग्राहकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। -अनिल कुशवाहा, आर्किटेक्ट
 
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