अस्पताल से घर पहुंची रेवाड़ी गैंगरेप पीड़िता, अचानक बिगड़ी हालत, फिर कराया गया भर्ती
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कोसली क्षेत्र के एक गांव निवासी गैंगरेप पीड़िता को गुरुवार दोपहर को नागरिक अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद देर शाम को परिजन फिर से अस्पताल में ले आए। परिजनों ने कहा कि बच्ची अभी अस्वस्थ महसूस कर रही है, जिसके बाद उसको दोबारा अस्पताल लाया गया है। वहीं पीड़िता के दोबारा दाखिल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की तरफ से उसकी देखरेख के लिए दो चिकित्सकों के साथ महिला चिकित्सक भी ड्यूटी लगा दी गई है।
गुरुवार दोपहर को किया डिस्चार्ज
शहर के नागरिक अस्पताल में पिछले 15 दिनों से उपचाराधीन पीड़िता को गुरुवार दोपहर को परिजनों द्वारा लिखित रूप में देने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यह भी कहा गया था कि यदि किसी भी तरह की परेशानी हो तो वो दोबारा भी आ सकते हैं। दोपहर को डिस्चार्ज होने के बाद जैसे ही पीड़िता अपने गांव पहुंची तो शाम करीब साढ़े आठ बजे उसने अपने परिजनों को बताया कि वह अस्वस्थ महसूस कर रही है।
इसके बाद परिजनों ने पीड़िता की देखरेख के लिए नियुक्त की गई महिला चिकित्सक से बातचीत की और उन्होंने समस्या से अवगत कराया। इसके बाद महिला चिकित्सक ने उन्हें तुरंत छात्रा को वापस नागरिक अस्पताल में लेकर आने की बात कही। परिजन देर शाम पीड़िता को नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे और दाखिल कराया।
तीन दिन तक नियमित जांच के बाद किया गया डिस्चार्ज
छात्रा के शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पिछले तीन दिनों से लगातार इसकी नियमित जांच की जा रही थी। इसके बाद सभी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य होने के बाद परिजनों ने भी डिस्चार्ज किए जाने की मांग की। अस्पताल प्रशासन की ओर से तीन दिन के बाद पीड़िता को गुरुवार दोपहर को डिस्चार्ज किया गया।
दोपहर से शाम तक पीड़िता अपने घर में रही और इस अवधि में गांव की महिलाएं भी बड़ी संख्या में उससे मिलने पहुंच गई थी। इस दौरान सामान्यत: महिलाओं द्वारा उन पुरानी बातों का जिक्र किया गया, जिसके बाद पीड़िता को शाम के समय घबराहट महसूस होने लगी तो उसने परिजनों को अवगत कराते हुए कहा कि वह घर में असहज महसूस कर रही है और दोबारा अस्पताल जाने के लिए बोला। तत्पश्चात परिजनों ने मामले से पुन: अधिकारियों को अवगत कराया और उसको देर शाम पुन: अस्पताल में दाखिल करा दिया।
पीड़िता की लगातार तीन दिनों तक जांच की गई थी और अब वह फिजिकल रूप से बिल्कुल सही थी। परिजनों के अनुरोध पर ही हमने डिस्चार्ज किया था लेकिन उन्हें इस बात से भी अवगत करा दिया था कि कुछ भी परेशानी होने पर आप तुरंत वापस आ सकते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में पीड़िता पर मानसिक रूप से बहुत असर पड़ता है। बच्ची की मनोस्थिति अभी घर लायक नहीं है। अब दोबारा से काउंसिलिंग की जाएगी और इसके लिए फिजिशियन के साथ महिला चिकित्सक व काउंसलर की ड्यूटी लगा दी गई है। - डॉ. एके सैनी, एसएमओ, नागरिक अस्पताल