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सीएम खट्टर को इस चुनौती को देनी होगी मात

Mon, 27 Oct 2014 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 27 Oct 2014 10:25 AM IST
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Revenue Deficit, Rising Debt Huge Challenge for Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar

विशेषज्ञों का मानना है कि नई भाजपा सरकार के लिए पिछली सरकार द्वारा जारी लोकलुभावन योजनाओं- बुढ़ापा पेंशन, बीपीएल परिवारों के एक रुपये किलो अनाज आदि को लागू रखने के साथ ही चुनाव में जनता से किए गए वादे पुरा करना बहुत बड़ी चुनौती होगी।

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सेंटर फार रिसर्च इन रुरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (सीआरआरआईडी) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री एसएस सांगवान का कहना है कि नई सरकार के लिए पहली चुनौती तो पूर्व सरकार द्वारा किए गए लोकलुभावन वादे पूरे करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की ही होगी।
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सांगवान ने कहा कि वर्ष 2014-15 के लिए राजस्व घाटा 5013 करोड़ रुपये का दिखाया है जो वर्ष 2011-12 के घाटे से तीन गुना है।

चट्ठा ने बताया था घाटे का कारण

Revenue Deficit, Rising Debt Huge Challenge for Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar

इस घाटे के लिए पूर्व वित्त मंत्री एचएस चट्ठा ने केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) के एरियर की 7000 करोड़ की राशि नहीं जारी किए जाने को वित्तीय घाटे के लिए जिम्मेदार ठहराया था। राजकोषीय उत्तरदायित्व एंव वित्तीय प्रबंधन (एफआरबीएम) एक्ट 2005 के अनुसार, मौजूदा राजस्व घाटा शून्य हो सकता है।

हुड्डा की घोषणाएं बढ़ा गईं 3000 करोड़ का बोझ
सांगवान ने कहा कि हुड्डा सरकार द्वारा की गई घोषणाएं 2000 से 3000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ वाली हैं। प्रदेश में चुनाव की घोषणा से पहले हुड्डा सरकार ने खजाने का मुंह खोलकर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली अनेक योजनाओं का ऐलान किया था।

इनमें बुढ़ापा पेंशन को 1000 रुपये मासिक से बढ़ाकर 1500 रुपये मासिक करना, हरियाणा पुलिस को पंजाब के समान वेतनमान आदि शामिल हैं। इन दो योजनाओं से ही प्रदेश के खजाने पर 3000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है।

कभी था सरप्लस स्टेट, अब कर्जदार

Revenue Deficit, Rising Debt Huge Challenge for Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar

वर्ष 2004-05 से 2007-08 तक हरियाणा राजस्व सरप्लस राज्य था। लेकिन इस अवधि के बाद से हरियाणा का घाटा 200 फीसदी बढ़ते हुए 2014-15 के बजट तक 81,806 करोड़ रुपये हो गया है।

वर्ष 2005-06 में प्रदेश पर कर्ज का बोझ 26268 करोड़ रुपये था, जो 2009-10 में बढ़कर 39332 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2010-11 में कर्ज का यह बोझ 46433 करोड़ रुपये का हो गया और 2011-12 में 50688 करोड़ रुपये होते हुए वर्ष 2012-13 में 60159 करोड़ रुपये पहुंच गया।

भाजपा ने भी चुनाव में किए हैं महंगे वादे
भाजपा भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में, बुढ़ापा पेंशन 2000 रुपये मासिक करने, बीपीएल परिवारों को 1 रुपये किलो अनाज देने, बारहवीं पास बेरोजगारों को 6000 रुपये स्टेफंड देने और बेरोजगार स्नातकों को 100 घंटे पार्ट टाइम वर्क के लिए 9000 रुपये मासिक देने के साथ ही दसवीं व बारहवीं के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटाप देने जैसे वादे कर चुकी है।

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