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Chandigarh News: ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा... पांच साल से एक ही साइट पर यूटी हॉर्टिकल्चर डिवीजन नंबर-2 ने लगाए पौधे
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चंडीगढ़। प्रिंसिपल डायरेक्टर ऑफ ऑडिट (सेंट्रल) चंडीगढ़ ने यूटी प्रशासन के हॉर्टिकल्चर डिवीजन नंबर-2 का वर्ष 2020-21 का ऑडिट किया है। रिपोर्ट में ऑडिट ने कई आपत्तियां जताई हैं। एक पैरा में लिखा गया है कि रिकॉर्ड की जांच में सामने आया है कि विभाग ने पांच साल में एक ही साइट पर पौधरोपण किया है। इस पर चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि विभाग ने ऑडिट को इस पैरा पर विस्तृत जवाब दिया है। वह भी उससे संतुष्ट हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉर्टिकल्चर डिवीजन नंबर-2 की तरफ से अपने क्षेत्र में शहर के ग्रीन कवर को बरकरार रखने के लिए हर वर्ष पौधरोपण अभियान चलाया जाता है। रिकाॅर्ड जांच के दौरान सामने आया कि विभाग की सब डिवीजनों की तरफ से हर साल एक ही स्थान पर लगभग समान संख्या में ही पौधारोपण का लक्ष्य तय किया जाता है। यही नहीं, जो पौधे लगाए गए हैं उनकी सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों को लेकर कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऑडिट ने रिपोर्ट में लिखा है कि यही अनियमितताएं वर्ष 2014-15 से 2018-19 की रिपोर्ट में भी सामने आई थीं, लेकिन विभाग ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह मामला करीब 32.94 लाख रुपये से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग की तरफ से 2014-18 से 2018-19 के बीच में पौधरोपण अभियान पर करीब 37.59 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा भी समय पर काम पूरा नहीं होने, बैंक गारंटी को विभाग की तरफ से वैलिडेट नहीं करने समेत कई अनियमितताएं उजागर की हैं।
किसी कार्य के लिए बनाए जाने वाले अनुमानित राशि पर भी उठाए सवाल
ऑडिट विभाग की तरफ से कहा गया है कि हॉर्टिकल्चर डिवीजन नंबर-2 के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 2020-21 के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया है कि विभाग ने करीब 10 काम पूरे किए हैं। इन कामों की अनुमानित राशि काफी ज्यादा थी क्योंकि ठेकेदार ने इन कामों को 17.75 फीसदी से 81.86 फीसदी तक के डिस्काउंट पर लिया है। ऑडिट ने रिपोर्ट में उन सभी कार्यों की अनुमानित राशि और जिस दाम पर टेंडर आवंटित हुआ है, उसका रिकॉर्ड भी दिया है। लिखा गया है कि इससे साबित होता है कि अनुमानित राशि काफी ज्यादा तय की जा रही है जबकि ऐसा करना जरूरी नहीं है। इस पर विभाग की तरफ से भी कई दलीलें दी गई हैं।
सरकारी संसाधनों का सही नहीं हो पा रहा इस्तेमाल
रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं कि पर्याप्त फंड के अभाव में विभाग की कीमती भूमि के अधिकतम एरिया का सही उपयोग नहीं हो रहा है, जिसकी करोड़ों रुपये की कीमत है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऑडिट ने प्लान हेड में कम फंड जारी करने पर आपत्ति जताई है। रिकाॅर्ड की जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2019-20 के लिए 443.54 लाख और वर्ष 2020-2021 के लिए 508.03 लाख बजट गैर योजना हेड के तहत आवंटित किया गया। अलग अलग डिवीजनों के अंदर काम करते कर्मचारियों के वेतन के लिए राशि भी इसमें शामिल थी। इसी तरह केवल 66.34 लाख और 51.37 वर्ष 2019-2020 और 2020-21 के दौरान मूल कार्यों के लिए प्लान हेड के तहत स्वीकृत किए गए थे। इस तरह प्लान बजट का आवंटन उपरोक्त वर्षों के दौरान बहुत कम रहा, जिस पर ऑडिट की तरफ से सवाल उठाए गए हैं।
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वर्जन--
जवाब के बाद ऑडिट विभाग संतुष्ट
इस मुद्दे पर हमने ऑडिट विभाग को विस्तृत जवाब भेजा है। कहा है कि गार्डन बहुत बड़ा होता है। इसमें अलग अलग जगहों पर अलग अलग वर्ष पौधरोपण किया गया है। क्योंकि गार्डन एक है, इसलिए साइट एक दिखाया गया है। हालांकि पौधरोपण अलग अलग जगह हुआ है। जवाब के बाद से ऑडिट विभाग भी संतुष्ट है। हमने इस मुद्दे पर एक स्पेशल बैठक भी ऑडिट विभाग के साथ की थी ताकि जो भी बातें हैं, वह स्पष्ट हो जाएं। - सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, प्रशासन
एक ही जगह पौधे लग रहे हैं तो जांच होनी चाहिए
शहर में पौधे तो लग ही नहीं रहे हैं। जो लग रहे हैं वह सिर्फ दिखावा है। कई सालों से अगर एक ही जगह पौधे लग रहे हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए। अगर ऐसा ही होता रहा तो कुछ सालों बाद शहर की हरियाली खत्म हो जाएगी। ऐसी लापरवाहियों की वजह से ही शहर में पेड़ों की संख्या नहीं बढ़ रही है। विभाग की तरफ से जो छोटे फूल वाले पौधे (शर्ब) लगाए जा रहे हैं उसका कोई फायदा नहीं होने वाला है। - राहुल महाजन, पर्यावरण के जानकार
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किसी कार्य के लिए बनाए जाने वाले अनुमानित राशि पर भी उठाए सवाल
ऑडिट विभाग की तरफ से कहा गया है कि हॉर्टिकल्चर डिवीजन नंबर-2 के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 2020-21 के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया है कि विभाग ने करीब 10 काम पूरे किए हैं। इन कामों की अनुमानित राशि काफी ज्यादा थी क्योंकि ठेकेदार ने इन कामों को 17.75 फीसदी से 81.86 फीसदी तक के डिस्काउंट पर लिया है। ऑडिट ने रिपोर्ट में उन सभी कार्यों की अनुमानित राशि और जिस दाम पर टेंडर आवंटित हुआ है, उसका रिकॉर्ड भी दिया है। लिखा गया है कि इससे साबित होता है कि अनुमानित राशि काफी ज्यादा तय की जा रही है जबकि ऐसा करना जरूरी नहीं है। इस पर विभाग की तरफ से भी कई दलीलें दी गई हैं।
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सरकारी संसाधनों का सही नहीं हो पा रहा इस्तेमाल
रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं कि पर्याप्त फंड के अभाव में विभाग की कीमती भूमि के अधिकतम एरिया का सही उपयोग नहीं हो रहा है, जिसकी करोड़ों रुपये की कीमत है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऑडिट ने प्लान हेड में कम फंड जारी करने पर आपत्ति जताई है। रिकाॅर्ड की जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2019-20 के लिए 443.54 लाख और वर्ष 2020-2021 के लिए 508.03 लाख बजट गैर योजना हेड के तहत आवंटित किया गया। अलग अलग डिवीजनों के अंदर काम करते कर्मचारियों के वेतन के लिए राशि भी इसमें शामिल थी। इसी तरह केवल 66.34 लाख और 51.37 वर्ष 2019-2020 और 2020-21 के दौरान मूल कार्यों के लिए प्लान हेड के तहत स्वीकृत किए गए थे। इस तरह प्लान बजट का आवंटन उपरोक्त वर्षों के दौरान बहुत कम रहा, जिस पर ऑडिट की तरफ से सवाल उठाए गए हैं।
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जवाब के बाद ऑडिट विभाग संतुष्ट
इस मुद्दे पर हमने ऑडिट विभाग को विस्तृत जवाब भेजा है। कहा है कि गार्डन बहुत बड़ा होता है। इसमें अलग अलग जगहों पर अलग अलग वर्ष पौधरोपण किया गया है। क्योंकि गार्डन एक है, इसलिए साइट एक दिखाया गया है। हालांकि पौधरोपण अलग अलग जगह हुआ है। जवाब के बाद से ऑडिट विभाग भी संतुष्ट है। हमने इस मुद्दे पर एक स्पेशल बैठक भी ऑडिट विभाग के साथ की थी ताकि जो भी बातें हैं, वह स्पष्ट हो जाएं। - सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, प्रशासन
एक ही जगह पौधे लग रहे हैं तो जांच होनी चाहिए
शहर में पौधे तो लग ही नहीं रहे हैं। जो लग रहे हैं वह सिर्फ दिखावा है। कई सालों से अगर एक ही जगह पौधे लग रहे हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए। अगर ऐसा ही होता रहा तो कुछ सालों बाद शहर की हरियाली खत्म हो जाएगी। ऐसी लापरवाहियों की वजह से ही शहर में पेड़ों की संख्या नहीं बढ़ रही है। विभाग की तरफ से जो छोटे फूल वाले पौधे (शर्ब) लगाए जा रहे हैं उसका कोई फायदा नहीं होने वाला है। - राहुल महाजन, पर्यावरण के जानकार